Home मनोरंजन समाचार फिल्मों के पोस्टर बनाने की 6 ट्रिक्स, दुनिया भर में इस्तेमाल होते...

फिल्मों के पोस्टर बनाने की 6 ट्रिक्स, दुनिया भर में इस्तेमाल होते हैं यही तरीके

3
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/08/01/1200x900/Poster_Story_1785604982185_1785605006321_a0d443f9-2547-445a-9019-232d49422461.jpg

फिल्मों के पोस्टर बनाने का तरीका वक्त के साथ काफी बदल चुका है। आज की तारीख में सॉफ्टवेयर्स की मदद से आइकॉनिक पोस्टर्स बनाए जाते हैं, लेकिन इनमें भी 6 पैटर्न हैं जिन्हें फॉलो किया जाता है।

क्य आपने कभी फिल्मों के पोस्टर्स पर ये पैटर्न नोटिस किए हैं? दुनिया भर की फिल्मों के पोस्टर्स सिर्फ 6 ही तरीकों से बनाए जाते हैं।

एक दौर था जब फिल्मों के पोस्टर हाथों से तैयार किए जाते थे। बाकायदा एक शख्स इन पोस्टर्स को ड्रॉ किया करता था और इसके बाद इन्हें पेन्ट किया जाता था। ना सिर्फ हर एक पोस्टर को बनाने में कड़ी मेहनत लगा करती थी, बल्कि यह उतने ज्यादा अपीलिंग भी नहीं लगते थे। आज पोस्टर्स तैयार करना एक बिलकुल अलग तरह की आर्ट बन गया है। आज की तारीख में पोस्टर्स इतने अपीलिंग और फुल ऑफ इफैक्ट्स होते हैं, कि इनसे नजरें हटा पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि मूवी पोस्टर्स बनाने के लिए आज भी मोटा-मोटी कुल 6 फॉर्मूले ही लगाए जाते हैं। यानि आज आप जितने भी पोस्टर्स देखते हैं, उन सभी में कुल मिलाकर 6 ही सिद्धांत लगाए जाते हैं।

कैसे तैयार किए जाते हैं मूवी पोस्टर्स?

सोशल मीडिया पर पोस्टर जंकी के नाम से मशहूर राज खत्री भारत के मशहूर पोस्टर डिजाइनर हैं। मार्चिंग एंट्स एडवर्टाइजिंग के क्रिएटिव हेड राज खत्री ने अपने एक पॉडकास्ट में बताया था कि कैसे आज भी जितने पोस्टर्स बनते हैं उनमें या तो हीरो, या फिर कॉन्सेप्ट पर फोकस होता है। इसके अलावा कुछ तरीके और हैं, जिन्हें लगाकर पोस्टर्स तैयार किए जाते हैं। चलिए इन सभी कॉन्सेप्ट को समझते हैं।

पोस्टर बनाने के कुल 6 होते हैं तरीके

‘अंधाधुन’, ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘सतलुज’, ‘बाहुबली’, ‘एम एस धोनी’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों के पोस्टर्स तैयार कर चुके राज खत्री ने बताया, “दुनिया भर में जितने भी पोस्टर्स तैयार किए जाते हैं, उन्हें तैयार करने के सिर्फ 6 ही तरीके हैं। पहला यह है कि जो कहानी का मुख्य किरदार है, उसकी कहानी। धोनी, किल-बिल की एक्ट्रेस या फिर बाहुबली को दिखा दिया।” राज ने बताया कि दूसरा तरीका है कि आप फिल्म के लोगो (Logo) या फिर उसके किसी सिम्बल के जरिए आइडिया को बहुत अच्छी तरह कॉन्सेप्ट को पेश कर देते हैं।

भारत में ज्यादा बनते हैं ऐसे पोस्टर्स

इस तरह के पोस्टर में मेकर्स फिल्म का कोई सीन या फिर किरदार नहीं दिखाते हैं। वो बस किसी लोगो, आइकन या फिर थीम के जरिए फिल्म के आइडिया या कहानी को पेश करने की कोशिश करते हैं। राज खत्री ने आगे बात करते हुए इसी पॉडकास्ट में बताया कि तीसरा तरीका होता है शब्दों के जरिए। इस तरह के पोस्टर में हम कोई शब्द, अंक या फिर कोई डायलॉग को ही पोस्टर का हीरो बना देते हैं और यही पोस्टर एक खास थीम के जरिए अपनी फिल्म को प्रमोट करता है। चौथा तरीका वह है जो भारत में काफी इस्तेमाल होता है। इसे हम तकनीकी भाषा में किचन सिंक कहते हैं।

अनूठा है पांचवां और छठवां तरीका

इस तरह के कॉन्सेप्ट वाले पोस्टर में फिल्म के तमाम अलग-अलग किरदारों को एक साथ पोस्टर में दिखा दिया जाता है। कई बार इस तरह के पोस्टर में कहानी के थीम और उससे जुड़ी चीजों को भी पोस्टर में दिखा दिया जाता है। इसके बाद आते हैं पांचवें और छठवें तरह के पोस्टर्स। क्रिएटिव और ऐड गुरु राज खत्री ने बताया, “पांचवां तरीका है स्टार पावर को दिखाने का। इसमें एक्टर को हाइलाइट करते हैं और सब कुछ घटाकर एक्टर को दिखाया जाता है। छठवां और आखिरी तरीका है फिल्म के किसी सीन को निकालकर उससे इर्द-गिर्द पोस्टर गढ़ा जाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN