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हीरा खरीदना अब किसी के लिए ज्यादा मु्श्किल नहीं है। सोने-चांदी से सस्ता हीरा बिक रहा है और इसका एक कारण है लैब में बन रहा डायमंड। चलिए आपको बताते हैं लैब ग्रोन डायमंड क्या होते हैं और इन्हें खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान।
हीरे का हार, अंगूठी, ईयररिंग्स पहनना हर औरत का सपना होता है लेकिन हीरों का नाम आते ही दिमाग में महंगा बजट और जमीन से निकला हीरा होता है। लेकिन अब हीरा खरीदना भी ज्यादा मुश्किल नहीं रहा। जी हां, अब बाजार में लैब में तैयार किए गए हीरे बन रहे हैं, जो सेम कम्पाउंड का इस्तेमाल कर बनाए जाते हैं और देखने में असली लगते हैं लेकिन ये जमीन से निकले हुए नहीं होते। बस नेचुरल हीरे से इसकी कीमत कम हो सकती है और कट, क्वालिटी में ये असली हीरे जैसा की तैयार किया जाता है। चलिए आपको इस हीरे के बारे में पूरी जानकारी देते हैं और बताएंगे कि असली और लैब ग्रोन डायमंड के बीच फर्क कैसे करें?
लैब में बने डायमंड क्या होते हैं?
लैब में बने हीरा नकली नहीं होता है, ये असली ही माना जाता है बस इसे बनाने का प्रोसेस अलग होता है। असली हीरे धरती के अंदर ज्यादा दबाव और तापमान में लाखों-करोड़ों साल में बनते हैं। लेकिन लैब में बनने वाले हीरे एक तरह के वातावरण में तैयार किए जात हैं, जिन्हें बनाने में मशीनों का इस्तेमाल होता है। इन हीरों को दो अलग तरह से बनाया जाता है- HPHT यानी हाई प्रेशर हाई टेंपरेचर और CVD यानी केमिकल वेपर डिपोजिशन। दोनों ही तरीकों में कार्बन से डायमंड क्रिस्टल तैयार कर हीरा बनाया जाता है।
कीमत क्यों होती है कम?
अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर लैब में बने हीरों की कीमत में इतना अंतर क्यों है? इसका जवाब है कि लैब में इन हीरों को ज्यादा से ज्यादा बनाकर तैयार किया जा सकता है और बाजार में ये आम ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं। असली हीरे को निकालने, तराशने और फिर बाजार तक पहुंचाने में काफी समय लग जाता है, जिसका असर उसकी कीमत पर दिखता है। लैब ग्रोन डायमंड की कीमत 30 हजार रुपये से शुरू होती है और फिर ये इसकी डिजाइन-कट पर निर्भर करती है।
निवेश के लिए सही नहीं
अगर आप हीरा किसी निवेश के लिए खरीद रहे हैं तो लैब में बना डायमंड आपके लिए सही नहीं है। अगर आप पत्नी को हीरों का हार सिर्फ पहनाने के लिए लेना चाहते है, तो कम बजट में किफायती हीरों का हार या अंगूठी ले सकते हैं। लैब में बने हीरों की कीमत कम या ज्यादा हो सकती है और इसमें बदलाव भी हो सकते हैं। ऐसे में निवेश के लिए असली हीरे ही सही ऑप्शन है।
लैब वाले हीरे खरीदते समय 3 बातों का रखें ध्यान
बाजार में इन दिनों हर चीज में ठगी, मिलावट और स्कैम चल रहा है। आप असली की जगह लैब ग्रोन डायमंड लेने जा रहे होंगे तब भी आप नकली हीरे खरीद सकते हैं। 4C यानी कट, कलर, क्लैरिटी और कैरेट डायमंड खरीदते समय चेक करना आज भी जरूरी है लेकिन कुछ और भी बातें हैं, जिन्हें आप जान लीजिए।
- लैब में बना है या नकली है
अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन के अनुसार, लैब में बने डायमंड को साफ तौर पर लैब ग्रोन या लैब क्रिएटेड बताया जाना चाहिए। इसे माइन से निकला प्राकृतिक डायमंड बताकर नहीं बेचा जा सकता। आप सीधे तौर पर पूछ सकते हैं कि ये हीरा कहां से आया है। साथ ही इसके डिजाइन, कट, कलर पर गौर करें।
- सर्टिफिकेट जरूर चेक करें
GIA लैब ग्रोन डायमंड के लिए खास रिपोर्ट जारी करता है। इन रिपोर्ट्स में लैब ग्रोन डायमंड को प्राकृतिक डायमंड से अलग बताया जाता है। कुछ डायमंड पर लेजर से भी लिखा होता है कि वह लैब में बना है। आप पहले चेक करें कि ये हीरा लैब में बना भी है या नहीं। कहीं आप नकली तो नहीं खरीद रहे हैं। डायमंड खरीदने से पहले ज्वेलर से वारंटी, मरम्मत, एक्सचेंज या अपग्रेड, रिटर्न और आगे की सर्विस के बारे में भी पूछना जरूरी है।
- कलर-कट पर करें गौर
आप डायमंड खरीदते समय उसके कट पर ध्यान दें। कई बार बड़े और चमक वाले डायमंड का कट खराब होता है या फिर सही से फिनिशिंग नहीं होती, ऐसे हीरे न खरीदें। इसके साथ ही सवाल करें कि लैब ग्रोन डायमंड को बनाने के बाद उनकी चमक या रंग में बदलाव के लिए ट्रीटमेंट दिया है या नहीं और इसकी पूरी जानकारी लें।
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