Source :- LIVE HINDUSTAN
ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई के मौके पर हजारों लोगों ने छाती पीट-पीटकर मातम मनाया। यहां आए लोगों का कहना है कि वे केवल मातम मनाने नहीं बल्कि अमेरिका से बदला लेने आए हैं।
अमेरिकी हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई के मौके पर तेहरान जैसे लोगों से पट गया है। उनके श्रद्धांजलि स्थल पर चारों ओर लोग ही लोग दिखाई दे रहे हैं। लोग ना केवल खामेनेई की मौत पर दुख जता रहे हैं बल्कि अमेरिका के प्रति रोष भी जाहिर कर रहे हैं। इस मौके पर जमा हुए हजारों लोगों ने ‘बदला-बदला’ का नारा लगाते हुए अपनी छाती पीट-पीटकर मातम मनाया।
तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला प्रेयर कॉम्प्लेक्स में उनका शव रखा गया है। ईरान के शीर्ष नेताओं के अलावा बड़ी संख्या में ईरानी आवाम उनकी अंतिम विदाई की गवाह बन रही है। इसके अलावा देश-विदेश से मेहमान भी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। अमेरिका और इजरायल के हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। यहां पहुंचे एक शख्स ने कहा, हम यहां मातम मनाने नहीं बल्कि बदला लेने आए हैं। हम चुप नहीं बठने वाले हैं। खून का बदला खून से लिया जाएगा। बहुत सारे लोग खामेनेई का पोस्टर लेकर वहां पहुचे हैं। इस भीड़ में पीले झंडे भी दिखाई दिए जो कि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के हैं। हिजबुल्लाह लेबनान से इजरायल के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।
ईरान में भयंकर गर्मी होने की वजह से यहां पर पानी की फुहारें भी मारी जा रही हैं। इस जगह पर चारों ओर लोगों के खाने पीने का भी इंतजाम किया गया है। बाहर मौजूद पुरुषों की भीड़ लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीटकर शोक जता रही थी। शिया समुदाय के अंतिम संस्कार में यह एक आम परंपरा है। अपनी मां के साथ अंतिम संस्कार में शामिल होने आईं 27 वर्षीय हनानेह मौसवी ने रोते हुए कहा, ”मैं अपने प्रिय नेता अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने यहां आई हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन देखना पड़ेगा। काश, इस त्रासदी से पहले मेरी मौत हो गई होती।’
क्या है ‘ग्रैंड मोसल्ला’
‘ग्रैंड मोसल्ला’ में बनाया गया खुला मंच उस मंच जैसा है, जहां खामेनेई कभी तेहरान शहर के बीचों-बीच अपने परिसर में स्थित ‘हुसैनिया’ में भाषण दिया करते थे। तेहरान स्थित वह परिसर 28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत में हुए इजराइली हवाई हमले में नष्ट हो गया था। इस हमले में खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्य मारे गए थे।
तेहरान से करीब 530 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज से आए अली काजमी ने कहा, ”हम अंतिम संस्कार में यह दिखाने के लिए शामिल हुए हैं कि हम सभी अपने देश और धर्म की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।” बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से खासकर ऐसे समय में ईरान सरकार का मनोबल बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जब वह युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
अंतिम विदाई से बेटे मोजतबा की दूरी
इस बीच, इस बात की आशंका भी बनी हुई है कि इजराइल दोबारा हमला कर सकता है। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने इस कार्यक्रम से खुद को दूर रखा है। ईरान ने अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरू करने के लिए चार जुलाई का दिन चुना, जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। अधिकारियों ने इस समय के चयन के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन तेहरान में समारोह के दौरान भीड़ ने ”अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाए। वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति और अमेरिकी दूतावास पर कब्जे तथा बंधक संकट के बाद से ईरान में यह नारा आम रहा है।
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