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1 लाख लोगों की नौकरी पर मंडराया संकट! यह कार कंपनी करने जा रही छंटनी; जानें वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दिग्गज कार निर्माता फॉक्सवेगन से एक बहुत ही हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। दरअसल, कंपनी अपने खर्चों को कम करने के लिए लगभग 1,00,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी फॉक्सवेगन से एक बहुत ही हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। कंपनी के सीईओ ओलिवर ब्लूम ने फॉक्सवेगन के 89 साल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने का मन बना लिया है। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी अपने खर्चों को कम करने के लिए लगभग 1,00,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है। इसके साथ ही जर्मनी में स्थित अपने चार बड़े प्रोडक्शन प्लांट्स को भी हमेशा के लिए बंद करने का प्लान बनाया जा रहा है। सीईओ ओलिवर ब्लूम और सीएफओ अर्नो एंटलिट्ज मिलकर कंपनी को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर करना चाहते हैं। आइए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से।

पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील

₹ 97.8 लाख

Mahindra Bolero Neo

₹ 8.85 – 10.49 लाख

Volvo XC60

₹ 68.9 लाख

Mahindra Scorpio N

₹ 13.49 – 24.95 लाख

Volvo EX30

₹ 41 लाख

Mahindra Thar ROXX

₹ 12.39 – 22.82 लाख

1 लाख कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

फॉक्सवेगन के इस बड़े और कड़े फैसले का सीधा असर कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ने वाला है। कंपनी अपने खर्चों को कम करने के लिए आने वाले समय में 1,00,000 नौकरियों में कटौती करने की योजना बना रही है। आपको बता दें कि कंपनी के पास साल 2025 में दुनिया भर में लगभग 6,67,164 कर्मचारी थे। इनमें से लगभग 43 पर्सेंट सिर्फ जर्मनी में ही काम करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इस नए फैसले के लागू होने से कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स में से करीब 15 पर्सेंट कर्मचारियों की छुट्टी कर देगी।

जर्मनी के चार बड़े प्लांट्स होंगे बंद

नौकरियों में कटौती के अलावा, फॉक्सवेगन जर्मनी के चार बड़े और प्रमुख प्लांट्स में प्रोडक्शन को हमेशा के लिए रोकने की योजना बना रही है। कंपनी के हैनोवर, ज्विकाऊ और एम्डेन प्लांट्स के साथ-साथ ऑडी के नेकारसुलम वाले प्रमुख साइट पर कामकाज बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, यह तालाबंदी अचानक नहीं होगी। अभी इन प्लांट्स में जिन गाड़ियों के मॉडल्स का प्रोडक्शन चल रहा है, उनके पूरी तरह से फेज-आउट होने के बाद ही इन यूनिट्स को पूरी तरह से बंद किया जाएगा।

निवेश में कटौती का दवाब

दूसरी ओर कंपनी घाटे से उबरने के लिए अगले पांच सालों के लिए अपने निवेश प्लान में भी करीब 15 पर्सेंट की भारी कटौती करने जा रही है। इसके बाद कंपनी का यह ग्लोबल निवेश घटकर करीब 130 बिलियन यूरो (यानी 148 बिलियन डॉलर) रह जाएगा। दरअसल, सीईओ ओलिवर ब्लूम इस समय चीनी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर, नए टैरिफ नियमों और डीजल-पेट्रोल से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ शिफ्ट होने में आ रहे भारी-भरकम खर्च और कम मुनाफे के दबाव से जूझ रहे हैं।

यूनियनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

बता दें कि कंपनी के लिए इस फैसले को जमीन पर लागू करना इतना आसान नहीं होगा। दरअसल, इसे लेकर अभी से ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं। जर्मनी की बेहद ताकतवर कर्मचारी यूनियनों (IG Metall) और वर्क्स काउंसिल ने मैनेजमेंट के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपनी पूरी ताकत से विरोध करेंगे। उनका कहना है कि साल 2024 में यूनियनों के साथ हुए समझौते के तहत इस दशक में कोई भी प्लांट बंद नहीं होना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN