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चीन के रोजगार बाजार में मंदी और 996 वर्क कल्चर से परेशान युवा अब महानगर छोड़कर गांवों में चरवाहे की नौकरी तलाश रहे हैं। सिर्फ 2 पदों के लिए 700 से ज्यादा ग्रेजुएट्स और कॉर्पोरेट कर्मचारियों ने आवेदन किया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

चीन में रोजगार संकट और खराब वर्किंग कल्चर का आलम यह है कि लोग महानगरों की अच्छी-खासी नौकरियां छोड़कर सुदूर गांवों में चरवाहे का काम करने को तैयार हैं। मंगोलिया के पास बीहड़ घास के मैदानों में चरवाहे की नौकरी का एक विज्ञापन चीनी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस एक विज्ञापन ने देश के लेबर मार्केट यानी रोजगार बाजार में बढ़ते तनाव और युवाओं की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

चीन के एक फार्म मालिक, जुओ शियाओयोंग ने जब मंगोलिया के दक्षिणी हिस्से में स्थित अपने घास के मैदानों के लिए ‘चरवाहे’ यानी भेड़ चराने वाले की नौकरी का विज्ञापन निकाला, तो उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह देश भर में चर्चा का विषय बन जाएगा। शियाओयोंग ने अप्रैल के अंत में मंगोलिया के दक्षिण में बीहड़ घास के मैदानों में 2 चरवाहों की जरूरत के लिए एक विज्ञापन निकाला था।

यह विज्ञापन चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीबो’ पर रातों-रात वायरल हो गया। Weibo को चीन का एक्स यानी ट्विटर कहा जाता है। कुछ ही घंटों में इस विज्ञापन को 5.9 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया और इस पर 21,000 से ज्यादा चर्चाएं (डिस्कशन थ्रेड) शुरू हो गईं। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि सिर्फ 2 पदों के लिए 700 से ज्यादा लोगों ने आवेदन कर दिया।

कौन-कौन कर रहा है अप्लाई?

आवेदन करने वालों में शंघाई और चोंगकिंग जैसे महानगरों के व्हाइट-कॉलर कर्मचारी, फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर और यूनिवर्सिटी टॉपर, ग्रेजुएट भी शामिल हैं। फार्म मालिक जुओ के मुताबिक, कुल आवेदकों में से 10 फीसदी तो हाल ही में यूनिवर्सिटी से पास आउट हुए युवा हैं।

लोग भारी कर्ज, फैक्ट्रियों की थका देने वाली नौकरी और ऑफिस की राजनीति से परेशान होकर यह नौकरी करना चाहते हैं। फार्म मालिक खुद यह देखकर हैरान थे कि आम लोगों के लिए नौकरी खोजना कितना मुश्किल हो गया है।

कितनी है सैलरी और क्या है काम?

इस काम के लिए हर महीने 8,000 युआन (करीब 1.1 लाख रुपये) दिए जाएंगे। साथ ही रहने और खाने (किराने का सामान) की मुफ्त सुविधा भी मिलेगी। चीन की प्राइवेट कंपनियों में राष्ट्रीय शहरी औसत वेतन करीब 6,000 युआन (करीब 84 हजार रुपये) है, यानी चरवाहे की सैलरी इससे कहीं ज्यादा है।

काम की चुनौती: गर्मियों में 2,000 हेक्टेयर के चरागाह में 3,000 भेड़ों को चराने ले जाना होगा। वहीं, सर्दियों में जब तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस (-30°C) से भी नीचे चला जाता है, तब घर के अंदर ही भेड़ों को चारा खिलाने और साफ-सफाई का भारी और थकाऊ काम करना होगा।

‘996’ वर्क कल्चर और ’35 का श्राप’

चीन में बेरोजगारी दर 5 फीसदी से थोड़ा ऊपर है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर की आय में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। असली समस्या ‘996’ वर्क कल्चर की है, जहां लोगों को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन काम करना पड़ता है।

जेम्स गुओ नाम के 21 वर्षीय युवा ने भी इस नौकरी के लिए आवेदन किया। वह कंटेनर बनाने वाली फैक्ट्री में रोज 13 घंटे से ज्यादा पेंच कसने का काम करते थे, जिससे उनके हाथों में छाले पड़ गए थे और उन्हें वॉशरूम जाने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी।

ई-कॉमर्स सेक्टर में 10,000 युआन कमाने वाली 28 वर्षीय महिला कर्मचारी वू ने बताया कि वह शहरी जीवन की भागदौड़ और मुश्किल लोगों से दूर एक शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहती हैं।

युवाओं की इस हताशा का एक और बड़ा कारण ’35 का श्राप’ है। 700 आवेदकों में से आधे 1990 के दशक में पैदा हुए लोग थे। अध्ययनों से पता चलता है कि सरकारी और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में कंपनियां 35 साल से ज्यादा उम्र के उम्मीदवारों को नौकरी देने से कतराती हैं। अब यह सिर्फ टेक-कंपनियों का मजाक न रहकर, पूरे चीन की कड़वी आर्थिक सच्चाई बन गया है।

इसके अलावा, आने वाले महीनों में जॉब मार्केट और खराब होने की आशंका है। ईरान युद्ध के कारण फैक्ट्रियों की लागत बढ़ रही है, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल इंसानों की जगह ले रहा है, और इस गर्मियों में 1.27 करोड़ नए ग्रेजुएट्स नौकरी की तलाश में बाजार में उतरने वाले हैं।

अंत में नौकरी किसे मिली?

इतने सारे आवेदनों के बावजूद, फार्म मालिक जुओ ने अंत में कृषि का अनुभव रखने वाले चार लोगों (दो शादीशुदा जोड़ों) को काम पर रखा है। ये सभी 1980 के दशक में पैदा हुए थे। उन्होंने 40 अन्य जोड़ों को शॉर्टलिस्ट किया है, लेकिन स्पष्ट कर दिया है कि वे इस कठिन काम के लिए किसी कुंवारे या शहरी युवाओं पर विचार नहीं करेंगे।

जुओ ने बताया कि यह कोई पर्यटन नहीं है। यह जगह इतनी सुनसान है कि आपको पूरे एक साल तक कोई दूसरा इंसान नजर नहीं आएगा। उन्हें शक था कि शहर के युवा इतनी कड़ाके की ठंड और ऐसे भयंकर अकेलेपन को लंबे समय तक बर्दाश्त कर पाएंगे या नहीं।

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