Home BUSINESS NEWS HINDI 16 साल इंतजार के बाद मिली जीत! फ्लैट नहीं मिला तो कोर्ट...

16 साल इंतजार के बाद मिली जीत! फ्लैट नहीं मिला तो कोर्ट ने वापस दिलाए 79 लाख रुपये, ऐसे मिला इंसाफ

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

दिल्ली-NCR के दो होमबायर्स को आखिरकार 16 साल लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत मिली है। साल 2010 में उन्होंने एक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की आवासीय परियोजना में 3BHK फ्लैट बुक कराया था। उस समय सोसाइटी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि दो साल के अंदर यानी 2012 तक फ्लैट का पजेशन दे दिया जाएगा। लेकिन समय बीतता गया और वादा सिर्फ वादा बनकर रह गया। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती कीमत लगभग 24 लाख और 26.60 लाख रुपये तय की गई थी, लेकिन बाद के सालों में अलग-अलग शुल्क और अतिरिक्त खर्चों के नाम पर दोनों खरीदारों से करीब 40-40 लाख रुपये तक वसूल लिए गए। इसके बावजूद उन्हें आज तक फ्लैट नहीं मिला।

जानकारी के अनुसार शुरुआत में यह प्रोजेक्ट नोएडा में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में भूमि से जुड़े विवादों के कारण इसे गाजियाबाद स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद नए समझौते किए गए और फ्लैट की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई। समय-समय पर पार्किंग शुल्क, जीएसटी, सर्विस टैक्स, एस्केलेशन चार्ज, मैकेनिकल वेंटिलेशन शुल्क और अन्य कई मदों में अतिरिक्त रकम मांगी गई। दोनों खरीदारों का कहना था कि उन्होंने सोसाइटी की डिमांड के अनुसार भुगतान किया और यहां तक कि अतिरिक्त अमाउंट जुटाने के लिए टॉप-अप लोन भी लेना पड़ा।

हालांकि, लगातार भुगतान करने के बावजूद प्रोजेक्ट पूरी नहीं हुई। कई बार कब्जा देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन हर बार समय सीमा आगे बढ़ा दी गई। आखिरकार, सालों तक इंतजार करने के बाद दोनों खरीदारों ने 2024 में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आयोग से अपनी जमा राशि वापस दिलाने और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे की मांग की।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि खरीदारों ने अपनी सभी वित्तीय जिम्मेदारियां समय पर पूरी कीं, जबकि हाउसिंग सोसाइटी तय समय में फ्लैट देने में पूरी तरह विफल रही। आयोग ने यह भी माना कि प्रोजेक्ट में असामान्य देरी हुई और सोसाइटी इसके लिए कोई ठोस दस्तावेज प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। सोसाइटी ने भूमि विवाद, बढ़ती लागत, पर्यावरणीय प्रतिबंध और कोविड-19 जैसी परिस्थितियों को देरी का कारण बताया, लेकिन आयोग ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।

आयोग ने अपने फैसले में कहा कि हाउसिंग सोसाइटी ने खरीदारों को उचित समय में फ्लैट उपलब्ध नहीं कराया और उनकी जमा राशि लगभग 16 सालों तक अपने पास रखी, जिसे सर्विस में कमी माना गया। इसके बाद आयोग ने सोसाइटी को निर्देश दिया कि वह दोनों खरीदारों को उनकी जमा राशि पूरी तरह लौटाए। एक खरीदार को लगभग 39.08 लाख रुपये और दूसरे को करीब 40.34 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया गया। साथ ही इन राशियों पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया।

इतना ही नहीं, आयोग ने दोनों खरीदारों को मानसिक कष्ट और लंबे इंतजार के लिए 2-2 लाख रुपये का मुआवजा तथा 50-50 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का भी आदेश दिया। अगर निर्धारित समय सीमा तक भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर बढ़ाकर 11.25 प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।

यह फैसला उन लाखों घर खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है, जो सालों से अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है और बिल्डर्स व हाउसिंग सोसाइटियों को समय पर प्रोजेक्ट पूरी करने के लिए जवाबदेह बनाता है। जिन लोगों को लंबे समय से पजेशन नहीं मिला है, वे भी इस तरह के मामलों में कानूनी मदद लेकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN