Source :- LIVE HINDUSTAN
पीओके में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर है। बुनियादी जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। लोग दशकों से दमन से निराश हो चुके हैं और अब आजादी के नारे भी लगा रहे हैं।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध की आग बुझ नहीं रही है। विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत निर्दोष लोगों के साथ लगातार बर्बरता कर रही है और निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसा रही है। हालांकि लोग अब भी डटे हुए हैं। दशकों के अत्याचार से जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। हालात यह हैं कि विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाली ‘JAAC’ ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को सीधी चुनौती दे दी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर पाकिस्तान यहां के लोगों को सुविधाएं मुहैया नहीं करवा सकता तो भारत के जरिए व्यापार का रास्ता खोलना होगा।
इससे पहले पीओके में आटे और बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर शुरू हुआ सरकार विरोधी आंदोलन बीते दिनों बेहद हिंसक हो गया। पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बेवजह फायरिंग की जिसमें सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। वहीं दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। शहबाज सरकार ने बात करने और समाधान चुनने की बजाय अपने ही मुल्क के लोगों को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद अब प्रदर्शनकारी नेताओं ने अब सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने क्षेत्र के लिए आर्थिक और राजनीतिक स्वायत्तता की मांग की है।
सारे रास्तों को खोलो- JAAC
रावलकोट में आयोजित एक हालिया जनसभा में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने पाकिस्तानी सेना और आसिम मुनीर पर हमला बोला। इस रैली में जेएएसी के प्रमुख नेता सरदार अमान ने पाकिस्तान हुकूमत को सीधे शब्दों में चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान आर्थिक पहुंच और सप्लाई सुनिश्चित नहीं कर सकता, तो भारत के साथ व्यापार के वैकल्पिक रास्ते खोले जाएं। अमान ने समर्थकों को संबोधित करते हुए खुलेआम ऐलान किया, “सभी व्यापारिक मार्ग जल्द ही खुलें, चाहे पाकिस्तान के जरिए हों या भारत के जरिए।”
खुद फैसले लेने का हक
उनकी यह मांग पाकिस्तान द्वारा पैदा की गई आर्थिक तंगी और अवसरों की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में बढ़ते गुस्से को दिखाती है। यहां पाकिस्तानी सेना दशकों से यह नैरेटिव बेचती आई है कि कश्मीरियों को भारत से बचाने के लिए वहां उसकी मौजूदगी जरूरी है। सरदार अमान ने सेना के इस सबसे बड़े तर्क को खारिज करते हुए कहा, “भारत के खिलाफ बचाव करना है तो यह हमारा अपना मामला है, यह आपका काम नहीं है।” उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों को अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पाक हुकूमत उनके संसाधनों को लूट रही है लेकिन स्थानीय विकास में कोई निवेश नहीं हो रहा है। अमान ने कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को आतंकवादी के रूप में पेश कर रही हैं और सरकार और सेना अपनी नाकामी के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को एक सुरक्षा खतरे के रूप में दिखाकर दबाना चाहती है।
आरक्षित सीटों को लेकर भी विवाद
पीओके में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर भी तनाव चरम पर है।JAAC का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए करती है। यहां 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले रावलकोट में जेएएसी समर्थकों के एक साथी कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में इकट्ठा होने के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। इस दौरान कई लोग मारे गए। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियां 45 सदस्यों वाली विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों का इस्तेमाल इलाके में सरकार बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए करती हैं, जिससे स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व कमजोर होता है। ऐसे में इन सीटों से आरक्षण हटाने की मांग की जा रही हैं।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN







