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शी जिनपिंग को बगावत का डर या करप्शन पर एक्शन? टॉप अफसरों को हटाने के क्या मायने

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ताजा कार्रवाई दिखाती है कि चीन की सेना में जारी शुद्धिकरण अभियान समाप्त नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि लगातार सीनियर अधिकारियों को हटाए जाने से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश जाता है। 

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेशनल पीपल्स कांग्रेस (NPC) से 6 सीनियर सैन्य अधिकारियों सहित कुल 13 सदस्यों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब चीन की सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। एनपीसी की स्थायी समिति की ओर से जारी नोटिफिकेशन में हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत कारण नहीं बताए गए, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम शी जिनपिंग के लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है।

हटाए गए सैन्य अधिकारियों में जनरल शू श्वेचियांग, जनरल ली फेंगबियाओ, जनरल गुओ पुशियाओ, वांग कांगपिंग, झांग मिंगहुआ और यिन होंगशिंग शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारी पीएलए के विभिन्न थिएटर कमांड, साइबर स्पेस फोर्स और उपकरण विकास विभाग जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। जानकारों का कहना है कि इन अधिकारियों में से कुछ लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब थे या उनकी गतिविधियों पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, जिससे उनके खिलाफ जांच की अटकलें लगाई जा रही थीं।

भ्रष्टाचार के आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया

सैन्य अधिकारियों के अलावा चीन के पूर्व वित्तीय नियामक प्रमुख ली युन्ज़े और पूर्व शिनजियांग पार्टी प्रमुख मा शिंगरुई को भी एनपीसी की सदस्यता से हटा दिया गया। इन दोनों को भी हाल के महीनों में जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। चीन के सरकारी मीडिया ने केवल इतना कहा कि संबंधित निकायों के फैसले के आधार पर इन सदस्यों को हटाया गया है, लेकिन भ्रष्टाचार या अन्य आरोपों डिटेल को सार्वजनिक नहीं किया गया।

पकड़ मजबूत करने की रणनीति

जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सेना और राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पकड़ को और मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा है। 2012 में सत्ता संभालने के बाद से जिनपिंग ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत हजारों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराई है। पिछले कुछ वर्षों में चीन के रक्षा मंत्रालय, सैन्य खरीद प्रणाली, मिसाइल बल और रक्षा उद्योग से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के दायरे में आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बीजिंग सैन्य नेतृत्व में पूरी राजनीतिक निष्ठा और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है।

शुद्धिकरण अभियान अभी समाप्त नहीं

ताजा कार्रवाई यह दिखाती है कि चीन की सेना में जारी शुद्धिकरण अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि लगातार सीनियर अधिकारियों को हटाए जाने से एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश जाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट होता है कि चीनी नेतृत्व सेना के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी, वित्तीय अनियमितता या राजनीतिक असहमति को बर्दाश्त नहीं करना चाहता। हालांकि चीनी सरकार ने इन मामलों में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन हालिया घटनाक्रम से यह साफ है कि शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम आने वाले समय में भी चीन की राजनीति और सैन्य ढांचे को प्रभावित करती रहेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN