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80 पैसे के शेयर से SBI का जैकपॉट, NSE IPO से मिलेगा ₹5000 करोड़ का खजाना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के आईपीओ का इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल, इस स्टॉक एक्सचेंज ने आईपीओ के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस का ड्राफ्ट जमा करा दिया है। आईपीओ के जरिए देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को बड़ा जैकपॉट लगने वाला है। मेगा आईपीओ से SBI को करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा होने की संभावना है। खास बात यह है कि बैंक ने तीन दशक पहले NSE में महज लगभग 2 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

2,56,775% का जबरदस्त मुनाफा

दरअसल, NSE आईपीओ में सबसे बड़ा सेलर SBI बनने वला है। एनएसई में यह बैंक 2,47,50,000 इक्विटी शेयर बेच रहा है। ये शेयर एसबीआई ने साल 1993 और 1999 के बीच औसतन सिर्फ 80 पैसे प्रति शेयर की लागत से खरीदा था। इसका मतलब है कि बैंक का शुरुआती निवेश ₹1.98 करोड़ (लगभग ₹2 करोड़) का था। अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयर का भाव करीब 2,055 रुपये प्रति शेयर चल रहा है, जिसके आधार पर बैंक को लगभग 5,086 करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है। यानी शुरुआती निवेश पर करीब 2,56,775% प्रतिशत का रिटर्न मिलने की संभावना है।

एनएसई के ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित होगा जिसमें मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस इश्यू के जरिए शेयरधारक सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। एसबीआई के अलावा एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी सब्सिडयरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्रा. लि. (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (1.09 करोड़ शेयर) शामिल हैं। हालांकि, एनएसई में सबसे अधिक 10.72 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) इस निर्गम में कोई शेयर नहीं बेचेगी।

बता दें कि एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी। इसके करीब 9 साल बाद मामले में सेटलमेंट हुआ। इसके बाद एनएसई ने आईपीओ के लिए कदम बढ़ाए। इसी साल, पहले सेबी ने एनओसी दिया और फिर एनएसई बोर्ड ने आईपीओ को मंजूरी दी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN