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मोहम्मद रफी की मखमली आवाज सुनकर अपने ऑफिस में ही रो पड़ी थीं उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। जवाहरलाल नेहरू से दुखी प्रोड्यूसर ने अपने फेवरेट नेता के लिए बनाई थी ये फिल्म।

60 का दशक मोहम्मद रफी की मखमली आवाज के नाम था। इस दशक में उन्होंने कई खूबसूरत, दर्द भरे गाने गाए जिन्हें सुनने के बाद लोगों की आंखें नाम हो जाती थीं। जब भी किसी फिल्ममेकर को अपनी फिल्मों में एक ऐसे गाने की तलाश हुआ करती थी जो लोगों की आत्मा में उतर जाए तो वो रफी को याद करते थे। मोहम्मद रफी की आवाज में वो जादू था कि उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी अपने आंसू रोक नहीं पाई थी। रफी की आवाज में उस गाने को सुनने के बाद इंदिरा गांधी रो पड़ीं थीं।

जवाहरलाल नेहरू के लिए बनाई थी फिल्म

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सावन कुमार टाक नाम के एक प्रोड्यूसर हुआ करते थे। सावन कुमार ने अपने फिल्मी करियर में कई बड़ी फिल्मों पर पैसा लगाया, कई शानदार फिल्में ऑडियंस तक पहुंचाई। उनकी फिल्मों की कहानी ऑडियंस के दिल को छू जाती थीं। सावन कुमार फिल्मों के साथ देश की राजनीति में भी दिलचस्पी रखते थे और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से प्रभावित थे। उन्हें पसंद करते थे। लेकिन 27 मई 1964 की एक खबर आई कि जवाहरलाल नेहरू नहीं रहे। इस खबर से सावन कुमार दुखी हो गए और उन्होंने उसी समय तय किया कि वो नेहरू पर एक फिल्म बनाएंगे और उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। लंबे समय बाद एक कहानी पर काम हुआ और 1967 में एक फिल्म बनकर तैयार हुई नौनिहाल।

मोहम्मद रफी ने रिकॉर्ड किया गाना

फिल्म नौनिहाल की कहानी दिल तोड़ देने वाली थी। फिल्म में रक राजू नाम का अनाथ बच्चा होता है जिसे उसके स्कूल के प्रिंसिपल गोद ले लेते हैं। उसे बताया जाता है कि देश के प्रधानमंत्री उनके रिश्तेदार हैं। बस वो नेहरू से मिलने के लिए निकल पड़ता है। इस इमोशनल कहानी में एक गीत की भी जरूरत थी जो आत्मा में उतर जाए। गीत लिखने का काम कैफी आजमी ने किया। और जब ऐसे दर्द भरे गीतों को आवाज देने की बारी आती है तो मेकर्स मोहम्मद रफी को याद करते हैं। गाने को रफी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया।

इंदिरा गांधी ने सुना गाना

फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी। ऐसे में किसी ने सावन कुमार को सुझाव दिया कि क्यों न वो इस फिल्म को टैक्स फ्री करवा ले। इसके लिए उन्हें देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलना था। सावन कुमार अपनी फिल्म नौनिहाल को टैक्स फ्री करवाने के लिए इंदिरा गांधी से उनके ऑफिस में मिले। इंदिरा गांधी ने सावन कुमार से कहा कि उन्होंने फिल्म तो देखी नहीं है, क्यों न वो इस फिल्म का कोई गीत ही उन्हें सुना दें। ऐसे में सावन कुमार ने टेप रिकॉर्डर ऑन किया और मोहम्मद रफी की आवाज में गाना

‘मेरी आवाज सुनो, प्यार के राज सुनो

मैंने एक फूल जो सीने पे सजा रखा था

उसके पर्दे मैं तुम्हे दिल से लगा रखा था

था जुदा सबसे मेरे इश्क का अंदाज सुनो’

रोने लगी थीं इंदिरा गांधी

ये गाना जैसे-जैसे टेप रिकॉर्डर एम् आगे बढ़ रहा था देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने पिता जवाहरलाल नेहरू की यादों में खोई जा रही थीं। वो एकदम शांत हो गई। उनकी आंखें भर आई। गाना सुनकर वो इतना इमोशनल हो गई कि उनसे वहां बैठा नहीं गया। वो उठीं और अपने केबिन में चली गईं। सब को लगा कुछ गलत हो गया है। लेकिन कुछ देर बाद सावन कुमार को मैसेज मिला कि उनका काम हो जाएगा। और इंदिरा गांधी ने फिल्म नौनिहाल को पूरे देश में टैक्स फ्री कर दिया।

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