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चीनी कंपनियों की मिली बड़ी सरकारी राहत, पावर स्टॉक्स का हुआ बुरा हाल, 9% तक गिरा शेयर

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Stock in news: 4 चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में शामिल होने की छूट मिलते ही घरेलू पावर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिल रही है। सीजी पावर लिमिटेड, हिताची एनर्जी लिमिटेड, जीई वर्नोवा टीएंडडी लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में आज 9 प्रतिशत तक की गिरावट मिली है। ब्रोकरेज फर्म आईआईएफएल के अनुसार सरकार ने 4 चीनी कंपनियों को 2 साल तक के लिए छूट दी है।

कौन सी चार कंपनियां?

TBEA एनर्जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ताईकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को यह छूट मिली है। बता दें, इस साल फरवरी में TBEA को छूट दी गई थी। तब यह छूट सिर्फ एक साल के लिए मिली थी। जिसमें कुछ शर्तें शामिल है।

इस साल की शुरुआत यानी जनवरी में रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमा पर कम होते तनाव को देखते हुए कई अन्य चीनी कंपनियों को सरकारी बोलियो में शामिल होने की छूट देने पर विचार किया जा रहा है।

धाकड़ कंपनियों के शेयरों का बुरा हाल

GE Vernova T&D के शेयरों की कीमतों में 22 जून से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इन 9 कारोबारी सत्रों के दौरान यह स्टॉक 17 प्रतिशत गिरा है। हिताची एनर्जी के शेयरों का दाम 9 में से 7 कारोबारी दिन के दौरान लुढ़क गया है। कंपनी के शेयरों का भाव 13 प्रतिशत है। सीजी पावर के शेयरों का भाव 22 जून से अबतक 5 प्रतिशत गिरा है।

सीजी पावर के शेयर आज बीएसई में 914.95 रुपये के स्तर पर खुले थे। दिन में कंपनी के शेयरों का दाम 6 प्रतिशत की गिरावट के बाद 890.05 रुपये के स्तर पर खुला था। पिछले एक साल की कीमतों 33 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, 5 साल में कंपनी के शेयरों का दाम 1007 प्रतिशत बढ़ा है।

इस छूट का क्या होगा असर

चीनी कंपनियां अब भारत के ग्रिड इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए प्रतिद्वंदिता बढ़ाएंगी। आईआईएफएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार TBEA Energy के पास एक्सट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसफॉरमर्स बनाने की यूनिट है। वहीं Nanjing Electric हाई वोल्टेज डायरेक्ट करेंट के लिए इंसूलेटर बनाती है। बता दें, 2020 में बॉर्डर पर बढ़े तनाव के बाद भारत सरकार ने चीनी कपनियों के लिए गवर्नमेंट पैनल में रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी क्लियरेंस अनिवार्य कर दिया था। यहां से छूट मिलने के बाद ही चीनी कंपनियों को स्टेट कॉन्ट्रैक्ट में शामिल सकती थी।

(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN