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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/07/08/1200x900/8_july_ott_1783492623197_1783492629083_d7bd6db4-4a79-4d2f-b71a-c4b59cde146b.jpgअगर आपको हिस्ट्री पसंद है तो ये सीरीज आपके लिए ही है। इसकी आईएमडीबी रेटिंग 9 है और ये सीरीज आपको बोर होने नहीं देगी। इसके कुल 10 एपिसोड्स हैं।
जब भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है, तो अमूमन 1920 के बाद के दौर या फिर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे जांबाज नायकों का जिक्र सबसे पहले आता है। लेकिन सन 1920 से भी बहुत पहले, 19वीं सदी के आखिरी दशक में, महाराष्ट्र की धरती पर एक ऐसी चिंगारी सुलग रही थी जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी। ये कहानी है उस दौर की जब एक महामारी के बीच दमनकारी नीतियों ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया था और तब तीन भाइयों ने मिलकर देश के पहले सशस्त्र युवा विद्रोह की पटकथा लिखी थी।
क्या हुआ था?
पुणे का वो दौर बेहद खौफनाक था। एक तरफ ब्युबोनिक प्लेग का कहर था और दूसरी तरफ ब्रिटिश प्लेग कमिश्नर डब्ल्यू. सी. रैंड का अत्याचार। स्वच्छता के नाम पर अंग्रेज सैनिक घरों में घुसकर बदसलूकी करते, संपत्ति को नुकसान पहुंचाते और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते थे। इस जुल्म के खिलाफ जब तीन सगे भाइयों का खून खौला, तो उन्होंने एक ऐसी खुफिया योजना बनाई जिसने इतिहास का रुख मोड़ दिया। इस पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐतिहासिक घटना को एक सीरीज में दिखाया गया है।
सीरीज का नाम
हम बात कर रहे हैं बेहद चर्चित मराठी ओरिजिनल सीरीज ‘गोंड्या आला रे’ की। इस सीरीज ने दर्शकों के बीच एक खास जगह बनाई है और यही वजह है कि इसे IMDb पर 9.0/10 रेटिंग मिली है। सीरीज का ये नाम उस ऐतिहासिक कोड-वर्ड से प्रेरित है, जिसका इस्तेमाल क्रांतिकारी अपने टारगेट के आने का सिग्नल देने के लिए करते थे।
क्यों खास है ‘गोंड्या आला रे’?
अंकुर काकड़कर के निर्देशन में बनी ये 10 एपिसोड की सीरीज चापेकर भाइयों (दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव) के बलिदान और 22 जून 1897 को कमिश्नर रैंड की हत्या के पीछे की पूरी रणनीति को दिखाती है।
कमाल की एक्टिंग
सीरीज में मराठी सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों ने काम किया है। भूषण प्रधान (दामोदर चापेकर), क्षितिश दाते (बालकृष्ण) और शिवराज वैचल (वासुदेव) ने अपने किरदारों में जान फूंक दी है। वहीं, दिग्गज अभिनेता सुनील बर्वे ने लोकमान्य तिलक के बेहद प्रभावशाली किरदार को जीवंत किया है।
हिस्ट्री की किताबों की तरह बोरिंग नहीं है ये सीरीज
ये सीरीज किसी बोरिंग इतिहास के पाठ जैसी नहीं लगती। इसे एक ‘हिस्टोरिकल एक्शन-थ्रिलर’ की तरह पेश किया गया है, जहां हर पल सस्पेंस और देशभक्ति का जज्बा बना रहता है।
हिंदी में है ये सीरीज?
यदि आप भी भारतीय इतिहास के इस गौरवशाली और आक्रामक अध्याय को करीब से देखना चाहते हैं, तो ये सीरीज जी5 पर अपनी मराठी में देख सकते हैं या समझने के लिए अंग्रेजी सबटाइटल्स ऑन कर सकते हैं।
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