भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5.25% पर रेपो रेट बनाए रखने का निर्णय लिया है, जिससे होम लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह निर्णय 3 से 5 जून 2026 के बीच आयोजित MPC की बैठक में लिया गया।

**रेपो रेट स्थिर रखने का निर्णय**

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, समिति ने अपनी नीति की ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) स्थिति को भी बरकरार रखा है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर 5.5% पर स्थिर रहेंगी।

**वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का प्रभाव**

गवर्नर मल्होत्रा ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, बाजार की अस्थिरता और सतर्क व्यापारिक भावना देखी गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत इन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है और अर्थव्यवस्था इन दबावों को सीमित प्रभाव के साथ सहन करने में सक्षम है।

**आर्थिक विकास और महंगाई की भविष्यवाणी**

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आर्थिक गतिविधियों और विकास की संभावनाओं पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में मंदी के संकेत मिल रहे हैं, जैसा कि उच्च-आवृत्ति संकेतकों से पता चलता है।

**महंगाई पर नियंत्रण**

महंगाई के संदर्भ में, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि प्रमुख उन्नत अर्थव्यवस्था वाले केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को कड़ा करने की संभावना रखते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था इन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है।

**निष्कर्ष**

RBI की मौद्रिक नीति समिति का यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखना और नीति की ‘न्यूट्रल’ स्थिति को बरकरार रखना दर्शाता है कि RBI मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के प्रति सतर्क है और आवश्यकतानुसार कदम उठाने के लिए तैयार है।

यह निर्णय होम लोन लेने वालों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से उनकी ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण भविष्य में परिस्थितियां बदल सकती हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर नजर बनाए रखना चाहिए।

RBI की मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठकों में वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा को प्रभावित करेंगे।

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