Source :- LIVE HINDUSTAN
https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/05/1200x900/Pahlaj_Nihalani_death_1780634111708_1780634111831_7b4ffc97-cf70-4f8f-8a6e-dcd337601827.jpgअनुपम खेर को अफसोस है कि वह पहलाज निहलानी से मिलने नहीं जा सके। उन्होंने बताया कि एक हफ्ते पहले बात हुई और वह कमजोर लग रहे थे। अनुपम ने बताया कि पहलाज ने उनकी कई बार मदद की।
सीबीएफसी के पूर्व चेयरपर्सन पहलाज निहलानी के निधन पर बॉलीवुड के लोग दुख जाहिर कर रहे हैं। अब अनुपम खेर ने बताया है कि उनकी आखिरी बार पहलाज निहलानी से क्या बातचीत हुई। अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है। साथ ही पछतावा किया है कि वह बीते हफ्ते उनसे मिलने हॉस्पिटल क्यों नहीं गए। पहलाज का निधन 4 जून को 76 साल की उम्र में हुआ। वह बीमार थे और अस्पताल में इलाज करवा रहे थे।
बेहतरीन इंसान थे पहलाज
अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर अपने दोस्त पहलाज निहलानी के लिए इमोशनल पोस्ट लिखा। अनुपम ने वीडियो शेयर किया। इसके साथ कैप्शन था, ‘पहलाज निहलानीजी के निधन से दिल में अजीब सा खालीपन हो गया है। मैंने उनके साथ कई फिल्मों में काम किया है, यह सुखद अनुभव रहा। शोला और शबनम की शूटिंग के वक्त, हमने ना सिर्फ अच्छी फिल्म बनाई बल्कि अनगिनत बढ़ियां यादें बनाईं। पहलाजजी बहुत अच्छे प्रोड्यूसर थे लेकिन इससे भी जरूरी बात वह एक बेहतरीन इंसान थे।’
दिल से उदार और हंसमुख थे पहलाज
अनुपम ने आगे लिखा है, ‘वह बेहद हंसमुख इंसान थे, दिल से उदार थे और लोगों के प्रति उनके मन में सच्चा स्नेह था। उनके साथ बैठना बातें करना, हंसना सबकुछ बहुत सहज और आत्मीय होता था। फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे लोग कम होते हैं जो अपने काम से ज्यादा अपने व्यवहार से याद किए जाते हैं। पहलाजजी उन्होंने लोगों में से एक थे। आज उन्हें याद करते, उनकी मुस्कुराती हुई तस्वीर बार-बार आंखों के सामने आ रही है। पहलाजजी आपकी बहुत याद आएगी। आपका अपनापन, आपकी हंसी और आपका स्नेह हमेशा मेरे साथ रहेगा। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति प्रदान करे। मेरी गहरी संवेदनाएं आपके परिवार के साथ हैं।’
एक हफ्ते पहले आया था मैसेज
अनुपम वीडियो में बोलते हैं, ‘अभी मुझे पता लगा, पहलाज निहलानी के बारे में। मन बहुत उदास हुआ। मेरे करियर में पहलाज निहलानीजी का बहुत बड़ा हाथ है। मैंने बहुत फिल्में की उनके साथ। इनफैक्ट अभी एक हफ्ते पहले उनका मैसेज आया था, कैसे अनुपमजी? बहुत महीनों बाद मैसेज था, वर्ना वह कुछ अच्छा देखते थे तो मैसेज करते थे। मुझे इंट्यूशन हुआ कि मैं इन्हें फोन करता हूं। मैंने फोन किया तो कहा, पहलाजजी कहां हैं, मैं आपको मिलना चाहता हूं। बोले- अभी तो मैं अस्पताल में हूं। कल मैं निकल रहा हूं यहां से। मैंने उनसे कहा कि मिलना चाहता हूं। पता नहीं क्यों आवाज से वह बहुत कमजोर लग रहे थे।
खराब समय में की मदद
अनुपम आगे बोलते हैं, दुखद है। पहलाजजी ने कहा, ‘मैं थोड़ा ठीक हो जाऊं तब आप आइएगा मिलने।’ मैंने कहा, अगले हफ्ते आता हूं। आज मुझे कि वह हमारे साथ नहीं हैं। वह बहुत दयालु और सच्चे इंसान थे। उन्होंने एक बार मेरे कठिन समय में मेरी मदद की थी। वह बहुत उदार थे। वह कभी भी कहीं भी निकल पड़ते थे आपके साथ। कई बार लोग दुर्भाग्य से जो लाइमलाइट नहीं होते उन्हें भूल जाते हैं, पर यह इस प्रोफेशन की हकीकत है।’
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