Source :- LIVE HINDUSTAN
Google Chrome के करोड़ों यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। सरकारी एजेंसी CERT-In ने लोगों को चेतावनी दी है कि इसके डेस्कटॉप वर्जन में कई सिक्योरिटी कमियां पाई गई हैं। इन कमियों की वजह से हैकर्स टारगेट सिस्टम को हाईजैक कर सकते हैं।
भारत में Google Chrome सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ब्राउजर है। भारत में Google Chrome के लगभग 90-92 करोड़ (2026 के आंकड़ों के अनुसार) यूजर्स हैं। लेकिन इस समय इन करोड़ों गूगल क्रोम यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर आप भी गूगल क्रोम का ही इस्तेमाल करते हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि आपके सिस्टम पर ‘हाइजैक’ होने का खतरा मंडरा रहा है। खुद सरकारी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने देश के सभी Google Chrome यूजर्स के लिए एक नई चेतावनी जारी की है और उनसे तुरंत अपना ब्राउजर अपडेट करने को कहा है। यह चेतावनी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने जारी की है, जिसने इस मामले को ‘क्रिटिकल’ बताया है। क्या है पूरा मामला, आप भी जानिए…
हाईजैक हो सकता है लैपटॉप
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के तहत काम करने वाली साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने लेटेस्ट एडवाइजरी में कहा कि Windows, Mac और Linux सिस्टम के लिए Google Chrome डेस्कटॉप वर्जन में कई सिक्योरिटी कमियां पाई गई हैं। इन कमियों की वजह से हैकर्स टारगेट सिस्टम को हाईजैक कर सकते हैं यानी उसका पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले सकते हैं, सेंसिटिव डेटा चुरा सकते हैं या डिवाइस क्रैश कर सकते हैं।
सबसे ज्यादा खतरे में यह वर्जन
एजेंसी ने कहा, “Google Chrome में कई कमजोरियां रिपोर्ट की गई हैं, जिनसे कोई रिमोट अटैकर मनमाना कोड चला सकता है, सिक्योरिटी पाबंदियों को बायपास कर सकता है, सेंसिटिव जानकारी हासिल कर सकता है, हीप-बेस्ड बफर ओवरफ्लो कर सकता है या टारगेटेड सिस्टम पर डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) की स्थिति पैदा कर सकता है।” रिसर्चर्स के अनुसार, जिन गूगल क्रोम वर्जन पर असर पड़ा है, वे Linux के लिए 148.0.7778.178 और Windows और Mac के लिए 148.0.7778.178/179 से पुराने हैं।
एजेंसी ने कहा, “Google Chrome में WebRTC, GPU, QUIC, XR और ब्राउजर कंपोनेंट्स में Use-after-free की वजह से कई कमजोरियां हैं। कोई रिमोट अटैकर इन कमजोरियों का फायदा उठाकर किसी विक्टिम को खास तौर पर तैयार की गई वेब रिक्वेस्ट खोलने के लिए मना सकता है।”
इसका मतलब है कि गूगल क्रोम के कई टेक्निकल हिस्सों में सिक्योरिटी की कमियां हैं। हैकर्स इन कमियों का गलत इस्तेमाल करके यूजर्स को किसी खतरनाक वेबसाइट पर भेज सकते हैं या ब्राउजर पर हमला करने के लिए बनाए गए किसी मलिशियस लिंक पर क्लिक करा सकते हैं। एक बार जब यूजर इसे खोल लेता है, तो हैकर डेटा चुरा सकता है, मैलवेयर चला सकता है या सिस्टम पर कंट्रोल पा सकता है।
सेफ रहने के लिए करें ये काम
सरकारी साइबर एजेंसी ने कहा कि डेस्कटॉप डिवाइस पर Google Chrome इस्तेमाल करने वाले लोग और ऑर्गनाइजेशन, दोनों ही खतरे में हैं। हालांकि, कंपनी ने इन कमजोरियों को ठीक करने के लिए पहले ही एक सिक्योरिटी अपडेट जारी कर दिया है। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द क्रोम का लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर लें। क्रोम को अपडेट करने के लिए, यूजर्स ब्राउजर खोलकर सेटिंग्स में जाकर, अबाउट क्रोम में जा सकते हैं। ब्राउजर अपने आप अपडेट चेक करेगा और लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर देगा। अपडेट पूरा होने के बाद यूजर्स को ब्राउजर को रीस्टार्ट करना होगा।
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