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‘ब्रेन-ईटिंग’ अमीबा से बच्चों को अधिक ख़तरा क्यों? कैसे होता है बचाव

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Source :- BBC INDIA

नेगलेरिया फाउलेरी नाम के 'ब्रेन-ईटिंग' अमीबा सीधे दिमाग को नुकसान पहुंचाता है

इमेज स्रोत, Bruno da Rocha-Azevedo, Herbert B. Tanowitz and Francine Marciano-Cabral / Interdisciplinary Perspectives on Infectious Diseases

स्टीव स्मेल्स्की परिवार की खुशी के लिए कोस्टा रिका में छुट्टी मनाई गई थी. लेकिन छुट्टी मनाने के कुछ ही दिन बाद उन्होंने खुद को अपने बेटे के आईसीयू बेड के पास बैठे हुए पाया.

वो अपने इकलौते बच्चे की मौत का शोक मना रही थीं.

स्मेल्स्की का बेटा जॉर्डन 11 साल का था. उनकी मौत नेगलेरिया फाउलेरी नाम के ‘ब्रेन-ईटिंग’ अमीबा से हुए संक्रमण के कारण हुई.

यह अमीबा आमतौर पर गर्म पानी की झीलों, गर्म पानी के झरनों और बेकार पड़े स्विमिंग पूलों में पाया जाता है. जब लोग पानी में जाते हैं तो यह नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और तेज़ी से दिमाग़ के ऊतकों पर हमला शुरू कर देता है.

स्टीव कहते हैं, “जॉर्डन ने बस एक दिन, एक बार स्विमिंग की और वह चला गया.”

पिछले साल भारत में नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण के 200 से ज्यादा मामले सामने आए. यह इन मामलों का अब तक का सबसे बड़ा ग्लोबल आउटब्रेक है.

हाल के महीनों में भी भारत में नए मामले सामने आते रहे हैं. इससे पहले इसके दुनिया भर में कुल मिलाकर 500 से भी कम मामले दर्ज किए गए थे.

इस आउटब्रेक ने शोधकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है. अब यह जीव उन जगहों पर भी पाया जा रहा है जहां पहले यह बहुत कम देखा जाता था.

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ केंट के मॉलिक्यूलर पैरासिटोलॉजिस्ट डॉक्टर अनास्तासियोस त्साउसिस कहते हैं, “मुझे लगता है कि भविष्य में और मामले सामने आएंगे. हम इसे दुनिया भर में देखेंगे.”

‘ये आपके दिमाग़ को छीन लेता है’

जॉर्डन को साल 2014 में पानी में खेलते हुए संक्रमण हुआ

इमेज स्रोत, Steve Smelski

अमेरिका के फ़्लोरिडा के रहने वाले स्टीव कोस्टा रिका में अपने होटल के पास एक नेचुरल हॉट स्प्रिंग में अपने बेटे के साथ घंटों तक वॉटर स्लाइड पर एन्जॉय कर रहे थे. तभी जॉर्डन को सिरदर्द होने लगा.

घर लौटने के बाद दर्द और बढ़ गया और जॉर्डन को उल्टियां होने लगीं. उसके माता-पिता उसे पास के अस्पताल ले गए. वहां जॉर्डन को हेलुसिनेशन होने लगा. उसने बताया कि उसे छत पर कीड़े रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं.

स्टीव याद करते हैं, “वह हमारी तरफ़ देख रहा था. लेकिन उसे पता नहीं था कि हम कौन हैं. मुझे नहीं लगता कि उसे यह भी पता था कि वह कौन है.”

जब डॉक्टर जॉर्डन की बीमारी का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उसे दौरा पड़ा और उसे इंटेंसिव केयर में ले जाया गया. वहां बाद में जॉर्डन की मौत हो गई.

स्टीव बताते हैं, “स्विमिंग के साढ़े सात दिन बाद ही उसकी जान चली गई. इससे पहले उसे कोई समस्या नहीं थी. वह बिल्कुल स्वस्थ था.”

