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ईरान-अमेरिका वार्ता: जेडी वेंस ने क्यों कहा- मेरी ज़िंदगी में दो अहम लोग, एक हिंदुस्तानी और एक पाकिस्तानी

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Source :- BBC INDIA

जेडी वेंस

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स्विट्ज़रलैंड के बर्गनस्टॉक में पाकिस्तान और क़तर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई है.

इस बातचीत से पहले पत्रकारों के सामने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उनकी ज़िंदगी में ‘दो बहुत ज़रूरी लोग हैं, एक भारतीय और एक पाकिस्तानी.’

उनका इशारा उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ओर था. हालांकि जेडी वेंस ने कहा कि यह बात उन्होंने मज़ाक में कही.

उधर, वार्ता शुरू होने से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दे दी.

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान को लेबनान में अपने ज़्यादा पैसे वाले प्रॉक्सी को परेशानी खड़ी करने से तुरंत रोकना चाहिए.”

इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत ज़ोर से हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ़्ते किया था, बस और ज़्यादा.”

इस बीच इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कहा है कि “इसराइली सेना को लेबनान में किसी भी ख़तरे का जवाब देने के निर्देश हैं.”

दरअसल, 17 जून को दोनों पक्षों में जिस 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए थे उसमें लेबनान में संघर्ष विराम भी शामिल है.

जेडी वेंस ने और क्या कहा?

आसिम मुनीर और जेडी वेंस

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पाकिस्तान और क़तर के प्रधानमंत्रियों के सामने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, “इस्लामाबाद और यहां को छोड़कर, यानी पिछले कुछ महीनों से पहले, ईरानी और अमेरिकी लीडरशिप इस लेवल पर कभी नहीं मिले हैं. राष्ट्रपति ने हमें एक नया अध्याय शुरू करने और ईरान के लोगों के साथ अपने रिश्तों को बदलने और उनकी तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी है.”

“मैसेज यह है कि अगर ईरानी लीडरशिप इस इलाक़े में अस्थिरता को बढ़ावा देना बंद कर दे, अगर वह न्यूक्लियर हथियारों को हासिल करने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा छोड़ दे, तो अमेरिका इस देश के साथ अपने रिश्तों को पूरी तरह से बदलने के लिए तैयार है. यही हमारा लक्ष्य है.”

जेडी वेंस ने कहा, “हमने पिछले कुछ घंटों में काफ़ी तरक्की की है और आने वाले समय में और तरक्की की उम्मीद है.”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इलाक़े में सीज़फ़ायर चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अमेरिका और दुनिया भर के लोगों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि राष्ट्रपति ट्रंप की लीडरशिप और हमें इस पॉइंट तक पहुंचाने की उनकी प्रतिबद्धता ही आज हम जहां हैं, वहां तक पहुंचाने के लिए ज़रूरी है, और वह चाहते हैं कि अगले 10 सालों में मिडिल ईस्ट पिछले 10 सालों से अलग हो.”

आसिम मुनीर और शहबाज़ शरीफ़ की तारीफ़ की

जेडी वेंस

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“हम यहां एक आसान मक़सद से इकट्ठा हुए हैं: डिप्लोमेसी और कोऑपरेशन के ज़रिए मिडिल ईस्ट को बदलना, जहां ईरान और खाड़ी देशों के बीच या तो जंग हुई है या उनके बीच बहुत टेंशन वाले रिश्ते रहे हैं, और जहाँ ईरान को इलाके में अस्थिरता का सोर्स माना जाता रहा है. अब हम एक ऐसे भविष्य की तस्वीर देख रहे हैं जहाँ हर कोई शांति और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर सकता है.”

इस बातचीत की प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की तारीफ़ करते हुए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के शुक्रगुज़ार हैं, “जो राष्ट्रपति और मेरे क़रीबी दोस्त हैं. उनकी लीडरशिप और बातचीत की अच्छी कोशिशों ने हमें इस मुकाम तक पहुंचाया है.”

उन्होंने कहा कि जब से पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने उनकी मेज़बानी की है, वह अक्सर मज़ाक में कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी में दो बहुत ज़रूरी लोग हैं, एक भारतीय और एक पाकिस्तानी. भारतीय उनकी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फ़ील्ड मार्शल मुनीर हैं.

“मैंने शायद फ़ील्ड मार्शल मुनीर से पिछले कुछ महीनों में जितनी बात की है, उतनी शायद किसी और से नहीं हुई उनके डिप्लोमैटिक रोल के बिना, हम यहां नहीं होते. वह निश्चित रूप से एक महान मिलिट्री लीडर हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने खुद को एक बेहतरीन डिप्लोमैट भी साबित किया है.”

शहबाज़ शरीफ़ ने क्या उम्मीद जताई

शहबाज़ शरीफ़

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बातचीत से पहले दिए भाषण में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ़ करते हुए कहा कि यह बातचीत उनकी दूर की सोचने वाली और बहुत शानदार लीडरशिप की वजह से मुमकिन हो पाई.

उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी दूर की सोचने वाली और बहुत शानदार लीडरशिप की वजह से आज यह मीटिंग मुमकिन बनाने के लिए धन्यवाद देता हूं. मुझे लगता है कि हमारी बातचीत बहुत काम की होगी और मुझे उम्मीद है कि इससे आने वाले समय में बहुत अच्छी तरक्की होगी.”

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि “मुझे उम्मीद है कि जब हम लौटेंगे, तो हमारे पास एक समझौते का मज़बूत डॉक्यूमेंट होगा.”

“उम्मीद है, जब हम अपने-अपने देशों में लौटेंगे, तो हमारे पास ऐसा डॉक्यूमेंट होगा जिससे दुनिया भर में शांति, विकास और खुशहाली को बढ़ावा मिलेगा.”

शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और क़तर के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया, साथ ही पाकिस्तान आर्मी चीफ़ फ़ील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के रोल की भी तारीफ़ की.

उन्होंने कहा कि “उनका रोल बहुत बढ़िया था और उन्होंने बहुत सब्र और लगन दिखाई. मेरा मानना है कि इन सभी कोशिशों का मिला-जुला नतीजा आज की अच्छी मीटिंग है.”

वार्ता से पहले मुलाक़ात में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ग़ैर-हाज़िर

स्विट़्ज़रलैंड वार्ता

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ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता से पहले, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और क़तर के प्रधानमंत्री ने बातचीत की.

हालांकि, उस समय ईरानी प्रतिनिधिमंडल ग़ैर-हाज़िर था.

इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जा रहा था, जिसके दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची कुछ देर के लिए सम्मेलन कक्ष में दाख़िल हुए, लेकिन कुछ ही पलों बाद वहां से चले गए.

इस कार्यक्रम के बाद वहां मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों को बाहर भेज दिया गया, जिसके बाद औपचारिक रूप से बातचीत शुरू हुई.

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी आईआरआईबी के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कैमरे के सामने जेडी वेंस और अन्य अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ न दिखने पर ज़ोर दिया था.

न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, ईरानी पक्ष ने ज़ोर दिया कि “पहले हुए तालमेल और समझौतों के आधार पर, बर्गनस्टॉक में हुई चार पक्षों की वार्ता और वार्ता कक्ष की कोई भी तस्वीर या वीडियो जारी नहीं की जाएगी.”

यह फैसला तेहरान के राजनीतिक माहौल की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है.

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई के एक पत्र के सार्वजनिक होने के बाद, सरकार और वार्ता जारी रखने के समर्थकों पर कट्टरपंथियों का दबाव बढ़ गया है.

कट्टरपंथियों का कहना है कि जब तक एमओयू के अनुच्छेद 1 को लागू नहीं किया जाता और लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम स्थापित नहीं होता, तब तक ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत जारी नहीं रखनी चाहिए.

‘यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा ईरान’

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान

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इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा, “ईरान यूरेनियम संवर्धन के अपने बुनियादी अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेगा और सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने हमेशा इस स्थिति को बरक़रार रखा है.”

उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष के पास ईरान के इस बुनियादी अधिकार को मान्यता देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

ईरानी प्रेस टीवी के अनुसार, रविवार को तेहरान में एक समारोह में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, “सर्वोच्च नेता ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान परमाणु बम बनाना नहीं चाहता है.”

उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान अमेरिका की मांग यह थी कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए.

‘इसराइली सेना लेबनान में बनी रहेगी’

इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़

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उधर, इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कहा है कि इसराइली सेना लेबनान में ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में बनी रहेगी और उसे किसी भी ख़तरे का जवाब देने के आदेश हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच नाज़ुक संघर्ष विराम में लेबनान में इसराइली सैन्य कार्रवाई एक बड़ी बाधा साबित हुई है और इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस सार्वजनिक रूप से अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं.

यहां तक कि रविवार को वार्ता शुरू होने से कुछ घंटे पहले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर ने इसराइली हमलों का हवाला देते हुए होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी दी थी.

हालांकि शुक्रवार को इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, शनिवार को इसराइली हमलों में कम से कम 20 लोग मारे गए.

ईरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान में हमले को वह अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन मानता है और चेतावनी दी है कि यदि लेबनान में लड़ाई नहीं रुकती है तो वह वार्ता से हट सकता है.

एमओयू के 14 बिंदु क्या हैं?

होर्मुज़ स्ट्रेट

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ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एमओयू के मसौदे का ब्योरा प्रकाशित करने का दावा किया है.

  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम.
  • अमेरिका की ओर से ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की प्रतिबद्धता.
  • 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना.
  • 30 दिनों के भीतर “ईरानी व्यवस्थाओं के तहत” होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना.
  • अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर देने की योजना.
  • ईरानी तेल और ऊर्जा उत्पादों पर लगे प्रतिबंध समाप्त करना.
  • परमाणु हथियार नहीं बनाने की ईरान की प्रतिबद्धता.
  • अमेरिका की ओर से क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाने और नए प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता.

अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने यह भी कहा, “अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान की फ़्रीज़ हुई संपत्तियों का कम से कम आधा हिस्सा जारी नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध निलंबित नहीं कर दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती है.”

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी दी जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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