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भारत में बीते कुछ महीनों में स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ने के पीछे 5G, AI फीचर्स, महंगे हार्डवेयर और बढ़ती मेमोरी चिप जैसी कई वजहें हैं। ऐसे में कई ग्राहक सोच रहे हैं कि इंतजार करने से ये कीमतें घटेंगी या नहीं। 

कुछ साल पहले तक 10 हजार रुपये से 15 हजार रुपये तक के बजट में ऐसे फोन खरीदे जा सकते थे जिनमें अच्छी बैटरी, ठीक-ठाक कैमरा और स्मूद परफॉर्मेंस मिल जाती थी। हालांकि, अब बजट कैटेगरी में ज्यादा विकल्प नहीं मिलते। इसके अलावा कई ऐसे मॉडल, जो पहले मिड-रेंज कैटेगरी में आते थे, अब प्रीमियम सेगमेंट का हिस्सा बन चुके हैं। साथ ही कई कंपनियों ने अपने मिडरेंज स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर स्मार्टफोन इतने महंगे क्यों होते जा रहे हैं और क्या भविष्य में इनके दाम फिर कम हो सकते हैं?

स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण हार्डवेयर की लागत है। आज के फोन में पहले की तुलना में कहीं एडवांस्ड प्रोसेसर, बेहतर कैमरा सेंसर्स, हाई-रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, 5G मॉडेम और AI बेस्ड फीचर्स दिए जा रहे हैं। इन सभी को डिवेलप करने और उन्हें डिवाइस में शामिल करने की लागत भी बढ़ी है, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ता दिख रहा है। साथ ही AI ज्यादा मेमोरी चिप इस्तेमाल करता है, जिनके लिए बड़ी AI कंपनियां चिपमेकर्स को बड़ी रकम दे रही हैं।

यही वजह है कि Qualcomm और Nvidia जैसे चिपमेकर्स और मेमोरी मैन्युफैक्चरर्स के पास स्टॉक कम है और डिमांड ज्यादा। मेमोरी चिप और प्रोसेसर्स की कीमत बढ़ने से पूरी इंडस्ट्री प्रभावित हुई है और यही वजह है कि कुछ कंपनियों को अपने मौजूदा मॉडल्स महंगे करने पड़े हैं। यही नहीं, भारत में 5G नेटवर्क के विस्तार के बाद लगभग हर नया स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ लॉन्च किया जा रहा है। 5G चिपसेट और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी 4G की तुलना में महंगी है।

ग्लोबल सप्लाई चेन भी प्रभावित

साथ ही ग्लोबल सप्लाई चेन भी कीमतों को प्रभावित करती है। स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स जैसे प्रोसेसर, मेमोरी चिप और कैमरा मॉड्यूल विदेशों से आते हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे माल की कीमतों, लॉजिस्टिक्स लागत और देशों के बीच तनाव का असर इनकी कीमत पर पड़ रहा है, जिसका बोझ आखिर में ग्राहकों पर पड़ता है।

इसके अलावा, स्मार्टफोन कंपनियां अब केवल हार्डवेयर नहीं बेच रही हैं। वे AI फीचर्स, लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट सपोर्ट, बेहतर सुरक्षा, क्लाउड सर्विसेज और प्रीमियम डिजाइन पर भी बड़ा निवेश कर रही हैं। ऐसे में फोन्स का महंगे होते दिखना, स्वाभाविक है।

पहले से बदली है ग्राहकों की पसंद

एक और महत्वपूर्ण वजह ग्राहकों की बदलती पसंद है। पहले लोग कॉलिंग और बेसिक ऐप्स के लिए फोन खरीदते थे, लेकिन अब स्मार्टफोन कैमरा, गेमिंग डिवाइस, वीडियो एडिटिंग टूल और डिजिटल वॉलेट तक की भूमिका निभा रहा है। कंपनियां इसी मांग को ध्यान में रखते हुए एडवांस्ड फीचर्स वाले फोन ला रही हैं, जिनपर लागत भी ज्यादा आती है।

क्या कुछ महीनों में सस्ते होंगे फोन?

सवाल यह है कि क्या स्मार्टफोन सस्ते होंगे? इसका जवाब पूरी तरह साफ नहीं है। फ्लैगशिप और प्रीमियम स्मार्टफोन्स के सस्ते होने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है, क्योंकि इनमें लगातार नए इनोवेशंस हो रहे हैं। हालांकि, मिड-रेंज और बजट फोन्स मेमोरी चिप्स की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें दूर होने की स्थिति में दोबारा सस्ते हो सकते हैं लेकिन इसके लिए इंतजार करना होगा।

भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से भी कुछ राहत मिल सकती है। अगर कंपनियां देश में ही मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाती हैं और सप्लाई चेन मजबूत होती है, तो कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, फेस्टिव सीजन में कंपनियां ग्राहकों को अट्रैक्ट करने के लिए अग्रेसिव प्राइसिंग भी कर सकती हैं।

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