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भारत में जेन ज़ी के प्रदर्शन को चीन के टिप्पणीकार क्यों बता रहे पीएम मोदी की नाकामी

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Source :- BBC INDIA

बीते दिनों भारत के कई शहरों में युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर प्रदर्शन किया था, यह तस्वीर 25 जुलाई की मुंबई की है

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चीनी टिप्पणीकारों ने बीते दिनों भारत में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बताया.

उन्होंने इन प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था में युवाओं का घटता भरोसा बताया है.

इस मामले में चीन के प्रमुख सरकारी मीडिया ने ख़ुद को काफ़ी हद तक तथ्यात्मक रिपोर्टिंग तक सीमित रखा. लेकिन फुदान यूनिवर्सिटी के एक स्कॉलर ने तर्क दिया कि पीएम मोदी की आर्थिक नीतियां भारत के शिक्षित युवाओं के लिए अवसर पैदा करने में नाकाम रही हैं.

चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीबो’ पर यूजर्स ने भी इन विरोध प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था और शासन की कमजोरियों को उजागर करने वाला बताया.

चीन के कुछ लोगों ने इसे एक भारतीय आलोचक के वीडियो पोस्ट करने के अवसर के रूप में भी इस्तेमाल किया.

नीट यूजी की प्रवेश परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने के विरोध में और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से प्रदर्शन कर रहे थे.

इसके अलावा देशभर में भी कई जगह युवाओं ने प्रदर्शन किया था.

बाद में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सीजेपी का विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ था.

चीनी टिप्पणीकारों ने भारत में हाल ही में देशभर में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे युवाओं में बेरोज़गारी को लेकर व्यापक चिंताओं को वजह बताया.

इन प्रदर्शनों की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

‘पीएम मोदी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका’

नरेंद्र मोदी

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भारत में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया. इसकी शुरुआत नीट-यूजी की प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े और अन्य शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर हुई थी.

इस आंदोलन पर विस्तृत टिप्पणी में, दक्षिण एशियाई अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाले फुदान यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता चेन झुओ ने 27 जुलाई को राष्ट्रवादी ख़बरों और कमेंट्स से जुड़ी वेबसाइट गुआनचा.सीएन पर की.

उन्होंने कहा कि यह “सत्ता में 12 वर्षों के दौरान भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के लिए सबसे गंभीर राजनीतिक झटकों में से एक” बन गया है, जो उन्हें झेलना पड़ा है.”

उनके मुताबिक़, “एक मजबूत राजनीतिक नेता का अधिकार अडिग रुख़ पर आधारित होता है. मोदी को झुकने के लिए मजबूर होना इस बात का संकेत है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है, जिससे यह विरोध प्रदर्शन उनके कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बन गया है.”

टिप्पणी में कहा गया कि यह संकट “सबसे पहले दिखाता है कि मोदी की आर्थिक विकास की नीतियां बड़ी संख्या में शिक्षित भारतीय युवाओं को अवसर देने में सक्षम नहीं हैं.”

23 जुलाई को गुआनचा.सीएन की एक अन्य टिप्पणी में कहा गया, “भारत सरकार ‘कॉकरोचों’ की भारी मौजूदगी का सामना कर घबरा गई.”

इसमें कहा गया कि भारत ने सीजेपी के एक्स अकाउंट पर रोक लगा दी और एक मंत्री ने उस पर “पाकिस्तान और भारत विरोधी समूहों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश” करने का आरोप लगाया.

यह दिलचस्प है कि स्कॉलर ने एक्स पर लगाए गए प्रतिबंधों का ज़िक्र किया, जबकि चीन में एक्स उपलब्ध नहीं है.

इस बीच, सरकारी मान्यता प्राप्त समाचार वेबसाइट ‘द पेपर’ के एक पॉडकास्ट में कहा गया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होना लाखों परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए “व्यवस्थागत और धीमा ज़हर” है.

