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राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफ़ा किया मंज़ूर, कृष्ण मोहन होंगे अंतरिम महामंत्री

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Source :- BBC INDIA

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज मीडिया से बात करते हुए

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अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले के बाद सोमवार को पहली बार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक हुई. इस बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया.

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाया गया है. नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक वो इस पद पर रहेंगे.

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि ख़ास अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है और 22 जुलाई को ट्रस्ट की दोबारा बैठक होगी.

उन्होंने उम्मीद जताई कि 22 जुलाई को जब दोबारा बैठक होगी तब तक एसआईटी की रिपोर्ट भी आ जाएगी.

चंपत राय ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों के बीच बीते महीने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

26 जून से चंपत राय के इस्तीफ़े की ख़बरें आ रही थीं लेकिन ट्रस्ट की ओर से 27 जून को एक पत्र जारी कर इस्तीफ़े की जानकारी दी गई थी.

बैठक के बाद ट्रस्ट ने क्या बताया?

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने पत्रकारों से कहा कि अपराधियों को उचित दंड मिलेगा क्योंकि उन्हें न्यायालय पर विश्वास है.

इसके साथ ही उन्होंने हिंदू समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वो अफ़वाहों पर भरोसा न करे और अगर किसी को उनकी कोई चीज़ खोने की कोई आशंका है तो राम मंदिर के कार्यलाय में आकर पूछताछ करें.

गोविंद देव गिरी ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के पास 2800 चीज़ों का रजिस्टर है और उसकी जांच की जा सकती है.

इसके अलावा कोषाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी को लेकर कहा गया कि “संपूर्ण राष्ट्र में जो हो-हल्ला मचाया गया है उससे इरादे साफ़ नहीं हैं, जो राम भक्ति का पाठ पढ़ाने की बात कर रहे हैं, उन्होंने राम भक्तों पर गोलियां चलाईं. राम भक्ति के विरोध में काम करने वाले लोगों के दिलों में जो झूठा ज्वार दिखावे के लिए दिखा है वो साधारण नहीं है, इसका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को बांटना है.”

“कई संघर्षों के पश्चात ये मंदिर बना, लोगों ने इसके लिए अपने प्राणों, परिवारों और करियर की चिंता नहीं की. चढ़ावा चोरी का काम गिनती के समय हुआ है, उससे हम दुखी हैं. चोरी छोटी हुई या बड़ी हुई, ये बात बाद में आती है लेकिन जिस तरह का वातावरण बना वो चिंता की बात है.”

चंपत राय

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चंपत राय को लेकर क्या कहा गया?

गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के त्याग पत्र को लेकर कहा, “जो वातावरण का निर्माण हुआ उसके चलते महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने त्याग पत्र दिया है. महामंत्री के नाते काम करने वाले चंपत राय जी को बड़ी वेदना हुई. उनका कहना था कि जब तक सारा न्याय ठीक से नहीं हो जाता और अपराधी पकड़े नहीं जाते उनका पद पर बने रहना ठीक नहीं रहता, ये सोचकर उन्होंने त्याग पत्र दिया. जिसको मान्य करना और न मान्य करना हमारे हाथ में नहीं था.”

“के परासरन जी (संस्थापक ट्रस्टी) ने कहा कि संविधान के अनुसार त्याग पत्र देते ही स्वीकृत माना जाता है. इस वजह से हमारे पास कोई चारा ही नहीं होता है. क्योंकि इसे स्वीकार करना न करना हमारे हाथ में नहीं होता. इस वजह से हमने इसे स्वीकार कर लिया. उन्होंने (चंपत राय) राम मंदिर के निर्माण के लिए आरंभ से लेकर आज तक का कार्य उन्होंने किया है. उनके कार्य का सम्मान करते हुए. उन्होंने जो उदारता दिखाई है उसको हमने स्वीकार कर लिया है.”

“चीज़ें कहां गईं इसके बारे में तरह तरह के संचार चल रहे हैं. इसको लेकर हम रजिस्टर लेकर आए हैं जिसमें हम दिखाने वाले हैं कि 2800 चीज़ों का रजिस्टर हमारे पास है और सभी चीज़ें सुरक्षित हैं.”

कृष्ण मोहन ने कहा कि जब तक नए महामंत्री की नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक उन्हें ये ज़िम्मेदारी दी गई है.

उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता ये होगी कि इस मामले में जो दोषी पाया जाता है उसे सज़ा मिले. इस प्रकरण में जो हुआ है उससे हम आहत हैं, उससे राम भक्तों को कष्ट हुआ है.

कृष्ण मोहन ने कहा, “इसमें कहीं न कहीं प्रबंधन और संचालन में कोई कमियां रह गई थीं. मेरा प्रयत्न होगा जहां कमियां होगी उन्हें ठीक करना मेरा प्रयत्न होगा. समाज में जो माहौल बना है उससे हमारे न्यास की छवि धूमिल हुई है, उससे अविश्वास का भाव पैदा हुआ है. मेरा प्रयत्न होगा कि जो छवि धूमिल हुई है, उसे फिर से स्थापित करेंगे.”

ट्रस्ट के अध्यक्ष ने जारी किया था बयान

 ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक से पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने एक पत्र जारी किया है.

इस पत्र में लिखा है कि राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी से वह बहुत आहत हैं, लेकिन उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उनका पूरा भरोसा है. इस मामले पर किसी को भी राजनीति नहीं करनी चाहिए.

इससे पहले रविवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने ‘रामभक्तों के नाम’ एक पत्र लिखकर अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित गबन पर सफ़ाई दी थी.

गोविंद गिरी ने अपने पत्र में वित्तीय पारदर्शिता पर ज़ोर देते हुए स्पष्ट किया था कि ‘ट्रस्ट के कोष का पूरा लेखा-जोखा ऑडिटेड’ है और अधिकृत व्यक्ति कभी भी इसकी जांच कर सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में उन्होंने ‘नकद दान या वस्तु रूप में बहुत सीमित उपहार’ स्वीकार किए हैं, जिनका रिकॉर्ड उपलब्ध है.

राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला

चंपत राय

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अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी और गड़बड़ी के मामले में एसआईटी अब तक आठ अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर चुकी है.

इन आठों अभियुक्तों की तीन दिन की न्यायिक हिरासत ख़त्म होने के बाद सोमवार, 29 जून को दोबारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

बीते महीने की शुरुआत में अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि राम मंदिर के दान पात्र की नक़दी और दूसरे क़ीमती सामान ग़ायब हुए हैं.

जिसके बाद इस मुद्दे पर अयोध्या के स्थानीय नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया था.

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करके दावा किया कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है.

इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की घोषणा की.

गठन के 10 दिनों के अंदर 23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी.

इसके बाद 25 जून की शाम को इस मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर इन्हें गिरफ़्तार कर लिया. एफ़आईआर में नामित सभी अभियुक्त उस टीम का हिस्सा थे, जो 40 दानपात्रों के चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र पहुंचाने के बाद गिनती का काम करती थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS