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VIDEO: चांद से टकराया मस्क का बेकाबू रॉकेट, स्कूल बस जितना बड़ा साइज; पृथ्वी के लिए खतरा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

एलन मस्क की कंपनी SpaceX का स्कूल बस के आकार का 4-टन वजनी रॉकेट 8,700 km/h की रफ्तार से चांद से टकरा गया है। जानें 18 महीने से भटक रहे इस मलबे के क्रैश की पूरी जानकारी।

पिछले साल से अंतरिक्ष में भटक रहा स्पेस एक्स के फाल्कन-9 रॉकेट का एक हिस्सा बुधवार को तेज रफ्तार से चंद्रमा से टकरा गया। हालांकि, इस टक्कर की आधिकारिक पुष्टि होने में अभी कई घंटे लग सकते हैं। लेकिन एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स ने कहा कि यह टक्कर अनजाने में हुई।

स्पेस एक्स ने यह भी स्पष्ट कहा कि रॉकेट का हिस्सा चांद के पश्चिमी किनारे पर मौजूद आइंस्टीन क्रेटर से टकराने वाला था, जिसे पृथ्वी से देखना अक्सर मुश्किल होता है। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि यह हिस्सा बुधवार को करीब 12:05 बजे चांद से टकराया। उस समय इसकी रफ्तार करीब 8,690 किलोमीटर प्रति घंटा थी। हालांकि चांद की परिक्रमा कर रहा कोई भी अंतरिक्ष यान ऐसी स्थिति में नहीं था जो सीधी तस्वीरें ले पाता।

बाद में तस्वीरें ली जाएंगी

आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कई कारण बताए जा रहे हैं। नासा का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर और दक्षिण कोरिया का पाथफाइंडर लूनर ऑर्बिटर बाद में उस स्थान के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। इन्हीं तस्वीरों से पता चलेगा कि वहां नया गड्ढा बना या नहीं। इसके अलावा तस्वीरें आने और विश्लेषण में समय लगता है। इसलिए अभी वैज्ञानिकों का अनुमान है कि रॉकेट का हिस्सा चांद से टकराया है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद ही की जाएगी।

एलन मस्क ने एक वीडियो शेयर किया है। हालांकि यह वीडियो AI से बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह मस्क का रॉकेट चांद से टकराया होगा। असली तस्वीर और वीडियो नहीं ली जा सकी हैं।

स्कूल बस जितने आकार का ऊपरी हिस्सा

स्कूल बस जितने आकार के ऊपरी हिस्से के टकराने से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। इसकी पुष्टि नासा के प्रवक्ता जिमी रसेल ने की। लेकिन उम्मीद है कि इससे चांद की सतह पर एक गड्ढा (क्रेटर) बन जाएगा।

बिना नियंत्रण के अंतरिक्ष में रहा

स्पेस एक्स का फाल्कन-9 रॉकेट जनवरी 2025 में दो चंद्र लैंडर लेकर अंतरिक्ष में भेजा गया था। रॉकेट का निचला हिस्सा वापस पृथ्वी पर लौट आया था, लेकिन ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में रह गया। इसके बाद लगभग 19 महीने तक यह बिना नियंत्रण के अंतरिक्ष में घूमता रहा। बाद में सूर्य की गतिविधियों और चांद व पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से इसकी कक्षा बदल गई और यह चांद की ओर बढ़ गया।

इससे पहले भी हुई घटनाएं

  • 1959 में सोवियत संघ का लूना-2 चंद्रमा पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित यान था और जानबूझकर चांद से टकराया था।
  • 1969-1972 में नासा के अपोलो मिशनों के दौरान कई सैटर्न-वी रॉकेट के ऊपरी हिस्सों (एस-आईवीबी) और कुछ अन्य हिस्सों को वैज्ञानिक अध्ययन के लिए जानबूझकर चांद से टकराया गया।
  • 2009 में नासा ने पहले रॉकेट के सेंटौर स्टेज को चांद से टकराया, फिर कुछ मिनट बाद अन्य यान भी उसी क्षेत्र में गिरा।
  • 2019 में भारत का चंद्रयान-2 लैंडर चांद पर उतरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस वर्ष इजराइल का बेरेशीट लैंडर भी चांद से टकरा गया था।
  • 2022 में एक चीनी रॉकेट का हिस्सा अनियंत्रित होकर चांद से टकरा गया था।
  • 2023 में रूस का लूना-25 लैंडिंग की कोशिश के दौरान नियंत्रण खोने के कारण चांद से टकराकर नष्ट हो गया।

17,000 टन कचरा अंतरिक्ष में मौजूद

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, जुलाई के आखिर तक पृथ्वी की कक्षा में 46,000 से अधिक अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े मौजूद थे, जिनका कुल वजन करीब 17,000 टन है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN