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स्वरा भास्कर ने क्या ‘जौहर को कायरता’ बताया था, अब क्या बोलीं?

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Source :- BBC INDIA

स्वरा भास्कर

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पढ़ने का समय: 5 मिनट

अभिनेत्री स्वरा भास्कर के एक हालिया बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफ़ाई दी है.

31 अगस्त को दिल्ली में एक कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फ़िल्म पद्मावत को लेकर पूछे गए सवाल पर यह बयान दिया था.

इस बयान के बाद स्वरा भास्कर को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है.

स्वरा भास्कर ने आख़िर क्या कहा था?

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दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में वुमन लाइफ़ फ़्रीडम टॉक नामक कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने कहा था, “जब मैं फ़िल्म का सीन देख रही थी जिसमें सभी 800 महिलाएं जौहर करती हैं तो मैंने सोचा कि यार ईश्वर ना करे लेकिन अगर मैं रेप सर्वाइवर होती तो ये फ़िल्म आख़िर मुझे क्या संदेश दे रही है? मैं कायर जैसा महसूस करती कि मैंने ख़ुद की इज़्ज़त बचाने के लिए अपनी जान नहीं ली.”

“क्या आप हमारे जैसे समाज में यही संदेश देना चाहते हैं, जहाँ वैसे भी मुझे लगता है कि बलात्कार एक महामारी की तरह फैल रहा है? क्या हम अपनी रेप सर्वाइवर्स को ये कहना चाह रहे हैं कि आपको जीने का अधिकार नहीं है… कि अगर वो सम्मानित और बहादुर महिलाएं होतीं तो वे अपनी जान दे देतीं.”

“क्या हम किसी औरत से ये कहना चाह रहे हैं कि रेप उसकी ज़िंदगी का अंत है? बहुत सारी चीज़ें हैं जो परेशान करने वाली हैं.”

स्वरा भास्कर ने बयान पर अब क्या कहा?

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उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक वीडियो क्लिप वायरल है, जो एक इवेंट में मैंने कहा था. मुझसे पूछा गया था कि संजय लीला भंसाली सर को जो ओपन लैटर मैंने पद्मावत फ़िल्म को लेकर लिखा था, वो मैंने क्यों लिखा था? तो वो जवाब देने में जब मैं समझा रही थी कि वो लैटर मैंने क्यों लिखा था, मेरी दिक्कत क्या थी? मैंने कुछ कहा था, जो अब सरासर ग़लत तरीक़े से अनुवादित हो रहा है.”

“जो एक झूठ बनाकर फैलाया जा रहा है कि मैंने ये कहा कि रानी पद्मावती और बाक़ी औरतें जिन्होंने जौहर किया था वो कायर हैं. मैं साफ़ तौर पर कह रही हूं कि मैंने कतई ऐसा नहीं कहा कि रानी पद्मावती कायर थीं और मैंने ये भी नहीं कहा कि वो बाकी महिलाएं, वो रानियां जिन्होंने जौहर किया था वो कायर थीं.”

“मैंने क्या कहा… इंग्लिश में कहा था और मैं उसका अनुवाद खुद करके बता देती हूं क्योंकि जब भाषा समझ नहीं आती है तो पूछ लेना चाहिए, चेक कर लेना चाहिए. मनगढ़ंत झूठ बनाकर फैलाना नहीं चाहिए और लोगों को उत्तेजित नहीं करना चाहिए. जो लोग मुझे गालियां देना चाहते हैं, दीजिए लेकिन सही चीज़ पर दीजिए.”

“मैंने क्या कहा था- जब मैं क्लाइमेक्स देख रही थी, मुझे लगा कि भगवान ना करे मैं एक रेप पीड़िता होती, मैं कायर महसूस करती कि मैंने अपनी जान नहीं ले ली. यानी कि मैं ऐसा महसूस करती कि बलात्कार के बाद मैं ज़िंदा बच गई तो मैं एक कायर थी. मैंने ऐसा क्यों कहा…हमारा समाज एक ऐसा समाज है जहां रेप एक महामारी की तरह फैला हुआ है.”

“कल ही दिल्ली में एक बहुत ही बर्बर और हिंसक गैंगरेप की घटना हुई है. जहां एक बच्ची के साथ 46 किलोमीटर तक गैंगरेप हुआ, एक गाड़ी में. ये असलियत है हमारे देश की. क्या हमें ऐसी फ़िल्में बनानी चाहिए जहां ये संदेश जा रहा है कि एक औरत की शारीरिक पवित्रता उसकी ज़िंदगी से ज़्यादा मूल्यवान है? क्या हमें जो हमारे रेप के सर्वाइवर्स हैं, जो रेप पीड़ित लोग हैं उनको ये संदेश देना चाहिए कि तुम्हारी जान ही चली जाती तो बेहतर था कि तुम ज़िंदा बच गई तो ये बुरी बात है.”

“क्या एक महिला की ज़िंदगी रेप के साथ ख़त्म हो जानी चाहिए. मेरा सवाल ये है. और ये कभी नहीं भूलना कि वो बहादुर लड़की निर्भया… उसने अपने छह बलात्कारियों के साथ मरते दम तक लड़ाई लड़ी. उसमें ऐसी जीने की लालसा थी. छह आदमियों ने उसके साथ इतनी बर्बरता के साथ, इतना प्रताड़ित किया… वो मर गई लेकिन मरते दम तक लड़ी. तो कभी भी महिलाओं की जो जीने की इच्छा है और जो लालसा है, उसे कभी भी कम मत समझिएगा.”

स्वरा भास्कर ने 2018 में क्या लिखा था?

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स्वरा भास्कर से इस कार्यक्रम में उनसे संजय लीला भंसाली को लिखे गए खुले ख़त को लेकर सवाल किया गया था.

स्वरा भास्कर ने कहा कि उन्होंने खुला ख़त फ़िल्म देखने के तुरंत बाद नहीं बल्कि पांच दिन के इंतज़ार के बाद लिखा था. अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ओपन लेटर पर जमकर विवाद हुआ. बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी निंदा की.

उस पत्र में भी स्वरा भास्कर ने फ़िल्म में जौहर के चित्रण पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

स्वरा ने चिट्ठी में कहा था कि इस भव्य फ़िल्म के आख़िर में उन्होंने ख़ुद को महज़ एक ‘वजाइना’ (योनि) में सिमटा हुआ पाया.

स्वरा का कहना था कि ‘पद्मावत’ स्त्री विरोधी फ़िल्म है जो सालों से चली आ रही रूढ़िवादी और भेदभावपूर्ण मान्यताओं को बढ़ावा देती है.

उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि आपकी फ़िल्म हमारे सामने अंधेरे युग का वही सवाल सामने ला खड़ा करती है- क्या विधवा, बूढ़ी, गर्भवती और बलात्कार की शिकार औरतों को जीने का अधिकार है?”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS