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गद्दाफी के देश में शांति लाएगा पाकिस्तान? 2 दुश्मनों की दोस्ती कराने में जुटे मुनीर, छिपा है एक लालच

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान-अमेरिका के बाद अब पाकिस्तान लीबिया संकट सुलझाने के लिए गुपचुप मध्यस्थता कर रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन से दोनों विरोधी गुटों के बीच बातचीत शुरू हुई है, जिसमें JF-17 फाइटर जेट डील भी शामिल है।

पाकिस्तान की कूटनीति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने के बाद, अब पाकिस्तान युद्ध की आग में झुलस रहे लीबिया में भी ‘शांति दूत’ बनने की कोशिश कर रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने लीबिया के दो धुर विरोधी गुटों यानी पूर्वी और पश्चिमी सत्ता केंद्रों के बीच गुपचुप तरीके से मध्यस्थता शुरू कर दी है। हालांकि इसके पीछे पाकिस्तान का खुद का लालच छिपा है। यह लालच पैसों से जुड़ा है।

लीबिया के दोनों गुटों ने खुद की थी पाकिस्तान से अपील

साल 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के दौरान मुअम्मर गद्दाफी की सत्ता खत्म होने के बाद से ही लीबिया गृहयुद्ध का सामना कर रहा है। तब से यह देश पूर्वी और पश्चिमी प्रतिद्वंद्वी प्रशासनों में बंटा हुआ है। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका यहां कूटनीतिक समाधान निकालने की कोशिश कर रहा था।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने मध्यस्थता की यह कोशिशें पिछले साल के अंत में शुरू की थीं। दिलचस्प बात यह है कि लीबिया के दोनों प्रतिद्वंद्वी पक्षों ने खुद इस्लामाबाद से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था।

अमेरिका ‘पूरी तरह वाकिफ’, सऊदी अरब का भी मिल रहा बैकअप

रॉयटर्स की रिपोर्ट में पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका इस्लामाबाद की इस भूमिका से “पूरी तरह वाकिफ” है और इसमें शामिल भी है। पाकिस्तान के इस प्रयास को सऊदी अरब का भी समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल ही इस्लामाबाद ने सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया था।

लीबिया में पाकिस्तान का यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया मध्यस्थता के ठीक बाद उठाया गया है। ईरान वाले मामले में भी पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई थी, जिसके लिए ट्रंप प्रशासन ने उसकी जमकर तारीफ की थी।

पैसों का लालच- JF-17 फाइटर जेट्स की डील

पिछले महीने पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने रावलपिंडी में लीबिया के सैन्य प्रमुख सद्दाम हफ्तार से मुलाकात की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद हफ्तार ने वाशिंगटन का दौरा किया और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। तब अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने बयान जारी कर लीबियाई नेताओं के प्रयासों का स्वागत करते हुए लीबिया की एकता के लिए अमेरिकी समर्थन दोहराया था।

मध्यस्थता के साथ-साथ पाकिस्तानी अधिकारी पूर्वी लीबिया स्थित सेना (LNA) के साथ रक्षा संबंधों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। इस रक्षा साझेदारी में पाकिस्तान द्वारा लीबिया को JF-17 लड़ाकू विमान बेचे जाने की संभावना भी शामिल है। यानी पाकिस्तान अपने चीन की मदद से बने जहाज बेंचकर लीबिया से पैसे कमाना चाहता है।

अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं

इस पूरे मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान अन्य क्षेत्रीय हितधारकों के साथ किस हद तक समन्वय कर रहा है। इस ‘सीक्रेट’ मध्यस्थता रिपोर्ट पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, सेना की मीडिया विंग (ISPR), पश्चिमी और पूर्वी लीबियाई अधिकारियों के साथ-साथ कतर, तुर्किये, सऊदी अरब व अमेरिका के विदेश मंत्रालयों की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN