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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल भेजा जा रहा है. इसमें दुनिया भर के कई नेताओं सहित लाखों विदेशी नागरिकों के शामिल होने की उम्मीद है.
पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी की पुष्टि की है.
वहीं से भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की ओर से बिहार के गवर्नर सैयद अता हसनैन और विदेश मामलों के राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा तीन जुलाई को अयातुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान जाएंगे.
मंत्रालय ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा, “इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत रिश्तों और लोगों के बीच मज़बूत संबंधों को दर्शाती है. यही रिश्ते भारत और ईरान के राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की अहम बुनियाद माने जाते हैं.”
इससे पहले भारतीय मीडिया में खबरें चल रही थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया है लेकिन ईरान की ओर से किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को आमंत्रित करने की पुष्टि नहीं की गई.
तेहरान नगर पालिका में सांस्कृतिक और सामाजिक मामलों के उप प्रमुख मोहम्मद अमीन तवाकलिज़ादेह के अनुसार, “4, 5, 6, 7 और 8 जुलाई को अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में राजधानी तेहरान में डेढ़ से दो करोड़ लोगों की संभावित भागीदारी को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं.”
कौन हैं लेफ़्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन?
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सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने क़रीब चार दशक तक कई चुनौतीपूर्ण इलाक़ों में सेवा दी. उन्होंने श्रीलंका, सियाचिन, पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर में अहम ज़िम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा मोज़ाम्बिक और रवांडा में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों का भी हिस्सा रहे.
बिहार लोक भवन की वेबसाइट पर प्रकाशित गवर्नर प्रोफ़ाइल के अनुसार, लेफ़्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रिटायर्ड) श्रीनगर स्थित सेना की 15वीं कोर और भोपाल स्थित 21वीं कोर की कमान संभाली.
वो भारतीय सेना के मिलिटरी सचिव भी रह चुके हैं. सेना से जुलाई 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाईं.
वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2015 में प्रधानमंत्री पुस्तकालय और संग्रहालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य वह सदस्य रहे.
साल 2018 में उन्हें केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति की ज़िम्मेदारी दी गई थी. इसके बाद वह साल 2020 से 2026 तक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य रहे.
उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई पुरस्कार मिले हैं.
रणनीतिक मामलों पर देश के प्रमुख विशेषज्ञों में उनकी पहचान बनी.
सैयद अता हसनैन रक्षा और सुरक्षा मामलों पर नियमित लेखन भी करते रहे हैं. उनके लेख देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं और वह राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में भी अपनी राय रखते रहे हैं.
मूल रूप से उत्तर प्रदेश में जन्मे सैयद अता हसनैन की शुरुआती पढ़ाई नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से हुई. उन्होंने आगे की पढ़ाई दिल्ली के सेंट स्टीफ़ंस कॉलेज से की. उन्होंने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ़ डिफ़ेंस स्टडीज़, किंग्स कॉलेज लंदन और एशिया पैसिफ़िक सेंटर फ़ॉर सिक्योरिटी स्टडीज़ (हवाई) से भी डिग्री ली.
महबूबा मुफ़्ती और सलमान ख़ुर्शीद भी जाएंगे तेहरान
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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि वो अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगी.
ईरान के सुप्रीम लीडर के कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग के निदेशक मोहसीन क़ुमी ने महबूबा को यह निमंत्रण दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई से महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “मेरे लिए यह बड़े सम्मान की बात है और ज़िंदगी में एक बार मिलने वाला यह निमंत्रण है. सुप्रीम लीडर को अंतिम विदाई देने के लिए मैं वहां जाऊंगी.”
कांग्रेस की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान ख़ुर्शीद भी अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में शरीक होंगे.
भारत से और किसको निमंत्रण
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण मिला है.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में सलमान खुर्शीद ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष वहां नहीं जा पा रहे हैं और उन्होंने ख़ासतौर पर मुझे अपना और कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित किया है. मैं यही ज़िम्मेदारी निभाऊंगा. मैं शाम 4 बजे रवाना होने वाली विशेष उड़ान से जाऊंगा और मुझे उम्मीद है कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रमों में शामिल रहूंगा.”
जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन मूसवी अल सफ़वी ने व्हाट्सऐप के ज़रिए निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस समारोह में शामिल होने को लेकर उत्साहित हैं.
एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं पूरे समुदाय की ओर से वहां श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मौजूद रहूंगा. मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाएं, उन लोगों की भावना जो इस नेता के साथ खड़े रहे, अपने साथ लेकर जाऊंगा और इस कार्यक्रम में हिस्सा लूंगा.”
भारत के शीर्ष नेतृत्व की ग़ैरहाज़िरी पर सवाल
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भारत सरकार की ओर से शीर्ष नेतृत्व की ग़ैरहाज़िरी को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल किए जा रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नज़र रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार स्मिता शर्मा ने एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए कहा, “जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई थी तो उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उस वक्त के उप राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ को भेजा गया था. मेरी राय यही है कि भारत को एक कैबिनेट मंत्री को भी भेजना चाहिए था.”
ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमलों से ठीक दो दिन पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल की यात्रा पर थे, और भारत ने 28 फरवरी को हुए उन हमलों में अली ख़ामेनेई की हत्या की निंदा नहीं की थी.
जबकि पाकिस्तान समेत कई देशों ने खुलकर खामेनेई की हत्या की निंदा की थी.
हालांकि बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास जाकर खामेनेई की मौत पर शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर भारत की तरफ़ से दुख जताया था.
भारत में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना की थी.
रॉयटर्स के मुताबिक़, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई को तेहरान में शुरू होगी और 9 जुलाई को उनके गृहनगर, पूर्वोत्तर के पवित्र शहर मशहद, में उन्हें दफ़नाए जाने के साथ संपन्न होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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