जॉर्डन की मृत्यु प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (पीएएम) से हुई, जो नेगलेरिया फाउलेरी नामक जीवाणु से होने वाला मस्तिष्क संक्रमण है.

पीएएम के कई पीड़ितों की तरह, जॉर्डन को भी शुरुआत में मेनिनजाइटिस (दिमागी बुखार) समझा गया था क्योंकि शुरुआती चरणों में इन दोनों बीमारियों के लक्षण एक जैसे दिख सकते हैं.

जब तक डॉक्टरों ने इस बात को समझा तब तक बहुत देर हो चुकी थी. संक्रमण ने उसके मस्तिष्क में गंभीर सूजन पैदा कर दी थी.

स्टीव कहते हैं, “यह (अमीबा) आपके दिमाग़ को, आपके विचारों को, आपकी पहचान को छीन लेता है.”

जॉर्डन संक्रमण से पहले पानी में अपने पिता के साथ खेल रहे थे

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हमें यह नई जगहों पर क्यों पाया जा रहा है?

‘जर्नल ऑफ़ इन्फेक्शन एंड पब्लिक हेल्थ’ में 2025 में छपी एक समीक्षा के मुताबिक, 1962 और 2023 के बीच दुनिया भर में ‘ब्रेन-ईटिंग’ अमीबा संक्रमण के 488 मामले सामने आए.

तब ज़्यादातर मामले अमेरिका के दक्षिणी राज्यों, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में पाए गए. इनमें से लगभग 97 फीसदी मामलों में लोगों की मौत हो गई.

लेकिन पिछले 20 सालों में इन मामलों का एक बढ़ता हुआ हिस्सा उत्तरी गोलार्ध के देशों में देखा गया है, जिनमें इटली और बेल्जियम शामिल हैं.

पिछले 15 सालों में अमेरिका के ठंडे उत्तरी राज्यों (जैसे मिनेसोटा) में भी नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं. पिछले साल स्लोवाकिया में ‘नेगलेरिया फाउलेरी’ संक्रमण का पहला कन्फर्म मामला दर्ज किया गया.

इसके मामले उन जगहों पर भी पाए गए हैं जो पारंपरिक रूप से इस अमीबा से जुड़ी झीलों और नदियों से अलग हैं.

ताइवान में 2023 में एक व्यक्ति की मौत एक इनडोर सर्फिंग सुविधा में ‘नेगलेरिया फाउलेरी’ के संपर्क में आने के बाद हो गई. उसी साल अमेरिका में एक छोटे बच्चे की मौत एक दूषित ‘स्प्लैश पैड’ के संपर्क में आने के बाद संक्रमण से हो गई.

जलवायु परिवर्तन के कारण झीलों और तालाबों का तापमान बढ़ने से अमीबा उन क्षेत्रों में भी फैलने लगा है जो पहले इसके पनपने के लिए बहुत ठंडे थे.

बीबीसी

त्साउसिस कहते हैं, “जब पानी गर्म होता है तो अमीबा अधिक सक्रिय हो जाता है. ऐसे में स्विमिंग करने वाले लोगों के संक्रमित होने की संभावना भी बढ़ जाती है.”

उनका कहना है कि घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन लोगों को बढ़ते जोखिम के प्रति सतर्क रहना चाहिए.

इसके अलावा उनका मानना ​​है कि वैज्ञानिक अमीबा का पता लगाने में अधिक कुशल हो रहे हैं. ज्यादा मामलों के पता चलने की ये भी एक वजह हो सकती है.

त्साउसिस कहते हैं, “मुझे लगता है कि इनकी संख्या शायद हमेशा से ही अधिक रही हो. हम बस अब इन संख्याओं में बढ़ोतरी को महसूस कर रहे हैं क्योंकि हमें इनका परीक्षण करना आता है.”

बच्चों को अधिक ख़तरा क्यों?

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बड़ों के मुकाबले बच्चों में ‘नेगलेरिया फाउलेरी’ से संक्रमित होने का खतरा ज़्यादा होता है.

