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साल 2025 में विक्रम भट्ट को जेल हुई थी। वो करीब 70 दिन जेल में बंद थे। अब डायरेक्टर ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि वहां उन्होंने अलग हिंदुस्तान देखा। उनकी वहां कई कैदियों से दोस्ती हो गई थी। 

हॉरर फिल्में बनाने वाले विक्रम भट्ट पिछले साल धोखाधड़ी के मामले में करीब 70 दिनों तक जेल में थे। उन्होंने अपने जेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जेल में एक अलग हिंदुस्तान देखा। विक्रम भट्ट ने बताया कि वहां उनकी कई लोगों से दोस्ती हो गई थी। उन्होंने कुछ ऐसे दोस्त बनाए हैं जो जीवन भर के लिए उनके दोस्त बन गए। हालांकि, दोस्ती के बाद भी उन्हें जेल में परेशानियों का सामना करना पड़ा। विक्रम ने बताया कि वो जेल में मरते-मरते बचे थे।

एक बैरेक में होते से 60 से 80 लोग

सिद्धार्थ कनन के साथ खास बातचीत में विक्रम भट्ट ने बताया कि उनके बैरक में 60 से 80 लोग होते थे। कभी-कभी तो 90 लोग होते थे। विक्रम ने बताया कि जिस दिन कोर्ट की छुट्टी होती थी, उस दिन ज्यादा लोग होते थे क्योंकि उस दिल लोगों की बेल नहीं होती थी। वहीं, जब कोर्ट चालू होता था तब लोग कम होते थे क्योंकि लोगों की बेल हो जाती थी।

विक्रम को कैदी बुलाते थे भीष्म पितामह

जेल में हुई दोस्तियों के बारे में बात करते हुए विक्रम भट्ट ने कहा, “मैंने वहां अलग हिंदुस्तान देखा। मुझे समझ आया कि असली दोस्ती क्या होती है। वो लोग (बाकी कैदी) मुझे कुछ काम नहीं करने देते थे। वो मेरे लिए खाना लाते थे, मेरे कपड़े लेकर जाते थे, धोते थे। वो लोग मुझे भीष्म पितामह बुलाते थे। वो कहते थे- पितामह आप बस बैठो हॉरर कहानियां सुनाइए। हर रात 60 से 65 लोग बैठ जाते थे और मुझे कहानी सुनाने को कहते थे।”

जेल में कैदियों से हुई दोस्ती

विक्रम भट्ट ने कहा कि जहां लोग सही नहीं होने चाहिए थे, वहां मुझे सबसे अच्छे लोग मिले। उन्होंने कहा, “मैंने वहां कुछ ऐसे दोस्त बनाए जो ज़िंदगी भर साथ रहेंगे, क्योंकि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मेरी रक्षा की। मेरी दोनों तरफ लोग सोते थे। कोई मुझे कुछ कर नहीं सकता था। और मैंने इन लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया। इन लोगों ने मुझमें क्या देखा और क्यों मेरी इतनी चिंता की, भगवान ही जानता है।”

जेल के वक्त को याद करते हुए विक्रम ने कहा कि अगर आप जेल में इन लोगों से बात नहीं करेंगे तो किससे करेंगे। अगर इनसे दोस्ती नहीं करेंगे, तो किससे करेंगे। विक्रम ने कहा कि जेल ने उन्हें उस इंडिया से टच में आने का मौका मिला था जिससे वो दूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि यही भारत हमारी फिल्में देखने जाता है।

जब बिगड़ी विक्रम भट्ट की तबीयत

जेल में दोस्तियों के बावजूद भी विक्रम भट्ट को परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत खराब हो गई थी। वो मरते-मरते बचे हैं। विक्रम ने बताया कि उन्हें ऑटो इम्यून कंडीशन है। उन्हें ज्वाइंट्स में दर्द होता है, और जेल में दरी पर सोना पड़ता था। वो जिस करवट भी सोते थे, उस करवट के हिप बोन्स में दर्द होने लगता था।उन्होंने बताया कि जनवरी-फरवरी का महीना था, बहुत ठंड हो रही थी। विक्रम ने बताया कि उस दौरान उन्हें ज्वाइंडिस भी हो गया था। उन्हें बहुत ठंड लगती थी, दूसरे कैदी भी उन्हें अपना कंबल दे देते थे। वो चाहते थे कि उन्हें अस्पताल ले जाया जाए, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके पास गार्ड्स नहीं हैं, इन्हें ले जाने के लिए सिक्यूरिटी लगेगी। विक्रम ने कहा कि उन्हें समझ आ गया था कि उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी ज्वाइंडिस हो चुका है। तो उन्होंने वो सब फॉलो किया जो उन्होंने पहले ज्वाइंडिस के वक्त करते थे और ऐसे उनकी तबीयत ठीक है।

क्यों गिरफ्तार हुए थे विक्रम भट्ट?

बता दें, विक्रभ भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। कपल पर आरोप था कि उन्होंने इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक डॉ. अजय मुंडिया से उनकी दिवंगत पत्नी पर एक बायोपिक बनाने के नाम पर भारी रकम ली थी, लेकिन फिल्म नहीं बनाई।

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