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India USA Relation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने एएनआई से विशेष बातचीत में यह साफ कहा कि भविष्य में वैश्विक महाशक्ति बनते भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी चीन के साथ किसी भी तरह के रिश्ते से ज्यादा फायदेमंद और मजबूत होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्टोरिया कोट्स ने भारत को चीन से कहीं बेहतर और अधिक विश्वसनीय साझेदार बताया है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कोट्स ने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। कोट्स ने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं लंबे समय से अमेरिका-भारत संबंधों की मुखर समर्थक रही हूं। मेरा मानना है कि चीन की तुलना में भारत हमारे लिए बेहतर साझेदार है। भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का शानदार संभावित सहयोगी है।

चीन के साथ सावधानी, भारत के साथ मजबूत साझेदारी

कोट्स ने राष्ट्रपति ट्रंप की हालिया चीन यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि 15 मई 2026 को बीजिंग पहुंचे ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दो दिवसीय शिखर सम्मेलन किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़े असर का आकलन करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका चीन के साथ संबंधों को बेहद सावधानी से संभाल रहा है और किसी भी प्रत्यक्ष संघर्ष से बचना चाहता है। कोट्स ने आगे कहा कि अमेरिका और चीन मित्र नहीं हैं। चीन वाशिंगटन के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा और आर्थिक खतरा बना हुआ है। राष्ट्रपति की यात्रा का मकसद इस अंतरिम अवधि को प्रबंधित करना है।

ट्रंप-मोदी के व्यक्तिगत संबंध मजबूत

कोट्स ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों नेताओं के बीच बेहद मजबूत संबंध रहे थे। जनवरी 2025 की यात्रा अत्यंत सफल रही और जारी विज्ञप्ति भविष्य के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। हालांकि, भारत-रूस संबंधों पर चिंता जताते हुए कोट्स ने कहा कि यूक्रेन संकट के कारण इसमें तनाव है। लेकिन अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि हमारी प्राकृतिक गैस क्षमता बढ़ गई है। हम भारत की जरूरतों का पता लगाकर रूस से गैस आयात की भरपाई करेंगे। पहले ईरानी तेल के मामले में भी हमने सऊदी अरब और अमेरिकी निर्यात से भारत की मदद की थी। कोट्स ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कार्यबल विकास और अन्य क्षेत्रों को भी शामिल करेंगे। यह द्विपक्षीय संबंध पिछले तीन दशकों से दोनों पार्टियों में द्विदलीय सहमति के साथ मजबूत हो रहे हैं।

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