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कोलकाता के दक्षिणी उपनगर स्थित बारुईपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की से रेप और हत्या के मामले में एक अभियुक्त की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई है.
ताज़ा जानकारी के मुताबिक़, मृतक की पहचान प्रभास मंडल के रूप में हुई है. लड़की के परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उसकी पहचान की थी.
सूर्यपुर में नाबालिग लड़की से रेप और हत्या का मामला सामने आया था. पांच जुलाई को उसका शव एक स्थानीय तालाब से बरामद किया गया.
पुलिस के अनुसार, मंगलवार देर रात जांच के तहत क्राइम सीन रीक्रिएट कराने के लिए अभियुक्त प्रभास मंडल को तालाब के पास ले जाया गया था.
पुलिस का दावा है कि इसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी का सर्विस रिवॉल्वर छीनकर भागने की कोशिश की.
इसके बाद पुलिस ने उस पर गोली चला दी. घायल अभियुक्त को बारुईपुर उप-मंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पुलिस पर आरोप
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घटना सामने आने के बाद से ही पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग की मौत डूबने से हुई थी.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस ने शुरुआती शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की होती तो लड़की की जान बचाई जा सकती थी.
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “उस रात करीब साढ़े आठ बजे हमने पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. रविवार सुबह स्थानीय लोगों से जानकारी मिलने के बाद हमने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और खुद अभियुक्त की पहचान कर उसे पकड़ लिया.”
उन्होंने आगे दावा किया, “अभियुक्त ने थाने में अपना अपराध कबूल किया था. हम उसके साथ घटनास्थल पर गए और शव बरामद कराया. इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के स्थानीय नेता शांतनु मंडल ने अभियुक्त को भागने में मदद की.”
शांतनु मंडल स्थानीय बीजेपी नेता हैं. उन्होंने अपने ऊपर लगे इन आरोपों से इनकार किया है.
उन्होंने मीडिया से कहा, “घटना की जानकारी मिलने के बाद हम थाना प्रभारी के पास गए और शिकायत दर्ज कराई. सीसीटीवी फ़ुटेज देखने के बाद हमने एक व्यक्ति को पहचाना जो लड़की को ले जाते हुए दिखा था. हमने उसे ख़ुद पकड़ा और उसने अपराध स्वीकार किया.”
स्थानीय निवासी जिस व्यक्ति को अभियुक्त बता रहे थे, वही प्रभास मंडल था, जिसकी 7 और 8 जुलाई की दरमियानी रात पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई. हालांकि, उसके ख़िलाफ़ बलात्कार और हत्या के आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं.
मानवाधिकार संगठन ने उठाए सवाल
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एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (एपीडीआर) की केंद्रीय समिति के सदस्य रंजीत सूर ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला संदिग्ध है.
उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति पूरे मामले का सबसे अहम गवाह था. उसकी मौत के बाद पुलिस अपनी सुविधा के अनुसार कहानी गढ़ सकती है और अपनी विफलताओं पर पर्दा डाल सकती है.”
उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में पुलिस मुठभेड़ों की कहानी लगभग एक जैसी होती है- अभियुक्त पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश करता है और फिर मुठभेड़ में मारा जाता है.
अभियुक्त की मां ने क्या कहा?
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अभियुक्त प्रभाष मंडल की मां ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “दो पुलिसकर्मी मेरे घर आए थे. मैं अभी-अभी उठी थी. उन्होंने मुझे बताया कि मेरे बेटे की मौत हो गई है और पूछा कि क्या मैं अस्पताल जाना चाहती हूं. मैंने उनसे कहा कि मैं नहीं जा सकती, क्योंकि मेरे पति बीमार हैं.”
”मैंने कहा कि आप लोग जो करना चाहते हैं, करिए. मुझे कोई आपत्ति नहीं है.”
”मेरे बेटे ने जो किया, उसकी उसे सज़ा मिल गई. मैं उसका शव स्वीकार नहीं करूंगी. मैं उसका शव अपने घर भी नहीं लाऊंगी.”
”उसने कोई अच्छा काम नहीं किया. उसने गलत किया था और उसी की उसे सज़ा मिली है. उसे मार दें या जो करना हो करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है. मुझे उसकी लाश नहीं चाहिए.”
‘हथियार छीनकर भागने’ के दावों वाले कई मामले
हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे मुठभेड़ के मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने दावा किया कि अभियुक्त ने पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद उसे गोली मारनी पड़ी.
ऐसा चर्चित मामला 2019 में हैदराबाद में सामने आया था, जब एक पशु चिकित्सक के रेप और हत्या के चार अभियुक्तों की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी. पुलिस का दावा था कि क्राइम सीन रीक्रिएट करने के दौरान अभियुक्तों ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की थी.
इस घटना के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बयान जारी कर इसे ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग’ बताया था और इसकी निंदा की थी. संगठन ने कहा था कि दोषियों को निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत सज़ा मिलनी चाहिए.
वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 9 साल के कार्यकाल में राज्य में 17,043 पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 289 अपराधियों की मौत हुई.
पुलिस का कहना है कि इनमें से कई मामलों में अभियुक्त क्राइम सीन रीक्रिएट करने के दौरान पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश कर रहे थे.
क्या था बारुईपुर मामला
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बारुईपुर क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के बलात्कार के बाद हत्या से पश्चिम बंगाल में ग़ुस्से का माहौल है.
लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया था कि हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार हुआ था. हालांकि पुलिस ने शुरुआत में रेप का मामला दर्ज नहीं किया था.
लेकिन शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पॉक्सो की धाराओं के तहत रेप का ममला दर्ज किया गया है.
परिजनों का कहना है कि लड़की शनिवार से लापता थी. रविवार (5 जुलाई) को जब उसका शव एक तालाब से बरामद हुआ तो इलाक़े में तनाव बढ़ गया.
इस घटना के बाद भीड़ ने हत्या के शक में एक युवक की भी पिटाई कर दी जिससे उसकी मौत हो गई.
बारुईपुर की इस घटना के सामने आने के बाद टीएमसी ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बारुईपुर जाना चाहती थीं लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया.
वहीं बीजेपी ने टीएमसी के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.
बारुईपुर पुलिस ने रविवार को एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया. बाद में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन अन्य को हिरासत में लिया गया है.
इलाक़े में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं. बारुईपुर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन का कहना है कि इस बात के लिए क़दम उठाए जा रहे हैं कि इलाक़े में और अशांति ना फैले.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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