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सब्जियों के बढ़ते दाम ने बिगाड़ा रसोई का बजट, ₹250 तक पहुंची नींबू की कीमत, अदरक भी महंगा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

त्योहारी सीजन में भले ही सरकार आम लोगों को राहत देने के लिए तरह-तरह के कदम उठा रही है। हालांकि, सब्जियों की बढ़ती कीमतें आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ने लगी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के मंडियों में सब्जी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। हरियाणा के हथीन की सब्जी मंडी की ही बात करें तो रोजमर्रा की जरूरत वाली कई सब्जियों के भाव बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी प्याज, नींबू और अदरक की कीमतों को लेकर है। मंडी में प्याज 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है जबकि नींबू 250 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। वहीं अदरक की बात करें तो 125 रुपये प्रति किलो के भाव पर है। हथीन की सब्जी मंडी में फूलगोभी 60 से 65 रुपये किलो बिक रही है, जबकि टमाटर का भाव 50 से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह, तोरी 40 से 50 रुपये, अरबी 40 रुपये, खीरा 60 रुपये, गाजर 60 रुपये और कद्दू 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि आलू की कीमत अभी तुलनात्मक रूप से कम है और यह करीब 25 रुपये किलो के भाव पर उपलब्ध है।

खाद्य तेल घटंगे दाम?

इस बीच, सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों से आयात शुल्क में कमी का पूरा लाभ ग्राहकों को देने को कहा है। बता दें कि सरकार ने कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर इसे 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत कर दिया गया था।

कच्चे सोयाबीन तेल और पाम तेल पर बीसीडी को 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है, और रिफाइंड सोयाबीन तेल और पाम तेल पर इसे 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है। उद्योग से जुड़े लोगों से कहा गया है कि वे आयात लागत में कमी के हिसाब से वितरक को बेचे जाने वाले दाम (पीटीडी) और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में तुरंत बदलाव करें। मंत्रालय ने खाद्य तेल बनाने वाली कंपनियों के संगठनों को निर्देश दिया है कि वे अपने सदस्यों को सलाह दें कि बिना किसी देरी के कीमतों में उसी हिसाब से कमी लागू करें।

शुल्क में कटौती पर मंत्रालय ने कहा कि इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों को नियंत्रित करना, ग्राहकों को राहत देना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में तेजी से पैदा हुए महंगाई के दबाव को कम करना है। मंत्रालय ने कहा कि उसने कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेल के बीच शुल्क का अंतर बनाए रखा है ताकि घरेलू रिफाइनिंग क्षमता के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके और रिफाइंड खाद्य तेल के ज्यादा आयात को हतोत्साहित किया जा सके।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN