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यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के साथ-साथ देश के लाल सागर तट पर स्थित ऊर्जा संयंत्रों को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया.
सऊदी अधिकारियों ने कहा कि शनिवार को रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया गया. हालांकि, उन्होंने किसी अन्य हमले या जानमाल के नुक़सान की पुष्टि नहीं की.
इससे पहले शनिवार को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास ईंधन टैंकों से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया. इस वजह से कुछ समय के लिए उड़ानों पर असर पड़ा.
राजधानी में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन पहली बार तब सुनाई दिए थे, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने जुलाई में सऊदी अरब पर अपने हमले बढ़ा दिए थे.
इस बीच, तुर्की ने इन हमलों को लेकर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि अगर ज़रूरी हुआ तो सऊदी अरब को सैन्य मदद दी जाएगी.
बीबीसी संवाददाता पैट्रिक जैकसन के मुताबिक़ अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से “सतर्क रहने और कुछ उड़ानें रद्द होने और यात्रा में दूसरी अड़चनों के लिए तैयार रहने” को कहा है.
उसने एक बयान में कहा, “ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की है, जिसमें नागरिक हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया है. इस सैन्य संघर्ष के तेज़ी से बढ़ने की आशंका है.”
विभाग ने यह भी कहा कि अमेरिकी नागरिकों को “इस क्षेत्र में और इस रास्ते के जरिये यात्रा करने पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए.”
सऊदी अरामको के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
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सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने बिशा, ताइफ़, फ़रासान और यनबू शहरों में “नागरिकों को निशाना बनाने की दुश्मन की कोशिशों” को भी नाकाम कर दिया.
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या अल-सरीया ने ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक बयान में कहा कि रियाद में “संवेदनशील ठिकानों” और लाल सागर के तट पर स्थित सरकारी तेल और गैस कंपनी सऊदी अरामको की यनबू स्थित सुविधाओं पर हमला करने के लिए “बड़ी संख्या में बैलिस्टिक, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन” का इस्तेमाल किया गया.
उन्होंने कहा कि ये हमले “सऊदी दुश्मन की ओर से यमनी राजधानी सना को निशाना बनाने की आपराधिक कोशिशों के जवाब में” किए गए हैं. सना पर अभी हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है.
इससे पहले अल-सरीया ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने पिछले एक सप्ताह में यमन में 300 हवाई हमले किए हैं.
हूती विद्रोही यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के ख़िलाफ़ गृहयुद्ध लड़ रहे हैं. इस सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है.
हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए हैं.
इसी सप्ताह उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने यमन के ऊपर उड़ रहे एक सऊदी लड़ाकू विमान को गिरा दिया है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी की एक अपुष्ट रिपोर्ट के मुताबिक़, यमन के गृहयुद्ध में शामिल दोनों पक्षों के सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि शनिवार को हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच हुई लड़ाई में 48 लोगों की मौत हुई.
समाचार एजेंसी के मुताबिक़, हूती विद्रोहियों ने कहा कि उनके 31 लड़ाके मारे गए, जबकि सरकारी सूत्रों ने बताया कि उनके पक्ष के 17 सैनिक मारे गए.
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने बताया कि हाल की लड़ाई के कारण विस्थापित लोगों की संख्या 1,04,796 से अधिक हो गई है.
‘मैंने अलार्म सुना और फिर घर की खिड़कियां हिलने लगीं’
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शनिवार को रियाद में कई धमाकों जैसी आवाज़ें सुनाई दीं और किंग ख़ालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी समस्याओं की ख़बरें आईं.
उड़ानों की निगरानी करने वाली वेबसाइट फ़्लाइटरडार24 के मुताबिक, कई उड़ानें देर से चलीं और कुछ रद्द भी हुईं.
एएफ़पी के एक पत्रकार ने बताया कि दमकलकर्मी अरामको के एक जले हुए ईंधन टैंक में लगी आग बुझाने की कोशिश करते दिखाई दिए.
सऊदी सिविल डिफ़ेंस ने रात में रियाद और देश के दूसरे इलाक़ों में संभावित ख़तरे को लेकर मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजे थे. शनिवार सुबह बाद में उसने ख़तरा टलने का संदेश जारी किया.
रियाद के कुछ निवासियों ने एएफ़पी को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने अलर्ट के बाद शहर में लगातार कई धमाकों जैसी आवाज़ें सुनीं.
रियाद के उत्तरी हिस्से में रहने वाले 27 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा, “मैंने अलार्म सुना और फिर मेरी खिड़कियां हिलने लगीं. यह वाक़ई डरावना था. मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी.”

हूती विद्रोहियों ने हाल में रणनीतिक तौर पर अहम बंदरगाह शहर मोखा और पेरिम द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है.
यह द्वीप उस अहम समुद्री रास्ते के प्रवेश द्वार पर है, जिसका इस्तेमाल खाड़ी देश एशिया और यूरोप को तेल निर्यात करने के लिए करते हैं.
हूती विद्रोहियों ने कहा कि समुद्री नाकाबंदी सऊदी अरब की ओर से उत्तर-पश्चिमी यमन में हूती नियंत्रण वाले बंदरगाहों और हवाई अड्डों की नाकाबंदी के जवाब में की गई है.
अमेरिका और इसराइल की ईरान के साथ जारी जंग की वजह से होर्मुज़ स्ट्रेट प्रभावी तौर पर बंद होने के बाद से सऊदी जहाज़ तेल निर्यात के लिए लाल सागर के इसी हिस्से पर निर्भर रहे हैं.
शुक्रवार को इनवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी जेपी मॉर्गन ने कहा कि उसके लिए यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है कि इस युद्ध का तेल की क़ीमतों पर क्या असर पड़ेगा.
निवेशकों को भेजे एक नोट में बैंक ने कहा, “हमें सचमुच नहीं पता कि इसका अंतिम नतीज़ा क्या होगा, इसलिए हम इसका आकलन नहीं कर पा रहे हैं.”
तुर्की ने कहा- ‘मक्का समझौते’ के तहत सऊदी अरब को कर सकते हैं मदद
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इस बीच, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने शनिवार को कहा कि हूती विद्रोहियों के हमलों के मद्देनजर सऊदी अरब को कुछ सैन्य जरूरतों की जरूरत हो सकती है.
तुर्की पाकिस्तान के साथ हुए ‘मक्का समझौते’ के ढांचे के भीतर उन जरूरतों पर विचार करेगा.
फिदान ने एनटीवी से कहा, “हम देख रहे हैं कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर गंभीर हमले हो रहे हैं. हमारा एक गठबंधन समझौता है और हम इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकजुट हैं. उनकी कुछ सैन्य ज़रूरतें हो सकती हैं. ख़ासकर कुछ तकनीकी मामलों के संबंध में. हमें उन्हें पूरा करने में कोई समस्या नहीं होगी.”
तुर्की के मंत्री ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में सऊदी अरब को शामिल नहीं करना चाहिए. सऊदी अरब इस संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता.
फिदान ने आगे कहा, ” इस संकट को एक हद तक बर्दाश्त किया जा रहा था, लेकिन इसके आर्थिक दुष्परिणाम अब बर्दाश्त से बाहर हो रहे हैं.”
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