Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया रिपोर्टों और भारत सरकार द्वारा जारी कथित टेंडर दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना पर काम करने की तैयारी कर रहा है।

भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत चिनाब नदी के पानी को सुरंग के जरिए ब्यास नदी में मोड़ने की योजना बना रहा है, जो सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) का गंभीर उल्लंघन होगा। पाकिस्तान ने आज (गुरुवार, 4 जून को) दावा किया कि भारत द्वारा चिनाब नदी का पानी मोड़ने के लिए नदी-जोड़ो परियोजना बनाना सिंधु जल संधि और अन्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ”गंभीर उल्लंघन” होगा। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी यह टिप्पणी मीडिया में आई उन खबरों को लेकर पूछे गए सवाल पर की, जिनमें कहा गया था कि भारत सिंधु नदी घाटी का हिस्सा रहीं चिनाब नदी के पानी को ब्यास नदी तक सुरंग के माध्यम से पहुंचाने की योजना बना रहा है।

भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किये गए हमले और 26 लोगों की हत्या के अगले दिन पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए दंडात्मक उपायों के तहत 1960 की सिंधु जल संधि को ‘स्थगित’ कर दिया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है।

पाकिस्तान का क्या दावा

अंद्राबी ने कहा, ”जी हां, हमने यह खबर और साथ ही भारत सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक निविदा दस्तावेज भी देखा है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं, जिसका उद्देश्य चिनाब से ब्यास प्रणाली में प्रतिवर्ष 1.9 मिलियन एकड़ फीट पानी स्थानांतरित करना है।” उन्होंने दावा किया, ”चिनाब नदी के पानी का ब्यास नदी प्रणाली में इस तरह से मोड़ना न केवल सिंधु जल संधि का, बल्कि संधि के कानूनों, विशेष रूप से संधियों के कानून पर वियना घोषणापत्र, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय जल कानून के व्यापक ढांचे का भी गंभीर उल्लंघन है, जिसमें 1977 के जलमार्गों पर संयुक्त राष्ट्र संधि में परिलक्षित सिद्धांत भी शामिल हैं।”

चिनाब-ब्यास लिंक का नया विवाद क्या?

सिंधु जल संधि के तहत, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों, चिनाब, झेलम और सिंधु से आने वाला संपूर्ण जल प्रवाह प्राप्त होता था, जबकि भारत को तीन पूर्वी नदियों, सतलुज, ब्यास और रावी पर पूर्ण अधिकार प्राप्त था। अंद्राबी ने यह भी कहा कि सलाल बांध की गाद निकालने की भारत की योजना न तो सिंधु जल संधि के तहत और न ही 1978 के सलाल समझौते के तहत अनुमेय है। सलाल जलविद्युत परियोजना जम्मू -कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रियासी जिले में चिनाब नदी पर स्थित है। इसकी क्षमता 690 मेगावाट की है और ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजना है।

भारत ने कोई सूचना नहीं दी: पाक

अंद्राबी ने दावा किया कि भारत ने न तो आधिकारिक तौर पर इन परियोजनाओं के बारे में कोई सूचना दी है और न ही कोई नोटिस साझा किया है और न ही इस संबंध में कोई परामर्श मांगा है। हालांकि, 22 मई को प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने भारतीय अधिकारियों का एक पत्र पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सभी संबंधित विभागों के साथ साझा किया और उन्हें चिनाब नदी में संभावित बाढ़ के मद्देनजर उच्च सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। इसमें दावा किया गया था कि भारत ने सलाल बांध से गाद साफ करने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। पीडीएमए के प्रवक्ता मजहर हुसैन ने लाहौर में बताया था कि उन्हें इस संबंध में कृषि विभाग से निर्देश प्राप्त हुए थे, जिसने दावा किया कि उसे भारतीय अधिकारियों से 21 से 30 मई के बीच भारत की ओर से पानी के बढ़े हुए प्रवाह के संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN