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सरकार के एक फैसले से दौड़ा ये स्टॉक, अचानक 15% से ज्यादा उछला शेयर; क्या आपका है दांव?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

रेल माल ढुलाई (Rail Freight) सेक्टर में सरकार ने एक बड़ा सुधार किया है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। गुरुवार को ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स (Allcargo Logistics) के शेयरों में करीब 13% की तेज बढ़त दर्ज की गई। इसकी वजह केंद्र सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत अब CTOs (Container Train Operators) को पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन चलाने के लिए अलग-अलग रूट का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। अब एक ही ऑल इंडिया लाइसेंस के जरिए देशभर में कंटेनर ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे कारोबार करना आसान होगा, निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी और रेलवे के जरिए माल ढुलाई को नई गति मिलेगी। आइए इसकी पूरी डिटेल्स जानते हैं।

MCA में संशोधन को मंजूरी

रेल मंत्रालय ने मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (MCA) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब तक कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को अलग-अलग रूट के लिए अलग लाइसेंस व्यवस्था का पालन करना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क के लिए एक ही लाइसेंस पर्याप्त होगा। सरकार जल्द ही इस बदलाव को राजपत्र (Gazette Notification) के माध्यम से लागू करेगी।

फैसले के बाद टूट पड़े निवेशक

इस फैसले के बाद निवेशकों ने ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स (Allcargo Logistics) के शेयरों में जमकर खरीदारी की। सुबह करीब 11:19 बजे कंपनी का शेयर लगभग 15.72% बढ़कर 9.42 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, इस सेक्टर की दूसरी कंपनियां गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स (Gateway Distriparks) और CONCOR (Container Corporation of India) के शेयर लगभग स्थिर रहे।

25 करोड़ रुपये का रजिस्ट्रेशन

नई नीति के तहत जो भी नई कंपनी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर के रूप में काम करना चाहेगी, उसे पूरे नेटवर्क के लिए 25 करोड़ रुपये का एकमुश्त और नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा। इसके बाद वह देश के किसी भी रेलवे रूट पर कंटेनर ट्रेन चला सकेगी। इससे पहले अलग-अलग लाइसेंस और कई तरह की औपचारिकताओं के कारण कंपनियों का समय और लागत दोनों बढ़ जाते थे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से लाइसेंस प्रक्रिया सरल होगी और अधिक निजी निवेश आकर्षित होगा।

लंबी अवधि के निवेश की योजना

सरकार ने एक और महत्वपूर्ण राहत भी दी है। अब कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर अपने कंसेशन पीरियड को अतिरिक्त 20 साल तक बढ़ा सकेंगे और इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त नवीनीकरण या एक्सटेंशन शुल्क नहीं देना होगा। यह फैसला उन कंपनियों के लिए काफी फायदेमंद माना जा रहा है, जो रेलवे लॉजिस्टिक्स में लंबी अवधि के निवेश की योजना बना रही हैं। इससे कंपनियों को भविष्य की रणनीति बनाने में भी आसानी होगी और वे नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।

एक्सपर्ट का मानना है कि यह सुधार भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर की प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करेगा। एकल लाइसेंस व्यवस्था से ऑपरेशन कॉस्ट घट सकती है, ट्रेनों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और माल की आवाजाही पहले से अधिक तेज होगी। इससे उद्योगों को समय पर सप्लाई मिलने में मदद मिलेगी और देश की सप्लाई चेन भी मजबूत होगी। निजी कंपनियों के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आ सकती है, जबकि निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में इस फैसले का फायदा किन-किन लॉजिस्टिक्स कंपनियों को सबसे ज्यादा मिलता है। फिलहाल, ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स (Allcargo Logistics) के शेयरों में आई तेज उछाल इस बात का संकेत है कि बाजार ने सरकार के इस कदम का सकारात्मक स्वागत किया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN