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सोनम वांगचुक ने कहा- मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरी महबूब न मांग, चिराग बोले- युवाओं को कौन रोक सकता है?

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Source :- BBC INDIA

चिराग पासवान

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पढ़ने का समय: 7 मिनट

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को लेकर कुछ विरोधाभासी तस्वीरें सामने आई हैं.

इस साल जुलाई महीने में दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा रहे सोनम वांगचुक ने कहा है कि इस बार उनका आना अनिश्चित है.

सीजेपी के प्रदर्शन से एक दिन पहले उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि शायद इस बार वो न आएं.

वहीं एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता और मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि मौजूदा संकट के समाधान के लिए संवाद की ज़रूरत है.

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को कोई रोक नहीं सकता.

दिल्ली में 10 अक्तूबर को सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है.

देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया है.

साथ ही दिल्ली के अंदर 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. जंतर-मंतर और इससे चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया गया है.

सीजेपी ने वामपंथी छात्र संगठनों, किसान संगठनों और अन्य समूहों के साथ मिलकर शनिवार को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. ये संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

इनका कहना है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, जिसकी वजह से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं. इसके लिए ज्ञानेश कुमार ज़िम्मेदार हैं.

सोनम वांगचुक ने क्या कहा

सोनम वांगचुक

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता नीट पेपर लीक के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगने के लिए जंतर मंतर पर सीजेपी के हुए प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा थे.

उन्होंने उस दौरान 23 दिनों की भूख हड़ताल की थी.

माना जा रहा था कि इस बार भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन में वो शामिल होंगे.

उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन किया है लेकिन अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने कहा, ”आप में से बहुतों ने पूछा है कि हम कहाँ हैं, ख़ामोश क्यों हैं, दिल्ली में संघर्ष शामिल क्यों नहीं हूँ? देश पर मंडरा रहे राजनीतिक ख़तरों को टालने के लिए आप सब एकजुट हुए हैं. मैं इसकी प्रशंसा करता हूँ. वहीं मैं यह कहूँ कि ख़तरे केवल राजनीतिक नहीं बल्कि प्राकृतिक भी हैं. फ़ैज़ साहब के अंदाज़ में कहूं तो- और भी ग़म हैं ज़माने में सियासत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा.”

”जो राहत चाहिए वह सिर्फ़ मिलने की ही नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से बचने की राहतों की भी ज़रूरत है. तो मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरी महबूब न मांग.”

उन्होंंने कहा, ”पहले की तरह मैं शायद इस बार ना आ पाऊँ क्योंकि पहले जब चूल्हे में आग जलानी थी तो माचिस की तीली की ज़रूरत पड़ती है और जब चूल्हा जलने लगता है तो खाना पकने लगता है, चल पड़ता है सब कुछ. तो मुझे उम्मीद है, आप सब राजनीतिक समस्याओं से भिड़ेंगे और यहाँ हम प्राकृतिक आपदाओं से.”

सोनम वांगचुक ने कहा, ”आपको मालूम है, नेपाल में पिछले महीनों कितनी बड़ी आपदा आई जब भोटेकोशी में एक झील के फटने से बहुत नुकसान हुआ, हज़ारों जानें गईं. उससे पहले आपको याद होगा सिक्किम में लोनाक लेक के फूटने से कितनी तबाही मची”

”इन ख़तरों को टालने के भी देश को बचाने के लिए उतनी ही ज़रूरत है, जितना कि सियासी-राजनीतिक ख़तरों से जैसे आप जूझ रहे हैं. तो मैं आख़िर में यही कहूँगा आप सभी से कि जुटकर मुक़ाबला कीजिएगा. जो नेतृत्व करने वाले हैं, उनसे कहूँ कि एकजुट होकर संघर्ष कीजिएगा. एकता में बल है. अलग-अलग खेमों में, गुटों में बँटकर नहीं, एक बनकर संघर्ष कीजिएगा. और जनता से, युवाओं से कहूँगा कि आप शांति का दामन कभी न छोड़ें.”

उन्होंने कहा, ”बापू का एक तोहफ़ा था जो मैं आप लोगों के लिए दिल्ली लेकर आया था. उस तोहफ़े को कभी हाथ से न छोड़ें. जो भी आपदा आए, आप पर शांति बनाए रखें. जीत आपकी ही होगी. और कभी अगर चूल्हा बुझ जाए तो इस माचिस, इसको या नाचीज़ को याद कीजिएगा.”

चिराग पासवान क्या बोले

चिराग पासवान

शुक्रवार को हरियाणा के एक कार्यक्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि मौजूदा संकट के समाधान के लिए संवाद ज़रूरी है.

शुक्रवार को हरियाणा के एक कार्यक्रम में उन्होंने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.

लेकिन दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों को रद्द करने, इंटरनेट शटडाउन और मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के सवाल पर कहा कि भारत के युवाओं को कोई रोक नहीं सकता.

शुक्रवार को सोनीपत (हरियाणा) के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह में हिस्सा में उन्होंने कहा, “ये भारत के युवा हैं. उन्हें कोई नहीं रोक सकता.”

पासवान ने प्रोटेस्ट पर पूछे गए सवाल पर कहा, “कितनी ट्रेनें रोकी जा सकती हैं और कितने दिनों तक? कितनी सड़कें बंद की जा सकती हैं? क्या इससे सच में युवा प्रदर्शनकारियों को रोका जा सकता है?”

पासवान ने कहा कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए.

उन्होंने अपने अभियान ‘यूथ बोले तो’ का ज़िक्र करते हुए बताया कि इसके ज़रिए वे सभी तरह के विचारों, सहमति और असहमति को मंच देते हैं और जेन ज़ी की चिंताओं, सुझावों और शिकायतों को सुनते हैं.

उन्होंने कहा, “मैं सहमत हो सकता हूँ या असहमत, लेकिन हम संवाद करते हैं ताकि अंत में समाधान निकाल सकें. इसलिए कल के आह्वान के संबंध में मेरा मानना है कि संवाद होना चाहिए, ताकि हम सकारात्मक निर्णय की ओर बढ़ सकें.”

हालांकि, पिछले तीन दिनों में विपक्ष के प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपका एकमात्र मक़सद सिर्फ़ विरोध करना है, तो आगे बढ़िए. लेकिन सिर्फ़ विरोध से समाधान नहीं निकलेगा. संवाद से निकलेगा.”

”अगर आप कोई बात साबित करना चाहते थे, तो आपने पहले ही दिन कर दी. लेकिन दिल्ली की सड़कों को बार-बार जाम करके आम नागरिकों को परेशानी पहुंचाना कहां तक जायज़ है? आप यह राजनीति के लिए कर रहे हैं. चुनाव नहीं जीत पा रहे, इसलिए आम नागरिकों को परेशान कर रहे हैं.”

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भरोसा जताते हुए कहा कि वो सवालों के जवाब देने को तैयार होंगे.

उन्होंने कहा, ”विरोध मार्च आयोजित करने के बजाय अगर विपक्ष ने भारत के चुनाव आयोग से मुलाक़ात का समय मांगा होता, तो उसे अपने सभी सवालों के जवाब मिल जाते.

चिराग पासवान ने कहा, “बात यह है कि वे वास्तव में समाधान नहीं चाहते. वे सिर्फ़ रोज़ हंगामा करना चाहते हैं, जो वे पिछले तीन दिनों से लगातार कर रहे हैं,”

प्रदर्शन से पहले पुलिस की कैसी तैयारी

जंतर मंतर

प्रोटेस्ट को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं. दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के 45 स्टेशन बंद कर दिए गए. नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन आने या वहां से रवाना होने वाली कम से कम 245 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं.

सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भारत सरकार लॉकडाउन में है. यह युवाओं की ताकत है! आप सभी से कल मिलते हैं.”

सेंट्रल दिल्ली के बड़े हिस्से में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया और राजधानी की सड़कों और सीमाओं पर कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है. दिल्ली को किसी किले में तब्दील करने करने जैसी तैयारी दिख रही है.

गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक़, जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित रहेंगी.

इसमें कहा गया है, “इंटरनेट सेवाओं पर यह प्रतिबंध 9 अक्तूबर की रात 10 बजे से 10 अक्तूबर की रात 10 बजे तक लागू रहेगा.”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ शुक्रवार शाम तक दिल्ली में कम से कम 30,000 पुलिसकर्मियों और अर्द्धसैनिक बलों को उतारा गया.

इस बीच, शुक्रवार शाम विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की और चुनाव आयोग के अलावा केंद्र सरकार की ओर से कथित “वोट चोरी” के मामले में उन्हें ज्ञापन सौंपा.

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि वे ऐसा ही एक ज्ञापन भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी सौंपेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS