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ब्रिटेन में सियासी भूचाल, जल्द इस्तीफा दे सकते हैं PM कीर स्टार्मर; खतरे में भारत-UK डील?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर जीत हासिल की थी। लेकिन अब यहां सियासी भूचाल आया हुआ है। हालात यह हैं कि स्टार्मर को जल्द ही इस्तीफा देना पड़ सकता है।

Keir Starmer Resignation: ब्रिटेन की राजनीति पिछले कुछ सालों से लगातार अस्थिर रही है। अब यहां एक बार फिर राजनीतिक संकट छाया हुआ है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर चौतरफा दबाव के बाद सोमवार को अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। अगर वे इस्तीफा देते हैं, तो ब्रिटेन पिछले एक दशक में अपना सातवां प्रधानमंत्री देखने की राह पर आगे बढ़ जाएगा। खास बात यह है कि स्टार्मर के इस्तीफे की ये अटकलें भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लागू होने से ठीक पहले सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

इससे पहले रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री स्टार्मर अगले कुछ दिनों के अंदर ही अपने भविष्य को लेकर एक बयान जारी कर देंगे। स्टार्मर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास ‘चेकर्स’ में अपनी पत्नी के साथ लंबी चर्चा की है, जिसके बाद माना जा रहा है कि वे विदाई की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, ब्रिटिश सरकार के सूत्रों ने इन दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि स्टार्मर का पूरा ध्यान देश चलाने पर है और वे पद पर बने रहेंगे।

गौरतलब है कि कि ब्रिटिश पीएम का यह इस्तीफा काफी दिनों से चली आ रही आंतरिक कलह का परिणाम होगी। पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ असंतोष गहरा गया है। करीब 100 लेबर सांसदों ने सार्वजनिक रूप से स्टार्मर से इस्तीफे की तारीख तय करने की मांग की है।

क्यों चौतरफा घिरे कीर?

वैसे तो कीर स्टार्मर पर पिछले कई महीनों से दबाव था, लेकिन शुक्रवार को आए एक चुनावी नतीजे ने उनकी कुर्सी हिला दी। स्टार्मर के धुर विरोधी और ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे 56 वर्षीय एन्डी बर्नहैम शुक्रवार को हुए एक संसदीय उपचुनाव में बंपर जीत हासिल कर संसद पहुंच गए हैं। उन्होंने दक्षिणपंथी नेता नाइजेल फराज की पार्टी के उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी। संसद का सदस्य बनते ही बर्नहैम ने देश को ‘नई दिशा’ में ले जाने की वकालत कर दी है। लेबर पार्टी के भीतर उन्हें स्टार्मर की जगह लेने के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स की मानें तो बर्नहैम के करीबियों ने स्टार्मर को सलाह दी है कि वे विवाद बढ़ाने के बजाय खुद गरिमा से पद छोड़ दें। चर्चा यह भी है कि पीएम बनते ही बर्नहैम वर्तमान वित्त मंत्री रेचल रीव्स को पद से हटा देंगे। इसके अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग भी रेस में शामिल हैं। इसके अलावा, कीर स्टार्मर को एक और बड़ा राजनीतिक झटका भी लगा, जब उन्होंने पीटर मैंडेलसन को संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया, लेकिन बाद में पीटर के सेक्स ऑफ़ेंडर जेफ्री एपस्टीन संग संबधों का खुलासा हुआ।

भारत-ब्रिटेन ऐतिहासिक ट्रेड डील पर क्या पड़ेगा असर?

यह पूरा सियासी संकट ऐसे समय पर आया है जब भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू होने वाला है। स्टार्मर सरकार की इसे सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा था। इस समझौते से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड जुड़ने और दोनों देशों के बीच व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। पीएम मोदी और कीर स्टार्मर के बीच G-7 शिखर सम्मेलन में इस डील को अंतिम रूप दिया गया था। अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद समझौते की टाइमलाइन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक उथल-पुथल से इस समझौते को लेकर कुछ समय तक अनिश्चितताएं बनी रह सकती हैं। हालांकि उनका कहना है कि लॉन्ग टर्म में लेबर पार्टी भारत के आठ समझौते को आगे बढ़ाएगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN