Home rss business hindi 8th Pay Commission: पेंशनर्स को मिल सकती है बड़ी राहत? 15 साल...

8th Pay Commission: पेंशनर्स को मिल सकती है बड़ी राहत? 15 साल की जगह 11 साल में पेंशन बहाली की मांग

4
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

8th पे कमीशन को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी मांगें लगातार सामने आ रही हैं। अब BPS (Bharat Pensioners’ Samaj) ने केंद्र सरकार और 8वें वेतन आयोग के सामने कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) की बहाली अवधि 15 साल से घटाकर 11 साल करने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और बीमांकिक परिस्थितियां पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं, इसलिए पेंशन कम्यूटेशन की मौजूदा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा जरूरी है।

कम्यूटेड पेंशन क्या है?

कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) वह व्यवस्था है, जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी भविष्य की मासिक पेंशन का एक हिस्सा (आमतौर पर अधिकतम 40%) त्याग कर उसके बदले एकमुश्त (Lump-sum) नगद राशि प्राप्त करता है।

फ्रेश एक्चुरियल रिव्यू की मांग

BPS ने यह मांग हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 16 सितंबर 2026 के फैसले के बाद उठाई है। संगठन के अनुसार, कोर्ट ने 15 साल की अवधि को सीधे कम नहीं किया, लेकिन बदलती परिस्थितियों और संबंधित एक्चुरियल पैरामीटर्स को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे की तार्किक समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया। इसके बाद BPS के महासचिव अविनाश राजपूत ने 21 सितंबर को 8th पे कमीशन की चेयरपर्सन और डिपॉर्टमेंट ऑफ पेंशन & पेंशनर्स वेलफेयर (Department of Pension & Pensioners’ Welfare) के सचिव को पत्र भेजकर फ्रेश एक्चुरियल रिव्यू (fresh actuarial review) की मांग की।

क्या है फ्रेश एक्चुरियल रिव्यू ?

फ्रेश एक्चुरियल रिव्यू (Fresh Actuarial Review) का सीधा मतलब बीमा (Insurance), पेंशन, या किसी वित्तीय योजना के जोखिमों (Risks) और देनदारियों (Liabilities) का एक नए सिरे से मूल्यांकन करना है। जब पुराने डेटा, अनुमानों (Assumptions) या बदलती आर्थिक स्थितियों के कारण पुराने रिव्यू प्रासंगिक नहीं रह जाते, तब पूरी तरह से नए डेटा और अपडेटेड नियमों के साथ यह प्रोसेस दोबारा की जाती है।

दोबारा कैलकुलेशन की जरूरत

दरअसल, OPS (Old Pension Scheme) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स को अपनी बेसिक पेंशन के अधिकतम 40% हिस्से को कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) के रूप में एकमुश्त लेने का विकल्प मिलता है। इसके बदले उनकी मासिक पेंशन में उस हिस्से की कटौती होती है। मौजूदा नियमों के तहत कम्यूट की गई पेंशन का हिस्सा 15 साल बाद बहाल होता है। BPS का तर्क है कि इस व्यवस्था के पीछे इस्तेमाल किए गए वित्तीय और एक्चुरियल पैरामीटर्स (actuarial parameters) काफी पुराने हैं और अब इनकी दोबारा कैलकुलेशन की जानी चाहिए।

15 साल की बहाली अवधि की समीक्षा जरूरी

संगठन ने अपने पत्र में कम्युटेशन फैक्टर्स, इंटरेस्ट और डिस्काउंट रेट्स के साथ-साथ लाइफ एक्सपेक्टेंसी और मोरटालिटी पैटर्न में आए बदलावों का भी उल्लेख किया है। BPS के अनुसार, 58 साल की उम्र के लिए कम्यूटेशन फैक्टर (Commutation Factor) पहले 10.46 था, जो अब केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए 8.194 है। संगठन का दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार द्वारा कम्यूट की गई राशि की रिकवरी करीब 10 साल में हो सकती है, इसलिए 15 साल की बहाली अवधि की समीक्षा जरूरी है।

एक्सपर्ट समिति बनाने का सुझाव

BPS ने 8th पे कमीशन में इस मामले में 5 प्रमुख कदमों पर विचार करने की मांग की है। इनमें मौजूदा कम्युटेशन टेबल और रिकवरी पीरियड का फ्रेश एक्चुरियल असेसमेंट (fresh actuarial assessment), 15 साल की अवधि की समीक्षा और तत्काल तौर पर 11 साल में पेंशन बहाली की संभावना की जांच शामिल है। संगठन ने क्वॉलीफाइड एक्चुराइज, संबंधित मंत्रालयों, 8th CPC और पेंशनर्स ऑर्गनाइजेशन के प्रतिनिधियों वाली एक्सपर्ट समिति बनाने का सुझाव भी दिया है।

फिलहाल, 11 साल में कम्युटेड पेंशन (Commuted Pension) की बहाली कोई लागू नियम या घोषित फैसला नहीं है, बल्कि पेंशनर्स संगठन की मांग है। अंतिम बदलाव के लिए सरकार और संबंधित प्राधिकरणों की ओर से निर्णय तथा आवश्यक नियमों में संशोधन जरूरी होगा। BPS का कहना है कि मौजूदा एक्चुरियल और इकोनॉमिक कंडीशन्स के आधार पर इस व्यवस्था का एवीडेंस-बेस्ड असेसमेंट (evidence-based assessment) किया जाना चाहिए और अगर समीक्षा में कम अवधि उचित पाई जाती है, तो नियमों में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN