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मई में दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतों में उछाल के कारण रूस के राजस्व में सालाना आधार पर 32.4% की वृद्धि तो हुई, लेकिन अप्रैल की तुलना में इसमें 20.7% की गिरावट दर्ज की गई है।
अपने पश्चिमी पड़ोसी देश यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूस ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर यह कबूल किया है कि उसका तेल उत्पादन घट गया है। गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में रिपोर्टरों से बात करते हुए, रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि मौजूदा तेल उत्पादन साल की शुरुआत की तुलना में कम है क्योंकि कई रिफाइनरियों में बिना शेड्यूल के मरम्मत का काम चल रहा है। इस तरह किसी रूसी अधिकारी ने पहली बार साफ तौर पर माना कि देश का तेल प्रोडक्शन 2026 में गिर गया है। हालांकि, उन्होंने इसका मुख्य कारण कई रिफाइनरियों में चल रही “अनिर्धारित मरम्मत” को बताया है।
दरअसल, रूसी उप प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों का जिक्र नहीं किया लेकिन यह गिरावट यूक्रेन द्वारा रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर तेज किए गए ड्रोन हमलों के बीच आई है। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस की कई प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है, जिनमें सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल भी शामिल है। यहां हाल ही में आर्थिक मंच की मेजबानी के दौरान 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर यूक्रेनी ड्रोनों ने इसे निशाना बनाया।
क्या बोले यूक्रेनी राष्ट्रपति?
बुधवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक तेल टर्मिनल पर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई, जबकि शहर अपने सालाना इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की मेज़बानी कर रहा था। ज़ेलेंस्की के मुताबिक, टारगेट तक पहुंचने के लिए ड्रोन ने 1,000 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र किया था। इनके अलावा यूक्रेनी ड्रोनों के हमलों में मॉस्को, रियाज़ान, नोरसी (रूस की चौथी सबसे बड़ी), सिज़रान और टुआप्स जैसी रिफाइनरियों में भी कामकाज ठप हुआ है। इतना ही नहीं, अस्त्रखान और पर्म क्षेत्रों में भी हमलों के कारण गैस और तेल प्रसंस्करण इकाइयों को भारी नुकसान पहुँचा है।
460,000 बैरल प्रति दिन गिरा उत्पादन
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, अप्रैल में रूस का कच्चा तेल उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 460,000 बैरल प्रति दिन गिरकर लगभग 8.8 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है। रिफाइनरियों में कामकाज प्रभावित होने के कारण, रूस अब अपने कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजने के लिए मजबूर है, जिसके कारण मई में कच्चे तेल के निर्यात में 15% की वृद्धि देखी गई है। बता दें कि रूस के बजट का लगभग पाँचवां हिस्सा तेल और गैस राजस्व से आता है। मई में दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतों में उछाल के कारण रूस के राजस्व में सालाना आधार पर 32.4% की वृद्धि तो हुई, लेकिन अप्रैल की तुलना में इसमें 20.7% की गिरावट दर्ज की गई है।
राजस्व नुकसान मकसद
इस बीच, यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य रूस के युद्ध प्रयासों के लिए जरूरी तेल उत्पादन और हथियार निर्माण को बाधित करना है। नोवाक ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही रिफाइनरियां पूरी तरह से चालू होंगी, उत्पादन फिर से पुराने स्तर पर लौट आएगा लेकिन तब तक, यूक्रेन के ये ‘लॉन्ग-रेंज’ ड्रोन हमले रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती खड़े कर चुके होंगे। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण सिर्फ रिफायनरीज ही नहीं बल्कि टेम्रियुक बंदरगाह, यारोस्लाव ईंधन भंडारण सुविधाओं, प्रिमोर्स्क तेल निर्यात केंद्र, प्रिमोर्स्क को आपूर्ति करने वाले ट्रांसनेफ्ट पंपिंग स्टेशन, समारा तेल प्रेषण सुविधा और काला सागर तट पर स्थित शेषखारिस तेल टर्मिनल में भी आग लग चुकी है।
भारत पर क्या असर?
जाहिर है, रूसी तेल उत्पादन में गिरावट का असर भारत पर भी पड़ने वाला है क्योंकि अभी भी भारत के लिए रूस सबसे बड़ा तेल सप्लायर है। मई 2026 के आंकड़े देखें तो टॉप पांच सप्लायर्स में रूस नंबर एक पायदान पर बना हुआ है, जहां से प्रतिदिन 1966000 बैरल प्रतिदिन तेल की सप्लाई हो रही है। इस दौरान रीस ने दूसरे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता UAE की तुलना में 3.5 गुना अधिक कच्चे तेल की आपूर्ति भारत को की है। वेनेज़ुएला भारत के कच्चे तेल के मिश्रण में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में वापस आ गया है, जबकि US अभी भी शीर्ष 5 आपूर्तिकर्ताओं में शामिल नहीं हुआ है। टॉप पांच आपूर्तिकर्ताओं में दूसरे नंबर पर UAE, तीसरे पर सऊदी अरब, चौथे पर ब्राजील और पांचवें पर वेनेजुएला ने वापसी की है।
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