Source :- LIVE HINDUSTAN
कच्चे तेल की कीमते जैसी ही जमीन पर आईं वैसे ही एविएशन कंपनियों इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयर उड़ान भरने लगे। अब क्रूड ऑयल के दाम 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से भी नीचे चले गए हैं। इससे गुरुवार को विमानन कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला। इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन और स्पाइसजेट के शेयरों में 4% से अधिक की बढ़ोतरी हुई।
इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों का प्रदर्शन
तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा एविएशन कंपनियों को मिला, क्योंकि उनकी लागत का सबसे बड़ा हिस्सा फ्यूल होता है। कारोबार के दौरान इंडिगो के शेयर 4.5% चढ़कर 5,444 रुपये के डे हाई पर पहुंच गए। वहीं कम लागत वाली एयरलाइन स्पाइसजेट ने 4.80% की तेजी के साथ 12.95 रुपये का आंकड़ा छुआ।
तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
तेल की कीमतों में यह गिरावट अप्रैल के आखिर में बने उच्चतम स्तर से बहुत बड़ी है। 30 अप्रैल को जब होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई में रुकावट की आशंका पैदा हुई थी, तब कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। अब यह उस स्तर से 42% नीचे आ चुका है।
25 जून को ब्रेंट क्रूड 28 फरवरी, 2026 के बाद पहली बार 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 2% की गिरावट के साथ 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.6% टूटकर 69 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इससे पहले बुधवार को भी ब्रेंट क्रूड 3 डॉलर से अधिक गिरा था और डब्ल्यूटीआई लगभग 3 डॉलर नीचे बंद हुआ था।
सप्लाई की चिंता हुई कम
विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में यह गिरावट सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं के कम होने के कारण आई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बुधवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही लगभग ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर पहुंच गई है।
उन्होंने एक मंच पर बोलते हुए बताया कि पिछले 24 घंटों में इस स्ट्रेट से कम से कम 20 मिलियन बैरल तेल गुजरा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में खदान हटाने के काम के चलते पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ सप्ताह और लग सकते हैं।
क्या करें निवेशक
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक तेल की कीमतें स्थिर बनी रहेंगी, विमानन कंपनियों के शेयरों पर सकारात्मक असर बना रहेगा। हालांकि, निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नजर बनाए रख रहे हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में कोई भी नई उथल-पुथल तेल की कीमतों को फिर से बढ़ा सकती है।
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