Source :- LIVE HINDUSTAN
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर एक समय 6 प्रतिशत से अधिक उछलकर 408 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार जल्द ही लगभग 30,000 करोड़ रुपये के क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकती है। यह ऑर्डर मिलने की सबसे ज्यादा संभावना भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को बताई जा रही है। चूंकि अपोलो माइक्रो सिस्टम्स इस प्रोजेक्ट में BEL और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की प्रमुख सप्लायर कंपनियों में शामिल है, इसलिए निवेशकों ने इस खबर को कंपनी के लिए बेहद सकारात्मक माना और शेयरों में खरीदारी बढ़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, BEL प्रबंधन ने हाल ही में निवेशकों के साथ बातचीत में संकेत दिया कि QRSAM प्रोजेक्ट को अगले कुछ हफ्तों में सरकारी मंजूरी मिल सकती है। यह प्रोजेक्ट भारतीय सेना की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। QRSAM यानी क्विक रियक्शन सर्फेस-टू-एयर मिसाइल एक अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली है, जिसे तेजी से उड़ने वाले और हाईली डायनमिक हवाई लक्ष्यों को पहचानने और उन्हें नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। इस रक्षा परियोजना में शामिल कंपनियों को लंबे समय तक ऑर्डर मिलने की संभावना रहती है, जिससे उनकी आय और मुनाफे में लगातार वृद्धि हो सकती है।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, मिसाइल सब-सिस्टम, एवियोनिक्स, कंट्रोल सिस्टम और अन्य हाई-टेक उपकरण तैयार करती है। पिछले कुछ सालों में कंपनी ने रक्षा मंत्रालय, DRDO, BEL, HAL, BDL और कई अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में अगर QRSAM प्रोजेक्ट का बड़ा ऑर्डर जारी होता है, तो कंपनी को अप्रत्यक्ष रूप से बड़े बिजनेस अवसर मिल सकते हैं। यही कारण है कि बाजार ने इस खबर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
इस तेजी के पीछे सिर्फ QRSAM ऑर्डर की संभावना ही नहीं है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को यह भी जानकारी दी है कि 6 जुलाई 2026 को उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में कंपनी प्रेफरेंशियल आधार पर इक्विटी शेयर या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, जिनमें वारंट भी शामिल हो सकते हैं, जारी करने के प्रस्ताव पर विचार करेगी। आमतौर पर इस तरह की फंड जुटाने की योजना का उद्देश्य कंपनी के विस्तार, नई परियोजनाओं में निवेश या कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करना होता है। हालांकि, निवेशक इस बैठक के नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे कंपनी की भविष्य की रणनीति स्पष्ट होगी।
रक्षा क्षेत्र में लगातार बढ़ते सरकारी खर्च और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के चलते घरेलू रक्षा कंपनियों के लिए बड़े अवसर बन रहे हैं। भारत सरकार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण पर लगातार जोर दे रही है, जिसका फायदा अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) जैसी कंपनियों को मिल सकता है। कंपनी पहले से कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं में शामिल है और आने वाले समय में नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि केवल संभावित ऑर्डर की खबरों के आधार पर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। अभी QRSAM ऑर्डर को अंतिम सरकारी मंजूरी मिलना बाकी है और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) को मिलने वाले वास्तविक कारोबार की मात्रा भी स्पष्ट नहीं है। इसी तरह बोर्ड बैठक में प्रेफरेंशियल शेयर या वारंट जारी करने का फैसला मौजूदा शेयरधारकों पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है। इसलिए निवेशकों को कंपनी की आधिकारिक घोषणाओं, वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं का मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश संबंधी निर्णय लेना चाहिए।
आज का शेयर परफॉर्मेंस
आज शेयर बाजार (29 जून 2026) में कमजोरी के माहौल के बावजूद अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems Ltd) का शेयर शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी का शेयर 5.88% की तेजी के साथ ₹22.60 बढ़कर ₹407 पर बंद हुआ। इस तेजी के पीछे मुख्य वजह रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सकारात्मक खबरें रहीं।
फिलहाल, इतना जरूर कहा जा सकता है कि रक्षा क्षेत्र से जुड़ी इस सकारात्मक खबर ने अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) को बाजार की सुर्खियों में ला दिया है। अगर 30,000 करोड़ रुपये का QRSAM प्रोजेक्ट मंजूर होता है और कंपनी को उससे बड़ा फायदा मिलता है, तो आने वाले समय में इसके शेयरों पर निवेशकों की नजर और भी ज्यादा बनी रह सकती है।
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