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मोरक्को से स्पेन पहुंचने के लिए 60,000 लोगों ने सब कुछ दांव पर क्यों लगा दिया?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सेउटा के भीतर बेहद कठिन परिस्थितियों और खाने-पानी की किल्लत के कारण 48 घंटे के भीतर ही 48,000 से ज्यादा प्रवासी वापस मोरक्को लौट गए।

उत्तरी अफ्रीका के तट पर स्थित स्पेन के एन्क्लेव सेउटा (Ceuta) में हाल ही में इतिहास का सबसे बड़ा प्रवासी संकट देखने को मिला। मोरक्को की सीमा पार करके लगभग 60,000 अप्रवासी अचानक स्पेनिश क्षेत्र में दाखिल हो गए। इस दौरान हुई भगदड़ और झड़पों में 67 लोगों की जान चली गई।

हालांकि, सेउटा के भीतर बेहद कठिन परिस्थितियों और खाने-पानी की किल्लत के कारण 48 घंटे के भीतर ही 48,000 से ज्यादा प्रवासी वापस मोरक्को लौट गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्पेन सरकार ने तटीय रेखा पर 500 मीटर लंबे समुद्री बैरियर का निर्माण शुरू कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के विश्लेषण से इस संकट के 6 बड़े कारण सामने आए हैं:

1. मोरक्को पुलिस की रहस्यमयी ढील

विशेषज्ञों और चश्मदीदों के अनुसार, मोरक्को के सीमा सुरक्षा बलों ने जानबूझकर प्रवासियों को आगे बढ़ने दिया।

इमिग्रेशन रिसर्चर लोरेंजो गेब्रिएली के अनुसार, “मोरक्को की सहमति या अनदेखी के बिना एक ही दिन में 50,000 से ज्यादा लोगों का सीमा पार करना नामुमकिन है।”

कई प्रवासियों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि मोरक्को के पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हाथ से इशारा कर स्पेन की ओर जाने दिया।

2. सोशल मीडिया और फर्जी खबरों का तूफान

रॉयटर्स और एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और फेसबुक पर वायरल हुए वीडियो ने इस संकट के दौरान आग में घी का काम किया।

वायरल वीडियो में हजारों लोगों को आसानी से सेउटा की सीमा पार करते दिखाया गया, जिससे दूसरे युवाओं में भी यूरोप पहुंचने की उम्मीद जगी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑनलाइन पोस्ट्स में बाकायदा गाइड दिया जा रहा था कि बॉर्डर कैसे पार करना है और स्पेनिश अधिकारियों के सामने क्या बोलना है।

3. स्पेनिश सुप्रीम कोर्ट का फैसला

8 जुलाई को स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया कि समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासियों को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता।

हालांकि इस फैसले ने अवैध प्रवेश को वैध नहीं बनाया, लेकिन मोरक्को के सोशल मीडिया पर इसे इस तरह प्रचारित किया गया कि अब स्पेन पहुंचने पर किसी को तुरंत डिपोर्ट नहीं किया जाएगा।

4. मोरक्को में आर्थिक तंगी और बेरोजगारी

संकट के पीछे सबसे बड़ी और बुनियादी वजह मोरक्को की बिगड़ती अर्थव्यवस्था है।

14 साल पढ़ाई करने के बावजूद नौकरी न मिलने और 12 घंटे की शिफ्ट में बेहद मामूली वेतन मिलने के कारण युवा देश छोड़ने को मजबूर हैं।

मोरक्को में लगातार सूखा, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के कारण युवाओं को यूरोप में ही अपना भविष्य दिखता है।

5. स्पेन की उदार प्रवासन नीतियां

स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की सरकार की उदार प्रवासन नीतियों को भी इस संकट का कारण माना जा रहा है। विपक्षी स्पेनिश दक्षिणपंथी पार्टियों का आरोप है कि अवैध प्रवासियों को नियमित करने की सरकारी नीतियों से स्पेन मानव तस्करों का मुख्य ठिकाना बनता जा रहा है।

6. स्पेन और मोरक्को के बीच कूटनीतिक तनाव

मोरक्को लंबे समय से सेउटा और मेलिला पर अपना दावा ठोकता रहा है। इतिहास गवाह है कि जब भी मैड्रिड और रबात के बीच कूटनीतिक मतभेद बढ़ते हैं, मोरक्को सीमा पर ढील देकर यूरोप पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए प्रवासन का हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। इससे पहले मई 2021 में भी विवाद के दौरान 12,000 प्रवासी दो दिनों में सेउटा में घुस आए थे।

वापस लौटे प्रवासियों की आपबीती

वापस मोरक्को लौटे प्रवासियों ने बताया कि सेउटा में स्थिति नरक जैसी थी। 21 वर्षीय ब्राहिम ने बताया कि वह तीन दिनों तक केवल पानी पीकर जिंदा रहा क्योंकि खाना खरीदने के पैसे नहीं थे। अन्य युवाओं ने कहा, “सेउटा एक जेल जैसा था, सब कुछ बंद था और सड़कों पर रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN