Source :- LIVE HINDUSTAN
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठन रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने वेतन आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। संगठन का कहना है कि बढ़ती महंगाई, बदलती आर्थिक परिस्थितियों और पेंशन संबंधी असमानताओं को देखते हुए अब वेतन और पेंशन व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
रेलवे पेंशनर्स की सबसे बड़ी मांग “वन रैंक, वन पेंशन” (OROP) जैसी व्यवस्था को नागरिक पेंशनर्स पर भी लागू करने की है। संगठन का कहना है कि समान पद और समान सेवा अवधि वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को समान पेंशन मिलनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में पुराने और नए पेंशनर्स के बीच काफी अंतर देखने को मिलता है, जिससे कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
संगठन ने 8वें वेतन आयोग से बेसिक पे (मूल वेतन) को मजबूत करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए केवल भत्तों और महंगाई भत्ते (DA) पर निर्भर रहने की बजाय मूल वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए। RSCWS ने वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 5% करने का सुझाव भी दिया है।
महंगाई के प्रभाव को देखते हुए संगठन ने न्यूनतम वेतन और पेंशन की समीक्षा 1 जनवरी 2026 की महंगाई दर के आधार पर करने की मांग रखी है। उनका मानना है कि बढ़ती कीमतों के कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स की क्रय शक्ति लगातार घट रही है, इसलिए वेतन और पेंशन दोनों में वास्तविक सुधार होना चाहिए।
पेंशनर्स संगठन ने स्वास्थ्य सुविधाओं में भी बड़े सुधार की मांग की है। उन्होंने CGHS और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत अधिक प्रतिष्ठित अस्पतालों को शामिल करने, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कैशलेस इलाज की सुविधा का विस्तार करने का सुझाव दिया है। साथ ही मेडिकल बिल रिइम्बर्समेंट प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा, संगठन ने लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाने, GPF पर प्रतिस्पर्धी ब्याज दर देने, LTC नियमों को सरल बनाने और कर्मचारियों के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने की भी सिफारिश की है। रिटायरमेंट लाभों के तहत ग्रेच्युटी (DCRG) की अधिकतम सीमा को समय-समय पर महंगाई के अनुसार संशोधित करने की मांग भी रखी गई है।
सबसे अहम मांगों में से एक पेंशन कम्यूटेशन (Pension Commutation) की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल करने की है। संगठन का कहना है कि इससे पेंशनर्स को जल्दी पूर्ण पेंशन का लाभ मिल सकेगा। साथ ही सभी रिटायरमेंट लाभों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई है।
अब सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। अगर इन मांगों पर विचार किया जाता है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा लाभ मिल सकता है। खासकर OROP जैसी व्यवस्था और महंगाई से जुड़ी पेंशन संशोधन की मांग आने वाले समय में सबसे अधिक चर्चा का विषय बन सकती है।
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