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स्वाइप नहीं, सच्ची मुलाकात चाहिए! Gen-Z ने डेटिंग ऐप्स से क्यों बनाई दूरी, जानिए क्या कहता है सर्वे

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Source :- LIVE HINDUSTAN

डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया से Gen-Z अब ऊब चुका है और रियल लाइफ को अपना रहा है। फोर्ब्स के सर्वे के मुताबिक, युवा अब ऑनलाइन चैट की बजाय लोगों से आमने-सामने मिलकर उन पर भरोसा करना पसंद कर रहे हैं। आइये जानते हैं आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।

सोशल मीडिया आने से पहले लोग मिलते-जुलते ज्यादा था, घूमने के लिए समय निकालते थे, रिलेशनशिप के लिए भी कई मुलाकातें होती थीं लेकिन अब इन सभी चीजों की जगह सोशल मीडिया ने ले ली है। अब प्यार-मोहब्बत और रिश्तों के लिए कई डेटिंग ऐप्स आ चुके हैं, जिसमें घर बैठे ही स्वाइप करते ही आपको पार्टनर भी मिल जाएगा। पहले पार्टनर से बात करें, उसे जानें और फिर मीटिंग तय होती है। लेकिन अब Gen-Z सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के ट्रेंड से दूर भागने लगे हैं और इसे ‘डेटिंग ऐप बर्नआउट’ (Dating App Burnout) कहा जा रहा है। चलिए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों है।

फोर्ब्स का सर्वे क्या कहता है

फोर्ब्स ने करीब 5000 से ज्यादा युवाओं पर एक सर्वे किया, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। इसमें पाया गया कि 80 फीसदी मिलेनियल और 79 फीसदी जेन-जी डेटिंग ऐप से दूर हो रहे हैं। ब्रिटेन की मीडिया रेगुलेटर एजेंसी ऑफकॉम की रिपोर्ट भी इस बदलाव की पुष्टि करती है। ब्रिटेन की मीडिया रेगुलेटर एजेंसी ऑफकॉम की रिपोर्ट भी इस बदलाव को माना है। फेमस डेटिंग ऐप टिंडर की लोकप्रियता में गिरावट आई है। इस ऐप ने अपने 5.9 लाख, बम्बल ने 3.6 लाख और हिंज ने 1.3 लाख यूजर खो दिए हैं।

क्यों हुआ ऐसा

अब लोगों को लगने लगा है कि सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए लोग मिलते तो हैं लेकिन रिश्ते उतने मजबूत नहीं हो पाते हैं। डेटिंग ऐप्स में लोग कुछ सही होते हैं और कुछ सिर्फ मजाक-मस्ती या टाइम पास कर रहे होते हैं। ऐसे में लोगों का एक दूसरे पर भरोसा भी नहीं बन पाता है। यही कारण है कि अब यंग जेनरेशन इन ऐप्स से ऊब रही है और इनसे दूर हो रही है।

डेटिंग ऐप्स से लोग क्यों हो रहे हैं दूर?

1. लगातार स्वाइप करने की थकान

कई लोग महीनों तक प्रोफाइल स्वाइप करते रहते हैं, लेकिन उन्हें कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिल पाता। इससे मेंटल स्ट्रेस बढ़ता है और फिर लोग खुद में ही कमी मानने लगते हैं। इससे युवाओं में कॉन्फिडेंस की कमी भी आ रही है।

2. नकली प्रोफाइल और स्कैम

इन ऐप्स के जरिए लोग स्कैम भी कर रहे हैं और कई लोग नकली प्रोफाइल बनाकर कैटफिशिंग करते हैं। कैटफिशिंग का मतलब हुआ किसी और की पहचान अपनाकर बात करना, जैसे किसी लड़की ने लड़के की प्रोफाइल बनाई और बात करने लगी। ऐसे में लोगों का भरोसा कम हो रहा है।

3. घोस्टिंग से हो रहे परेशान

रिलेशनशिप की दुनिया में घोस्टिंग शब्द भी आपने सुना होगा, मतलब किसी से बात करना और फिर अचानक गायब हो जाना। ऐसा करना सामने वाले व्यक्ति के इमोशन्स के साथ खिलवाड़ करना है। ऐसे में लोग डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं या तनाव हो सकता है।

4. रिश्तों का बन गया मजाक

लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स पर मिलने वाले लोग किसी को गंभीरता से नहीं लेते हैं। ऐसे में रिश्तों का मजाक बनकर रह गया है। अब लोग सिर्फ और अच्छे ऑप्शन की तलाश में रहते हैं।

5. मेंटल हेल्थ हो रही खराब

डेटिंग ऐप्स पर मिलने वाले रिजेक्शन, कम्पैरिजन, लाइक्स और मैच लोगों का कॉन्फिडेंस कम कर रहा है। इसका असर लोगों के दिमाग पर पड़ रहा है और मानसिक तनाव बढ़ रहा है।

क्या कर रहे हैं अब युवा

रील लाइफ और डेटिंग ऐप्स से दूरी बनाकर लोग अब डांस क्लब, कम्युनिटी इवेंट्स में शामिल हो रहे हैं और वहीं पर नए लोगों से मिल रहे हैं। साथ ही मजेदार गेम्स के जरिए भी रिश्ते बनाने की कोशिश करते हैं। Gen-Z अब ग्रुप एक्टिविटी, हॉबी क्लास और वर्कशॉप में हिस्सा ले रहे हैं, जिससे स्किल्स बेहतर हो और लोगों से मिलने का मौका भी मिले। अब जेनरेशन आमने-सामने की बातों-मुलाकातों को ज्यादा तवज्जो दे रही है। सीधे तौर पर कहा जाए तो लोग कुछ सालों पहले होने वाले आपसी व्यवहार को फिर से अपना रहे हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN