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ईरान ने रविवार को इसराइल पर कई मिसाइलें दाग़ी हैं. इसके जवाब में इसराइल ने भी ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं.
इसराइल डिफेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने टेलीग्राम पर लिखा, “कुछ देर पहले, इसराइली वायु सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के सैन्य ठिकानों पर हमला किया.”
इसमें हताहतों या हमलों की सटीक जगह के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी गई है.
इससे पहले, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा कि ये हमले एक चेतावनी हैं.
आईआरजीसी ने कहा है कि इससे “पूरे हफ़्ते के लिए लगातार हमलों की शुरुआत” हो रही है.
ईरान की ओर से यह हमला तब हुआ जब रविवार सुबह इसराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हमला किया.
बेरूत पर हुए हमलों का ज़िक्र करते हुए आईआरजीसी ने कहा कि अगर इसराइल की ओर से “आक्रामक हरकतें” दोहराई गईं, तो जवाब “और बड़े पैमाने पर” होगा और इसमें इस इलाक़े में मौजूद अमेरिका और इसराइल के “सभी” ठिकाने शामिल हो सकते हैं.
ईरान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इसराइल पर मिसाइल हमले करने के बाद ईरान ने तेहरान के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाली सभी उड़ानों को “अगले आदेश तक” रोक दिया है.
ईरान ने क्या कहा
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आईआरजीसी ने बताया कि उसने हाइफ़ा के दक्षिण-पूर्व में स्थित रामत डेविड एयर बेस पर हमला करने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है.
ईरान ने अमेरिका और इसराइल की सरकारों पर उस सीज़फ़ायर (युद्धविराम) के तहत “अपना वादा पूरा न करने” का आरोप भी लगाया, जिस पर ईरान ने इन दोनों देशों के साथ हस्ताक्षर किए थे और जो अप्रैल की शुरुआत में लागू हुआ था.
ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसकी सेना ने “कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों” के उत्तर में कई “सैन्य ठिकानों” पर हमला किया है.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि ये हमले अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच अप्रैल में हुए युद्धविराम के “बार-बार उल्लंघन” के बाद किए गए हैं. इन उल्लंघनों में देश के दक्षिण में ईरानी जहाज़ों और ठिकानों पर अमेरिकी हमले भी शामिल हैं.
दोनों पक्षों के बीच 17 अप्रैल से युद्धविराम लागू है – लेकिन यह सिर्फ़ नाम का है. इसराइल और ईरान दोनों ने ही बार-बार इसका उल्लंघन किया है.
अमेरिका ने पिछले हफ़्ते कहा था कि उसने सप्ताहांत में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जबकि ईरान ने कहा कि उसने जवाब में एक अमेरिकी बेस को निशाना बनाया.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि देश अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहा है. साथ ही चेतावनी दी कि अगर इसराइल लेबनान या ईरान पर कोई हमला करता है, तो उसे “करारा और बड़ा जवाब” दिया जाएगा.
इस बीच, बेरूत के दक्षिणी इलाक़ों पर इसराइली हमलों के बाद तेहरान में सरकार के समर्थन में लोगों ने प्रदर्शन किया है.
तस्वीरों में दिख रहे कई प्रदर्शनकारी ईरान और हिज़्बुल्लाह के झंडे लिए हुए हैं. हिज़्बुल्लाह लेबनान का एक राजनीतिक और सैन्य संगठन है जिसे ईरान का समर्थन हासिल है.
ट्रंप ने की अपील
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इन हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत की मेज़ पर लौटने को कहा है.
फॉक्स न्यूज़ के एक संवाददाता के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “वे पहले ही अपनी मिसाइलें दाग़ चुके हैं, अब बहुत हो चुका. बातचीत की मेज़ पर लौटें और किसी समझौते पर पहुँचें.”
ईरान के मिसाइल हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कई अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों से बात की है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू से बातचीत करने से पहले, ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ को बताया कि वह नेतन्याहू से ईरान के हमले का जवाब न देने का आग्रह करने की योजना बना रहे हैं.
‘टाइम्स ऑफ़ इसराइल’ के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसराइल के ‘चैनल 12’ समाचार को भी यही बात दोहराई और कहा कि वह “आज रात कोई और हमला” नहीं देखना चाहते.
ट्रंप ने कहा, “ईरान के हमलों से किसी को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा. दोनों पक्षों ने अपना-अपना काम कर लिया. इसराइल ने हमला किया और ईरान ने भी हमला किया. अब हमें किसी और हमले की ज़रूरत नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा कि वह “अभी” नेतन्याहू को फोन करने वाले हैं और उनसे “जवाब में हमला न करने” के लिए कहेंगे.
इससे पहले ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के साथ ट्रंप ने बातचीत में कहा था कि नेतन्याहू के पास ईरान के साथ समझौता स्वीकार करने के अलावा “कोई विकल्प नहीं” होगा.
“इसराइल में मौजूदा सुरक्षा हालात” की वजह से सोमवार को यरूशलम में अमेरिकी दूतावास बंद रहेगा.
दूतावास ने एक बयान में कहा है कि उसने अमेरिकी सरकार के सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे “अपनी-जगह पर ही सुरक्षित रहें और किसी सुरक्षित ठिकाने पर जाने के लिए तैयार रहें.”
इसराइल क्या कर रहा है
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टेलीग्राम पर एक पोस्ट में, इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ़) ने कहा है कि उसके जनरल स्टाफ के प्रमुख हालात का जायज़ा ले रहे हैं.
इसराइली सेना ने ईरानी हमलों के बाद कहा था कि लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने कहा है कि देश “आदेश मिलते ही पूरे संकल्प के साथ दुश्मन पर हमला करेगा.”
आईडीएफ़ के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने हिब्रू भाषा में एक ब्रीफिंग में कहा कि इसराइली सेना ईरान की ओर से नागरिकों पर “लगातार हमले” नहीं होने देगी.
उन्होंने कहा कि इसराइल “और हमले की संभावना के लिए तैयार” है.
डेफ्रिन ने कहा कि पूरे देश में एयर डिफेंस सिस्टम “तैनात” किए गए हैं और हमलों के बाद आईडीएफ़ के चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ “हालात का जायजा” ले रहे हैं.
उन्होंने कहा, “आईडीएफ़ पूरे लेबनान में अपना ऑपरेशन जारी रखेगी और हिज़्बुल्लाह आतंकवादी संगठन पर और ज़ोरदार प्रहार करेगी.”
इस बीच संघर्ष की बढ़ती आशंका में सोमवार सुबह एशिया में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट की कीमत 2.6% बढ़कर 95.50 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिका में ट्रेड होने वाले कच्चे तेल की कीमत 2.5% बढ़कर 92.75 डॉलर हो गई.
अप्रैल में युद्धविराम पर सहमति के बाद से एनर्जी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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