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Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आप्रवासन मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए विवादास्पद बयान दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर आप तीसरी दुनिया से लोगों को आयात करते हैं, तो आप खुद तीसरी दुनिया बन जाते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आप्रवासन (Immigration) पर सख्त रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया है। ट्रंप के इस पोस्ट ने बवाल मचा दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि अगर आप तीसरी दुनिया से लोगों को आयात करते हैं, तो आप खुद तीसरी दुनिया बन जाते हैं। दुख की बात है कि अगर आप विकासशील देशों से लोगों को लाते हैं, तो जल्दी ही आपका देश भी तीसरी दुनिया का बन जाएगा और आप इसके लिए कुछ नहीं कर पाएंगे। अमेरिका को फिर से महान बनाओ!

यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में अवैध आप्रवासन को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस चरम पर है। ट्रंप ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में सख्त आप्रवासन नीतियों की वकालत की है, जिसमें दक्षिणी सीमा पर दीवार निर्माण, अवैध प्रवासियों की डिपोर्टेशन और मेरिट-बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम शामिल हैं।

ट्रंप प्रशासन की नीतियां गैरकानूनी

बता दें कि अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन की आप्रवासन नीतियों को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया। रोड आइलैंड के प्रोविडेंस में जिला न्यायाधीश जॉन मैककोनेल ने फैसला सुनाया कि प्रशासन ने 39 देशों के नागरिकों के शरण, वर्क परमिट, ग्रीन कार्ड और नागरिकता आवेदनों पर अनुचित रोक लगाई थी। न्यायाधीश ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) की नीतियों ने अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व के दर्जनों देशों के लोगों को ‘अनिश्चित कानूनी अधर’ में छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अप्रवासियों ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया, लेकिन यूएससीआईएस ने महीनों तक उनके आवेदनों पर फैसला लेने से इनकार कर दिया।

‘जन्म के देश के आधार पर भेदभाव’

न्यायाधीश मैककोनेल ने अपने फैसले में लिखा कि यूएससीआईएस की नीतियां वैधानिक अधिकार के बिना और ‘अप्रवासी-विरोधी भावनाओं’ के आधार पर बनाई गईं। उन्होंने कहा कि निर्णय रोकने का कारण इन व्यक्तियों की कोई गलती नहीं, बल्कि उनका जन्म किस देश में हुआ, यही है। यह फैसला आप्रवासी सेवा संगठनों और श्रमिक संघों के गठबंधन के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। इन संगठनों ने मार्च में यूएससीआईएस की नीतियों को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया था। डेमोक्रेसी फॉरवर्ड की स्काई पेरीमैन ने कहा कि यह फैसला पुष्टि करता है कि संघीय सरकार वैध आप्रवासन मार्गों को बंद नहीं कर सकती और न ही लोगों के मूल देश के आधार पर भेदभाव कर सकती है।

बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने नवंबर में वाशिंगटन डीसी में दो नेशनल गार्ड सदस्यों की हत्या के बाद इन नीतियों को लागू किया था। अभियोजकों के अनुसार, इस हमले को एक अफगान आप्रवासी ने अंजाम दिया था। इसके बाद ट्रंप ने 39 देशों पर पूर्ण या आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगा दिए थे। इन देशों में अफगानिस्तान, ईरान, हैती, सोमालिया, वेनेजुएला और सीरिया शामिल हैं। न्यायाधीश ने कहा कि इन नीतियों ने अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया, जो केवल अपने जन्म देश के कारण भेदभाव का शिकार हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएससीआईएस ने कांग्रेस द्वारा बनाए गए आप्रवासन कानूनों का उल्लंघन किया है।

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