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‘खामेनेई के जनाजे में जिहादियों के खात्मे का मौका’ अमेरिका के इशारे पर इजरायल करेगा अंतिम वार?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में मारे गए खामेनेई का शव पिछले 4 महीनों से कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है।

Iran Supreme Leader Ali Khamenei Funeral: पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का अभियान लगभग समाप्त हो गया है। अब युद्ध शांत होने के बाद ईरानी लोग अपने ‘सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई’ के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं। दुनिया भर के मित्र देशों को इसका निमंत्रण दिया गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, खामेनेई के जनाजे में करोड़ों लोगों के आने की उम्मीद है। इस भीड़ को संभालना पहले ही बहुत मुश्किल है। ऐसे मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक और करीबी लौरा लूमर ने इजरायल को हमला करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खामेनेई के जनाजे को मौके पर लाखों लोग मौजूद होंगे, ऐसे में यह जिहादियों पर बम बरसाने का अच्छा मौका है।

सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी राय जाहिर करते हुए लौरा ने एक के बाद एक कई पोस्ट किए। इसमें उन्होंने ईरान लोगों के खिलाफ अपनी नफरत का भी खुला प्रदर्शन किया। लौहा ने 9 जुलाई को होने पर खामेनेई के अंतिम संस्कार के ऊपर हमला करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वह कभी भी ऐसे मौके को नहीं गंवाती। 28 फरवरी को अमेरिकी हमले में मारे गए ईरानी सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार की पोस्ट पर अपनी राय देते हुए लूमर ने लिखा कि यह सही मौका है। उन्होंने लिखा, “खामेनेई का अंतिम संस्कार? इसे कहते हैं निशाना लगाने के लिए एक तैयार बड़ा माहौल।”

एक और पोस्ट में लूमर ने इजरायल और अमेरिकी बलों को सुझाव भी दिया। उन्होंने लिखा, “IDF के पास यह सबसे मजेदार काम करने का तरीका है।” इस पर एक यूजर ने अपनी राय देते हुए कहा कि क्या आप एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम पर हमला करने के लिए कह रही हैं। इसका जवाब देते हुए लूमर ने कहा कि वह जिहादियों पर हमला होते देखने के लिए कभी न नहीं कहेंगी। उन्होने लिखा, “मैं अमेरिका या आईडीएफ को कुछ जिहादियों पर बमबारी करते देखने के मौके को कभी भी नहीं कहूंगी।”

कौन हैं लौरा लूमर?

अमेरिका में दक्षिण पंथी विचार धारा की सिपहसालार लौरा लूमर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और करीबी वफादार मानी जाती है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अहम भूमिका निभाई है। वह अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ चलाए गए अभियान की वह बहुत बड़ी समर्थक रही हैं। उन्होंने इस अभियान को बीच में रोकने के लिए अमेरिका में प्रयास कर रहे लोगों की भी कड़ी आलोचना की थी। वह इस बात की प्रबल समर्थक हैं कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल का भी वर्चस्व होना चाहिए। इसके अलावा वह ट्रंप की विरोधी इल्हान उमर पर भी लगातार हमला करती रहती हैं।

खामेनेई का ऐतिहासिक अंतिम संस्कार

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में अपने परिवार के कई सदस्यों और सुरक्षाबलों के साथ मारे गए खामेनेई पिछले 4 महीनों से अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। ईरानी नेताओं को भी डर था कि अगर खामेनेई का अंतिम संस्कार युद्ध के दौरान किया जाता है, तो अमेरिका और इजरायल करोड़ों की भीड़ पर हमला कर सकते हैं। इसलिए जब युद्ध समाप्त हो गया उसके बाद अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल कोल्ड स्टोरेज में रखे खामेनेई के शव का अंतिम संस्कार करीब 5 दिन चलेगा। राजधानी तेहरान में अंतिम यात्रा निकाले जाने के बाद उन्हें 3 दिनों तक तेहरान के एक नमाज परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को इराक के पवित्र शहर नजफ ले जाया जाएगा। यहां से शव को वापस कोम शहर लाया जाएगा। यहां पर अन्य रस्में पूरी होने के बाद उनके जन्म स्थान मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ईरानी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनाजे में शामिल होने वाली भीड़ की है। ईरानी सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, इस जनाजे में करोड़ों लोगों के आने की उम्मीद है। ईरान के पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी और 2020 में मारे गए कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार के दौरान भीड़ बेकाबू हो चुकी है। इसकी वजह से कई लोग मारे गए थे। भीड़ को काबू में रखना और सुरक्षा इंतजाम करना ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

क्या हमला कर सकता है ईरान या अमेरिका?

खामेनेई का शव पिछले चार महीनों से अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा है। अमेरिका के साथ शांति समझौता होने के बाद भी ईरान ने इस कार्यक्रम की योजना बनाई है। भले ही इजरायल इस शांति समझौते से खुश नहीं है, लेकिन इसके बाद भी अंतिम संस्कार पर हमला करने की आशंका न के बराबर है। इससे पहले भी लेबनान में इजरायली हमले में मारे गए हिज्बुल्लाह के पूर्व प्रमुख नसरल्लाह की मौत के बाद अंतिम संस्कार युद्ध विराम के बाद ही हुआ था। हालांकि, युद्ध विराम कार्यक्रम के दौरान भी इजरायली फाइटर जेट आसमान में मंडराते रहे थे, लेकिन उन्होंने हमला नहीं किया था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN