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₹1,000 के नीचे फिसला ये IT स्टॉक! 2020 के बाद पहली बार ऐसी रिकॉर्ड गिरावट, निवेशकों के ₹2.5 लाख करोड़ स्वाहा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी इंफोसिस (Infosys) के निवेशकों के लिए यह साल अब तक बेहद मुश्किल साबित हुआ है। कभी भारतीय शेयर बाजार की सबसे भरोसेमंद ब्लू-चिप कंपनियों में गिनी जाने वाली इंफोसिस का शेयर अब ₹1,000 के नीचे फिसल गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सितंबर 2020 के बाद पहली बार कंपनी का शेयर इस स्तर से नीचे पहुंचा है। लगातार गिरावट के चलते कंपनी का मार्केट कैप भी घटकर करीब ₹4 लाख करोड़ रह गया है। एक्सपर्ट का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कमजोर बिजनेस ग्रोथ और अमेरिका की आर्थिक अनिश्चितता ने पूरे भारतीय आईटी सेक्टर पर जबरदस्त दबाव बना दिया है।

बुधवार को इंफोसिस का शेयर लगभग 1.1 प्रतिशत गिरकर ₹986.90 तक पहुंच गया। यह गिरावट केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से जारी कमजोरी का हिस्सा है। फरवरी 2026 के बाद से कंपनी के शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। इस साल अब तक इंफोसिस के शेयर करीब 40 प्रतिशत टूट चुके हैं, जबकि पिछले डेढ़ साल में निवेशकों की संपत्ति लगभग आधी हो गई है। कंपनी का शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹2,006 से 50 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है।

इस गिरावट का असर केवल शेयर कीमत तक सीमित नहीं रहा। इंफोसिस का मार्केट कैप (Market Cap) भी करीब ₹8.37 लाख करोड़ के शिखर से घटकर लगभग ₹4 लाख करोड़ रह गया है, यानी निवेशकों की करीब ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति केवल 2026 में ही साफ हो गई। इसका बड़ा असर उन म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ा है, जिन्होंने इंफोसिस में भारी निवेश कर रखा है।

एक्सपर्ट के अनुसार इस समय सबसे बड़ा डर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर है। नई जनरेटिव AI तकनीकों और ऑटोमेटेड कोडिंग टूल्स के आने के बाद निवेशकों को आशंका है कि पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों का बिजनेस मॉडल आने वाले सालों में पूरी तरह बदल सकता है। खास रूप से फरवरी में लॉन्च हुए Anthropic के Claude Code जैसे AI प्लेटफॉर्म ने यह चिंता और बढ़ा दी कि भविष्य में कई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आउटसोर्सिंग सेवाएं मशीनें ही संभाल सकती हैं।

इसके अलावा मार्च तिमाही के नतीजों ने भी निवेशकों को निराश किया। देश की अधिकांश बड़ी आईटी कंपनियां बाजार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं। इंफोसिस समेत कई कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी बेहद सतर्क (Cautious) गाइडेंस जारी की। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने आईटी सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी कम करनी शुरू कर दी।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी इस समय भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई अभी भी पूरी तरह कंट्रोल नहीं हुई है और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी हुई है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो अमेरिकी कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च कम कर सकती हैं। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है, इसलिए इसका सीधा असर इंफोसिस जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है।

हाल ही में वैश्विक आईटी कंपनी Accenture ने भी कमजोर आउटलुक दिया, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में बिकवाली और तेज हो गई। इस साल निफ्टी IT इंडेक्स (Nifty IT Index) करीब 32 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट रही है, यानी आईटी सेक्टर बाजार के मुकाबले कहीं ज्यादा कमजोर प्रदर्शन कर रहा है।

अब निवेशकों की नजर जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों पर टिकी हुई है। बाजार यह देखना चाहता है कि क्या कंपनियों को नए ऑर्डर मिल रहे हैं, ग्राहकों का टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ रहा है और AI से कमाई के नए अवसर बन रहे हैं या नहीं। अगर कंपनियां सकारात्मक संकेत देती हैं, तो सेक्टर में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल अधिकांश ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों तक आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इंफोसिस जैसी मजबूत कंपनियां लंबी अवधि में फिर वापसी कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल निवेशकों को धैर्य रखने और तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN