Source :- LIVE HINDUSTAN
प्रेग्नेंसी का छठा महीना मां और बच्चे, दोनों के लिए बेहद खास माना जाता है। इस समय छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। डॉक्टर वैदेही मराठे से जानिए इस महीने क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना जरूरी है।
प्रेग्नेंसी का छठा महीना कई मायनों में खास होता है। इस समय तक मां का बेबी बंप साफ दिखाई देने लगता है और बच्चे की हलचल भी पहले से ज्यादा महसूस होने लगती है। कई महिलाएं इस दौरान खुद को पहले से ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करती हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि अब सावधानी की जरूरत नहीं है।
दरअसल, यही वह समय होता है जब बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है और मां के शरीर में भी लगातार बदलाव आते रहते हैं। इसलिए खान-पान, आराम, व्यायाम और रोजमर्रा की आदतों का सही होना बेहद जरूरी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वैदेही मराठे बता रही हैं कि इस समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है।
छठे महीने में क्या करें?
- संतुलित और पौष्टिक खाना खाएं: हर दिन ऐसा खाना खाएं जिसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हों। यह मां और बच्चे, दोनों के लिए जरूरी है।
- रोज हल्की सैर या व्यायाम करें: अगर डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो रोज हल्की सैर या आसान व्यायाम करें। इससे शरीर एक्टिव रहता है और कई परेशानियां कम हो सकती हैं।
- भरपूर आराम करें: इस समय शरीर को पहले से ज्यादा आराम की जरूरत होती है। रोज पर्याप्त नींद लें और बीच-बीच में भी आराम करें।
- भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी ना होने दें। दिनभर पर्याप्त पानी और दूसरे स्वास्थ्यवर्धक पेय लेते रहें।
- दवाएं समय पर लें: जो भी विटामिन या दूसरी दवाएं डॉक्टर ने लिखी हैं, उन्हें बिना भूले समय पर लें।
- बच्चे की हलचल पर ध्यान रखें: अगर बच्चे की हलचल पहले से कम महसूस हो रही है, तो इसे इग्नोर ना करें।
छठे महीने में क्या ना करें?
- धूम्रपान, शराब और नशे से दूर रहें: ये आदतें बच्चे की ग्रोथ पर बुरा असर डालती हैं।
- बहुत भारी सामान ना उठाएं: इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
- ज्यादा जंक फूड और मीठा खाने से बचें: बहुत ज्यादा तला-भुना और मीठा खाना वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकता है।
- तनाव और नींद की कमी से बचें: ज्यादा तनाव और कम नींद मां और बच्चे दोनों पर असर डाल सकते हैं।
इन्हें बिल्कुल ना इग्नोर करें
अगर खून आना शुरू हो जाए, पेट में तेज दर्द हो या बच्चे की हलचल कम लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
याद रखें! हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है। इसलिए किसी दूसरी महिला का अनुभव आपके लिए सही हो, यह जरूरी नहीं। अपने शरीर में होने वाले बदलावों को समझें और हर जरूरी फैसले से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
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