Source :- LIVE HINDUSTAN

होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री बनाने की मांग को भी ईरान ने अस्वीकार कर दिया। तेहारान ने कहा कि यह क्षेत्र उसके और ओमान के नियंत्रण में रहेगा। कोई भी समझौता शब्दों पर नहीं बल्कि कार्रवाइयों पर आधारित होना चाहिए। 

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते की मांगों को सामने रख दिया है। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखना चाहिए। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत बिना किसी टोल के खोलने की मांग की है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाज आवागमन हो सके। ट्रंप ने कहा कि पिछले हमलों में क्षतिग्रस्त ईरानी परमाणु सुविधाओं में दबे यूरेनियम को अमेरिका, ईरान और IAEA के तालमेल से निकालकर नष्ट किया जाएगा। उन्होंने मीटिंग में अंतिम फैसला लेने की बात कही।

दूसरी ओर, ईरान ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी मीडिया और सूत्रों ने इसे सच और झूठ का मिश्रण बताया। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह अपने परमाणु सामग्री को नष्ट करने या सौंपने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि यह उसकी संप्रभुता और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा है। होर्मुज स्ट्रेट को टोल-फ्री बनाने की मांग को भी ईरान ने अस्वीकार कर दिया। तेहारान ने कहा कि यह क्षेत्र उसके और ओमान के नियंत्रण में रहेगा। ईरानी अधिकारी ने कहा कि कोई भी समझौता शब्दों पर नहीं बल्कि कार्रवाइयों पर आधारित होना चाहिए।

ईरान भी झुकने के लिए तैयार नहीं

ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता रोकने, मुआवजे और संप्रभुता की मान्यता जैसी अपनी शर्तें रखी हैं। फिलहाल तेहारान का परमाणु संवर्धन रेड लाइन बना हुआ है। यह तनाव ईरान-अमेरिका युद्ध की पृष्ठभूमि में है, जिसमें अमेरिका-इजरायल के हमलों से ईरान की नौसेना और परमाणु सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं। होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कीमतें बढ़ीं। अब युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कोई समझौता तभी संभव है जब ईरान परमाणु कार्यक्रम सीमित करे और स्ट्रेट खोले। वहीं ईरान कहता है कि वह शांतिपूर्ण ऊर्जा के लिए संवर्धन जारी रखेगा। क्षेत्रीय देशों जैसे ओमान पर भी दबाव बढ़ रहा है। जानकारों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी और शर्तों का टकराव शांति प्रक्रिया को जटिल बना रहा है। ट्रंप की कड़ी शर्तें घरेलू राजनीति को भी ध्यान में रखकर रखी गई हैं, जबकि ईरान अपनी प्रतिरोध क्षमता दिखा रहा है। फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

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