द पेपर के मुताबिक़ ‘कॉकरोच’ का संकेत सीमित अवसरों का सामना कर रहे शिक्षित युवाओं की “अंतिम कोशिश और जीवित रहने की आवाज़” का प्रतिनिधित्व करता है.

समसामयिक मामलों की पत्रिका नानफेंगचुआंग (साउथ रिव्यूज़) ने भी 27 जुलाई को प्रकाशित एक लेख में कहा, “जेन ज़ी का असंतोष केवल परीक्षा प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने मोदी सरकार के प्रति भारतीय समाज के सभी स्तरों पर व्यापक असंतोष को जन्म दिया.”

शीर्ष सरकारी मीडिया की चुप्पी

कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर एक मीम के तौर पर शुरू हुई और अचानक ही भारत के लाख़ों युवा इससे जुड़ गए

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चीन की ‘शिन्हुआ’ न्यूज़ एजेंसी और सरकारी प्रसारक सीसीटीवी जैसे शीर्ष स्तर के सरकारी मीडिया संस्थानों को इन विरोध प्रदर्शनों को कवर करते हुए नहीं देखा गया.

चाइना डेली जैसे अंतरराष्ट्रीय पाठकों के लिए प्रकाशित सरकारी अंग्रेज़ी अख़बार ने केवल 21 जुलाई को छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की.

यहां तक कि अपने ज़ाहिर राष्ट्रवादी रुख़ के बावजूद ग्लोबल टाइम्स ने भी 23 जुलाई को अपने चीनी संस्करण में केवल एक सीधी समाचार रिपोर्ट प्रकाशित की.

इसमें कहा गया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने से देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का वादा किया.

व्यापक रूप से देखें तो चीनी सरकारी मीडिया में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज अक्सर चुनिंदा होती है, जो चीन के हितों के अनुसार होती है.

इससे पहले वह ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों और जी-7 विरोधी प्रदर्शनों को प्रमुखता से कवर कर चुका है.

जबकि भारत जैसे उन देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों को कम महत्व दिया गया, जिनके साथ चीन क़रीबी संबंध बनाए रखता है या संबंध सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है.

वीबो यूजर्स ने विरोध प्रदर्शनों को शासन से जुड़े मुद्दों से जोड़ा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद मुंबई में जश्न मनातीं युवा लड़कियां

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चीनी सोशल मीडिया अकाउंट और यूजर्स ने बड़े पैमाने पर इन विरोध प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था और शासन से जुड़ी गहरी समस्याओं को उजागर करने वाला बताया.

इसे 29 जुलाई तक 1.4 करोड़ से ज़्यादा बार देखा जा चुका था.

नानफेंगचुआंग की एक पोस्ट के नीचे एक यूजर ने टिप्पणी की कि परीक्षा में नकल “भारत में आम बात” लगती है, जबकि दूसरे यूजर ने इन विरोध प्रदर्शनों का हवाला देकर कहा कि सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत परीक्षा व्यवस्था के महत्व को चीन लंबे समय से समझता रहा है.

कई वीबो यूजर्स ने कनाडा में रहने वाले विश्लेषक और भारत के आलोचक जयंत भंडारी के वीडियो भी साझा किए, जिनमें उन्होंने कहा कि मोदी “कुछ भी हासिल नहीं कर सकते” क्योंकि लोग “पूरी तरह अकुशल (अनस्किल्ड)” हैं और प्रधानमंत्री मोदी को भारत की समस्याओं का केवल एक लक्षण बताया.

उन्होंने कहा कि सत्ता में कोई भी पार्टी रहे, देश का पतन जारी रहेगा.

23 जुलाई को साउथ एशियन स्टडीज़ न्यूज़लेटर के वीबो अकाउंट पर की गई एक पोस्ट में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए कई वीडियो साझा किए गए, इसका संपादन चेन झुओ करती हैं,

एक यूजर ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक आलोचना, भारत की शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़कर मोदी की “शासन चलाने की क्षमता” पर केंद्रित हो गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS