Source :- LIVE HINDUSTAN

ज्यादातर लोग Wi-Fi राउटर को बस एक डिब्बे जैसा मानते हैं, जो उनके पूरे घर में इंटरनेट पहुंचाता है। लेकिन एक रिसर्च से पता चला है कि Wi-Fi लोगों को बिना किसी फोन या गैजेट के भी पहचान सकता है और ट्रैक कर सकता है। साफ शब्दों में कहें तो यह आपके ही घर में रहकर आपको ट्रैक कर सकता है।

ज्यादातर लोग Wi-Fi राउटर को बस एक डिब्बे जैसा मानते हैं, जो उनके पूरे घर में इंटरनेट पहुंचाता है। लेकिन इस डब्बे काम सिर्फ Netflix देखना या Instagram चलाने के लिए सिग्नल प्रदान करना ही नहीं है। एक डराने वाली रिसर्च सामने आई है। रिसर्च से पता चला है कि Wi-Fi लोगों को बिना किसी फोन या गैजेट के भी पहचान सकता है और ट्रैक कर सकता है। साफ शब्दों में कहें तो यह आपके ही घर में रहकर आपको ट्रैक कर सकता है। इस खबर ने कई लोगों को चिंता में डाल दिया है। चलिए बताते हैं कैसे इस काम का अंजान दे सकता है वाई-फाई का राउटर…

BFId टेक्नोलॉजी क्या है?

इंडियान्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी के कार्लस्रू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक टीम ने ‘बीमफॉर्मिंग फीडबैक इन्फॉर्मेशन’ (Beamforming Feedback Information) या BFId नाम की एक चीज बनाई है। आसान शब्दों में कहें तो, यह सामान्य WiFi सिग्नल्स को मशीन लर्निंग के साथ मिलाकर यह पता लगाती है कि घर में कौन कौन है, और यह सब सिर्फ इस आधार पर होता है कि आपका शरीर रेडियो तरंगों के साथ किस तरह इंटरैक्ट करता है।

सबसे दिलचस्प बात यह है: हर कोई WiFi सिग्नल्स के साथ अपने ही तरीके से प्रभावित करता है। आपकी कद-काठी यानी शरीर का आकार और बनावट, आप कैसे हिलते-डुलते हैं, यहां तक कि आपके कैसे चलते हैं, ये सभी चीजें सिग्नल में एक तरह का ‘सिग्नेचर’ छोड़ जाती हैं, जिसे स्मार्ट एल्गोरिदम पहचान सकते हैं। KIT के शोधकर्ताओं का दावा है कि उनका सिस्टम 99.5% तक की सटीकता के साथ यह पता लगा सकता है कि आपके घर में कौन मौजूद है, कम से कम एक नियंत्रित माहौल में तो जरूर।

WiFi लोगों की पहचान कैसे कर सकता है?

जब आप WiFi वाले किसी कमरे से गुजरते हैं, तो आपका शरीर रेडियो तरंगों को बदल देता है। BFId आपके चलने के अनोखे तरीके, आपके शरीर की बनावट और यहां तक कि आपके घूमने-फिरने के तरीके जैसे पैटर्न को पहचान लेता है। यह इस बात को इकट्ठा और एनालाइज करता है कि सिग्नल आपसे टकराकर कैसे वापस आते हैं या रिफ्लेक्ट होते हैं, और फिर उस जानकारी का मशीन लर्निंग मॉडल्स के साथ इस्तेमाल करके लोगों के बीच फर्क बताता है।

प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने क्यों जताई चिंता?

दरअसल, स्मार्ट होम्स, सिक्योरिटी या हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए यह बात समझ में आती है। लेकिन इसके गलत इस्तेमाल की गुंजाइश बहुत ज्यादा है। हैकर्स या कोई भी ताक-झांक करने वाला व्यक्ति, बिना कोई कैमरा लगाए, यह देख सकता है कि आप कहां हैं, आपके साथ कौन है, और यहां तक कि आपकी रोजमर्रा की दिनचर्या भी। इसके लिए आपको फोन, फिटनेस बैंड या कोई और चीज अपने साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। रिसर्चर्स पहले से ही सख्त प्राइवेसी नियमों और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं, इससे पहले कि हमें हर जगह BFId टेक्नोलॉजी दिखाई देने लगे।

क्या WiFi, CCTV से ज्यादा शक्तिशाली हो सकता है?

कैमरे सिर्फ वही देख पाते हैं जो उनके ठीक सामने होता है। WiFi का सिग्नल उन सभी जगहों पर पहुंचता है जहां तक उसकी तरंगें जाती हैं, चाहे दरवाजे बंद हों या फिर ऐसे कमरे जहां कोई कैमरा न लगा हो। इसलिए, WiFi सेंसिंग उन जगहों पर भी आप पर नजर रख सकती है जहां CCTV नहीं पहुंच पाते; और इस बात से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। जैसे कि इस डेटा को कौन कंट्रोल करता है? इसका इस्तेमाल कौन कर सकता है? क्या आप इससे बाहर निकल सकते हैं।

आम लोगों को क्या सोचना चाहिए?

घबराएं नहीं, क्योंकि आपका होम राउटर चुपके से आपकी जासूसी नहीं कर रहा है, कम से कम अभी तो नहीं। यह स्टडी यह नहीं कह रही है कि आज के WiFi राउटर आपकी ट्रैकिंग कर रहे हैं, बल्कि यह साबित करती है कि वे ऐसा कर सकते हैं, खासकर तब, जब उन पर सही AI की परत चढ़ा दी जाए। जैसे-जैसे यह टेक्नोलॉजी आगे बढ़ेगी, प्राइवेसी को सबसे ज्यादा अहमियत देनी होगी।

पॉलिसी मेकर्स और टेक कंपनियों को कुछ सख्त सीमाएं तय करनी होंगी, वरना इस तरह के इनोवेशन की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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