Home World News hindi परमाणु ठिकानों का निरीक्षण होकर रहेगा, ईरान को IAEA प्रमुख की दो...

परमाणु ठिकानों का निरीक्षण होकर रहेगा, ईरान को IAEA प्रमुख की दो टूक

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को ऐलान किया कि उनके निरीक्षक जल्द ही ईरान के संवेदनशील यूरेनियम संवर्धन स्थलों का दौरा करेंगे।

अमेरिका-ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम परमाणु समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षक जल्द ही ईरान के अत्यधिक संवेदनशील यूरेनियम संवर्धन स्थलों का दौरा करेंगे। IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौते में निरीक्षण की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है और यह ‘अनिवार्य रूप से’ होगा।

ग्रॉसी ने कहा कि मैं राजनीतिक बयानों को पूरी तरह समझता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं। लेकिन दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन स्पष्ट रूप से कहता है कि परमाणु सामग्री वाली सभी सुविधाओं की निगरानी और सत्यापन IAEA द्वारा किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि निरीक्षण होंगे। यह परसों हो सकता है, एक सप्ताह बाद या 10 दिनों में, समय महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि यह प्रक्रिया अनिवार्य रूप से आगे बढ़ेगी।

IAEA प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को निरीक्षण मुद्दे पर विरोधाभासी बयान सामने आए थे। ग्रॉसी ने इसे ‘शब्दों की लड़ाई’ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक बयान चाहे जितने भी विरोधाभासी हों, हस्ताक्षरित दस्तावेज ही अंतिम और बाध्यकारी है। IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने अंत में जोर देकर कहा कि ईरान के संवर्धन स्थलों का निरीक्षण समझौते का अभिन्न अंग है और यह प्रक्रिया राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद जारी रहेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता बढ़ाएगा बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और व्यापक समझौते की राह भी आसान बनाएगा।

समझौते की मुख्य शर्तें

पिछले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को काफी कम संवर्धित स्तर पर लाएगा। बदले में अमेरिका द्वारा ईरानी तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। दोनों पक्षों को पूर्ण और व्यापक परमाणु समझौते पर काम करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।

बताया जाता है कि यह समझौता नाजुक युद्धविराम पर आधारित है, जो पहले ही कई मोर्चों पर तनावपूर्ण स्थिति में है। ईरान ने हाल ही में लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने की घोषणा की है। मंगलवार को लेबनान में हिंसा भड़क उठी, हालांकि स्थिति अभी और बिगड़ने से बच गई है।

क्या बोला ईरान?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका द्वारा पिछले साल बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का IAEA निरीक्षकों द्वारा दौरा करने का कोई कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अन्य परमाणु स्थलों की स्थिति

युद्ध के बाद IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों (जिनमें बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल है) का दौरा करने की अनुमति दी गई है। लेकिन संवर्धन स्थलों (Enrichment Sites) तक पूर्ण पहुंच न होने के कारण एजेंसी ईरान के पूरे यूरेनियम भंडार की मात्रा, गुणवत्ता और सेंट्रीफ्यूज श्रृंखलाओं का सही आकलन नहीं कर पा रही है। परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपना कुछ भंडार अघोषित या गुप्त स्थानों पर स्थानांतरित कर रहा हो।

2025 के युद्ध के बाद निरीक्षण नहीं

2025 में इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए 12 दिनों के भीषण युद्ध के बाद ईरान ने IAEA निरीक्षकों को अपने यूरेनियम संवर्धन स्थलों तक पहुंच देने से इनकार कर दिया था। इन स्थलों पर ईरान के पास पर्याप्त मात्रा में 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित यूरेनियम भंडार होने का अनुमान है, जिसे यदि ईरान चाहे तो तेजी से परमाणु हथियार कार्यक्रम की ओर मोड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस भंडार से संभावित रूप से करीब 10 परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है।

दरअसल, ईरान लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और ऊर्जा उत्पादन के लिए है। हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र देश है जिसके पास बिना घोषित हथियार कार्यक्रम के इतनी उच्च शुद्धता वाला यूरेनियम भंडार है। युद्ध समाप्त होने के बाद भी संवर्धन स्थलों पर IAEA की पहुंच न होने के कारण एजेंसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सही स्थिति का सत्यापन नहीं कर पा रही थी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN