Source :- LIVE HINDUSTAN
अक्सर पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा अच्छे मार्क्स ला रहा है तो काफी है। लेकिन जीवन में और चीजें भी काफी मायने रखती हैं। खासकर ये बेसिक मैनर्स अगर बच्चे में नहीं हैं, तो यकीन मानिए उसकी पढ़ाई लिखाई का कोई खास फायदा नहीं है।
बच्चों के अच्छे नंबर देखकर हर माता-पिता खुश होते हैं। रिपोर्ट कार्ड में 95% या उससे ज्यादा अंक आना निश्चित रूप से गर्व की बात है, लेकिन सिर्फ पढ़ाई में आगे होना ही जीवन में सफल होने की गारंटी नहीं देता। असली सफलता तब मिलती है, जब बच्चा पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे संस्कार और सही व्यवहार भी सीखता है। डिग्रियां नौकरी दिला सकती हैं, लेकिन लोगों का सम्मान पाना अच्छे मैनर्स से ही संभव होता है। आज के समय में, जब बच्चे सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं, तब उन्हें सही समय पर सही आदतें सिखाना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सिर्फ होशियार ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बने, तो आगे बताए गए ये जरूरी मैनर्स उसे जरूर सिखाएं।
खाने को लेकर कमेंट करने की आदत छोड़ना सिखाएं
बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि किसी की थाली में क्या है या कोई क्या खा रहा है, इस पर मजाक या टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हर व्यक्ति की पसंद, जरूरत और परिस्थितियां अलग होती हैं। जब बच्चे दूसरों की पसंद का सम्मान करना सीखते हैं, तो उनमें सेंसिविटी और समझदारी बढ़ती है। यह आदत उन्हें दूसरों की इमोशन की कद्र करना भी सिखाती है।
अलग दिखने वाले लोगों को घूरना नहीं, सम्मान देना सिखाएं
अक्सर बच्चे जिज्ञासा में उन लोगों को देखने लगते हैं जो उनसे अलग दिखाई देते हैं या किसी तरह की फिजिकल डिसएबिलिटी का सामना कर रहे होते हैं। ऐसे समय में उन्हें सिखाएं कि किसी को घूरना ठीक नहीं है। इसके बजाय ऐसे लोगों के साथ नॉर्मल और रिस्पेक्टफुल व्यवहार रखें। ऐसे लोगों को घूमने के बजे एक प्यारी सी स्माइल दे। ऐसी आदत बच्चों को दूसरों के प्रति दयालु बनाती है।
हर जगह खुद को सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बनने की आदत से बचाएं
कई बच्चे चाहते हैं कि हर मौके पर सबका ध्यान उन्हीं पर रहे। चाहे किसी दोस्त का जन्मदिन हो या कोई और खास अवसर, वे खुद को सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट दिखाने की कोशिश करते हैं। बच्चों कुछ समझाएं कि सबका अपना एक स्पेशल डे होता है और उसे स्पेशल डे पर उसी को इंर्पोटेंट फील होने देना चाहिए। इस सीख से बच्चे में सोशल अवेयरनेस डेवलप होती है, वे रिश्तों को बेहतर तरीके से निभाना सीखते हैं।
अकेले बैठे बच्चे को अपने साथ शामिल करना सिखाएं
स्कूल, पार्क या किसी कार्यक्रम में अगर कोई बच्चा अकेला बैठा दिखाई दे, तो अपने बच्चे को उसे अपने साथ खेलने या बातचीत में शामिल करने के लिए मोटिवेट करें। यह छोटी-सी आदत बच्चों के अंदर लीडरशिप और सहयोग की भावना पैदा करती है। साथ ही, वे दूसरों को अपनाने और उनकी मदद करने का महत्व भी समझते हैं।
मजाक और अपमान के बीच का फर्क समझाएं
हंसना और मजाक करना अच्छी बात है, लेकिन किसी का मजाक उड़ाना बिल्कुल अलग बात होती है। बच्चों को यह जरूर सिखाएं कि किसी के साथ हंसना और किसी पर हंसना एक जैसी बात नहीं है। कई बार अनजाने में कही गई बातें भी किसी को दुख पहुंचा सकती हैं। जब बच्चे यह फर्क समझ लेते हैं, तो वे दूसरों की इमोशन का ज्यादा सम्मान करने लगते हैं।
हार और जीत दोनों को स्वीकार करना सिखाएं
जीवन में हमेशा जीत नहीं मिलती और हमेशा हार भी नहीं होती। इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही सिखाएं कि जीत मिलने पर विनम्र रहें और हार मिलने पर निराश होने के बजाय सीखने की कोशिश करें। साथ ही, दूसरों की सफलता पर उन्हें बधाई देना भी सिखाएं। यह आदत बच्चों को मजबूत बनाती है और उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।
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