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी में वॉटर साइंस के एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर इयान राइट कहते हैं, “इस बीमारी से संक्रमित होने वाले लोगों की औसत उम्र 12 साल होती है, क्योंकि बच्चों को गर्म पानी में नहाना पसंद होता है.”

कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना ​​है कि बच्चों में संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा हो सकता है क्योंकि कम उम्र के लोगों में नाक और दिमाग़ के बीच के बैरियर को अमीबा के लिए पार करना आसान हो सकता है.

राइट कहते हैं, “यह किसी बुरे सपने, हॉरर फ़िल्म या स्टीफन किंग के नॉवेल जैसा है.”

“इसके होने की संभावना बहुत कम है, लेकिन अगर यह हो जाए, तो शायद मौत ही होती है.”

अगर बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो डॉक्टर मरीज़ों का इलाज कई दवाओं के कॉम्बिनेशन से करने की कोशिश करते हैं. साथ ही दिमाग की सूजन कम करने के उपाय भी करते हैं. फिर भी मरीज़ के बचने की संभावना बहुत कम होती है.

लेकिन भारत के दक्षिणी राज्यों में से एक और पर्यटकों के पसंदीदा डेस्टिनेशन केरल में हाल ही में फैले संक्रमण ने इस बीमारी के असल में ज़्यादा खतरनाक होने के बारे में बनी धारणाओं को चुनौती दी है.

‘कम्युनिकेशन्स मेडिसिन’ में छपी नई रिसर्च के मुताबिक, जिन 200 लोगों के नतीजों के बारे में जानकारी थी, उनमें से आधे से ज़्यादा लोग बच गए. यह आंकड़ा ऐतिहासिक रूप से जीवित रहने की दर (लगभग 3 फीसदी) से कहीं ज़्यादा है.

इन नतीजों से पता चलता है कि ‘ब्रेन-ईटिंग’ अमीबा से होने वाले संक्रमण का इलाज शायद उतना मुश्किल नहीं है, जितना पहले माना जाता था.

इस स्टडी को करने वाली रिसर्चर्स की इंटरनेशनल टीम के मुताबिक, बीमारी का जल्दी पता चलना, मेडिकल स्टाफ में ज़्यादा जागरूकता और इलाज के बेहतर और एक जैसे तरीके, इन सभी ने नतीजों को बेहतर बनाने में योगदान दिया होगा.

कैसे बचें?

पानी में खेलने के अलावा ‘नेगलेरिया फाउलेरी’ शरीर में तब भी जा सकता है जब कोई व्यक्ति नेज़ल इरिगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करता है. ये लंबी टोंटी वाली बोतलें होती हैं जिनका इस्तेमाल आमतौर पर सर्दी, साइनस इन्फेक्शन या एलर्जी के लक्षणों से राहत पाने के लिए किया जाता है.

पिछले साल अमेरिका के टेक्सस में एक 71 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी. वह महिला वैसे तो स्वस्थ थी, लेकिन उन्होंने मोटरहोम के नल के पानी से ऐसी ही एक डिवाइस का इस्तेमाल किया था.

धार्मिक रीति-रिवाजों (जैसे इस्लाम में) और आयुर्वेद जैसी अन्य पद्धतियों में भी नाक साफ करने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है.

नेज़ल इरिगेशन सिस्टम 'नेगलेरिया फाउलेरी' के दिमाग तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है

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कुछ आसान तरीके हैं जिनसे इस बहुत कम जोखिम को और भी कम किया जा सकता है.

अमेरिका का ‘सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (सीडीसी) नाक साफ करने के लिए स्टरलाइज़्ड, डिस्टिल्ड या पहले उबाले और ठंडे किए गए पानी का इस्तेमाल करने की सलाह देता है, क्योंकि दूषित नल के पानी का संबंध कभी-कभार होने वाले संक्रमणों से पाया गया है.

गर्म मीठे पानी में तैरते समय, गोता लगाते या कूदते समय अपनी नाक को पकड़ना या नोज़ क्लिप का इस्तेमाल करना शामिल हो सकता है.

राइट कहते हैं, “अगर कोई शक हो, तो बस अपना सिर पानी के नीचे न ले जाएं.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS