Source :- LIVE HINDUSTAN
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) ने मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब नई तारीख 15 जून 2026 होगी। इसके साथ ही वेतन आयोग ने पश्चिम बंगाल के हितधारकों के साथ बैठक का कार्यक्रम घोषित कर दिया है।
8th pay commission latest: अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके फायदे की हो सकती है। दरअसल, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) ने मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब नई तारीख 15 जून 2026 होगी। यह उन लोगों के लिए राहत की बात है जो अब तक वेबसाइट के जरिए आठवें वेतन आयोग के सामने अपनी बात नहीं रख सके हैं। बता दें कि यह दूसरी बार है जब वेतन आयोग ने डेडलाइन बढ़ाई है। पहले आखिरी तारीख 31 मई तय थी। हालांकि वेतन आयोग ने साफ कर दिया है कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।
कोलकाता में बैठक
इसके साथ ही आठवें वेतन आयोग ने पश्चिम बंगाल के हितधारकों के साथ बैठक का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। यह बैठक जुलाई महीने में 9 और 10 तारीख को होने वाली है। इस बैठक में वेतन आयोग केंद्रीय सरकारी संस्थानों, कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ बातचीत करेगा। इस दौरान वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे। इससे पहले 8वां वेतन आयोग 1 से 4 जून के बीच श्रीनगर और 8 जून को लद्दाख का दौरा करेगा और वहां भी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा।
बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल 8वें वेतन आयोग का गठन किया था। नवंबर 2025 में वेतन आयोग ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किया था। वेतन आयोग का गठन केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के सैलरी स्ट्रक्चर, भत्तों और पेंशन लाभों की समीक्षा के लिए किया गया है। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग मई 2027 तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप देगा। इसके बाद यह सरकार पर निर्भर है कि वह सिफारिशों को अक्षरश: लागू करेगी या नहीं।
वेबसाइट को किया गया था लॉन्च
वेतन आयोग ने एक वेबसाइट को भी लॉन्च किया था। इस वेबसाइट पर ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारी बल्कि अन्य हितधारकों से भी सुझाव मांगे जा रहे हैं। अगर वेतन या भत्ते आदि से जुड़ी अपनी बात वेतन आयोग के सामने रखनी है तो इसे वेबसाइट के जरिए रखी जा सकती है।
वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के मुताबिक अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय आयोग देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, विकास और कल्याण योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन, पेंशन योजनाओं का वित्तीय बोझ, राज्यों पर पड़ने वाला असर, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र के मौजूदा वेतन ढांचे समेत कई पहलुओं पर विचार करेगा।
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